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...ताकि ब्रज के घर-घर में हो एक देसी गाय
रामकुमार रौतेला
Updated Wed, 20 Jul 2016 11:50 PM IST
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देशी गाय ही बचाएगी
- फोटो : Getty
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ब्रज भूमि में एक बार फिर गाय की देसी नस्ल के संवर्धन की तैयारी शुरू हो गई है। गोकुल गांव मिशन योजना को ब्रज में संचालित करने की जिम्मेदारी वेटरनेरी विश्व विद्यालय को दी है और इसके लिए दस करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें लगभग डेढ़ करोड़ रुपये जारी भी कर दिए गए है। इस मिशन के तहत गायों की देशी नस्ल का संवर्धन किया जाएगा और प्रयास किया जाएगा कि ब्रज प्रत्येक गांव में हर घर में कम से कम एक देशी नस्ल की गाय हो।
उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान ने पिछले साल भारत सरकार के राष्ट्रीय गोकुल गांव मिशन के तहत प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया था, जिस पर 10 करोड़ की स्वीकृति देते हुए 1.53 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए।
इस प्रोजेक्ट के तहत भारत सरकार ने यूनिवर्सिटी को क्षेत्रीय गाय की देसी नस्ल के संवर्धन की जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें साहीवाल और हरियाणा नस्ल को यूनिवर्सिटी अब प्रोत्साहित करेगी। दोनों ही नस्ल की 100-100 गाय को जुटाने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी की प्लानिंग है कि अब ब्रज क्षेत्र के पशुपालकों को क्षेत्रीय देसी नस्ल की उक्त गायों के पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए यूनिवर्सिटी के साथ राज्य सरकार के गर्भाधान केन्द्रों पर इसकी सुविधा निशुल्क उपलब्ध रहेगी, जिससे शुद्ध देसी नस्ल तैयार हो सकें।
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लगेगा गोबर गैस प्लांट
यूनिवर्सिटी डेयरी फार्म पर गायों की संख्या बढ़ाने के बाद गोबर गैस प्लांट भी लगाएगी। इससे यहां ऊर्जा की खपत यूपी पावर कार्पोरेशन के बजाय अपने संसाधन से पूरी की जा सके।
ब्रज की गोशालाओं में उपचार में मदद
यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय गोकुल गांव मिशन के तहत ब्रज क्षेत्र की गोशालाओं को भी देसी नस्ल के लिए प्रोत्साहित करते हुए उपचार में मदद करेगी। इसके अलावा राज्य सरकार की कामधेनु डेयरी योजना में पशुपालकों को ट्रेनिंग भी देगी।
यूनिवर्सिटी गोकुल गांव मिशन के तहत देसी नस्ल को प्रोत्साहित करने के लिए काम करेगी। इसके लिए केन्द्र सरकार से आर्थिक मदद मिल रही है। कोशिश होगी कि ब्रज क्षेत्र के गांवों के घर-घर में देसी गाय मौजूद रहे।
- प्रो. केएमएल पाठक, कुलपति
वेटरनेरी यूनिवर्सिटी, मथुरा
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उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान ने पिछले साल भारत सरकार के राष्ट्रीय गोकुल गांव मिशन के तहत प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया था, जिस पर 10 करोड़ की स्वीकृति देते हुए 1.53 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए।
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इस प्रोजेक्ट के तहत भारत सरकार ने यूनिवर्सिटी को क्षेत्रीय गाय की देसी नस्ल के संवर्धन की जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें साहीवाल और हरियाणा नस्ल को यूनिवर्सिटी अब प्रोत्साहित करेगी। दोनों ही नस्ल की 100-100 गाय को जुटाने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी की प्लानिंग है कि अब ब्रज क्षेत्र के पशुपालकों को क्षेत्रीय देसी नस्ल की उक्त गायों के पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए यूनिवर्सिटी के साथ राज्य सरकार के गर्भाधान केन्द्रों पर इसकी सुविधा निशुल्क उपलब्ध रहेगी, जिससे शुद्ध देसी नस्ल तैयार हो सकें।
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लगेगा गोबर गैस प्लांट
यूनिवर्सिटी डेयरी फार्म पर गायों की संख्या बढ़ाने के बाद गोबर गैस प्लांट भी लगाएगी। इससे यहां ऊर्जा की खपत यूपी पावर कार्पोरेशन के बजाय अपने संसाधन से पूरी की जा सके।
ब्रज की गोशालाओं में उपचार में मदद
यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय गोकुल गांव मिशन के तहत ब्रज क्षेत्र की गोशालाओं को भी देसी नस्ल के लिए प्रोत्साहित करते हुए उपचार में मदद करेगी। इसके अलावा राज्य सरकार की कामधेनु डेयरी योजना में पशुपालकों को ट्रेनिंग भी देगी।
यूनिवर्सिटी गोकुल गांव मिशन के तहत देसी नस्ल को प्रोत्साहित करने के लिए काम करेगी। इसके लिए केन्द्र सरकार से आर्थिक मदद मिल रही है। कोशिश होगी कि ब्रज क्षेत्र के गांवों के घर-घर में देसी गाय मौजूद रहे।
- प्रो. केएमएल पाठक, कुलपति
वेटरनेरी यूनिवर्सिटी, मथुरा