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सदमे से कम नहीं बुढ़ापे में उम्रकैद की सजा

Wed, 22 Jul 2020 06:57 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2020 06:57 PM IST
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मथुरा। दोषी को कोर्ट में पेश करने ले जाती पुलिस। - फोटो : MATHURA
मथुरा। राजा मानसिंह की हत्या के दोषी पुलिसकर्मी जीवन के सात से आठ दशक पूरे का चुके हैं। अब उम्रकैद की सजा उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं है। इस मामले के दोषी 11 पुलिसकर्मियों को जब गाड़ी से न्यायालय परिसर में लाया गया तो उनके चेहरों की उदासी उनके हालात बया कर रही थी। सजा सुनाए जाने के बाद जब पुलिसकर्मी उन्हें लेकर गाड़ी तक पहुंचे तो सदमे जैसी घबराहट भी इस दोषियों पर दिखाई दी।
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हत्याकांड के दोषी 11 पुलिसकर्मियों को जब न्यायालय परिसर में लाया गया तो सुरक्षाकर्मियों ने चारों ओर से उन्हें घेर रखा था। किसी को भी उनके पास भटकने नहीं दिया गया। गाड़ी से उतार कर उन्हें जिला जज के न्यायालय में ले जाया गया। इस दौरान दोषी पुलिसकर्मियों ने किसी से बात नहीं की। न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों की निगाहें दोषियों पर टिकी थीं। सिर झुकाए सभी दोषी न्यायालय में पहुंचे।
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सजा सुनाए जाने के बाद दोषी तत्कालीन डिप्टी एसपी कान सिंह भाटी को पुलिसकर्मी जब गाड़ी तक ले जा रहा था तो उनके पैर कई बार लड़खड़ाए, उनके चेहरे के भाव बता रहे थे कि 82 वर्ष की उम्र में उम्रकैद की सजा सदमे से कम नहीं है। इसी तरह 78 वर्षीय तत्कालीन एसएचओ वीरेंद्र सिंह का भी यही हाल था। वीरेंद्र के चेहरे पर भी तनाव साफ दिखाई दे रहा था।
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