{"_id":"575efaa84f1c1bf82311b6a6","slug":"cm-have-denied-the-cbi-inquiry","type":"story","status":"publish","title_hn":"मथुरा की सबसे बड़ी मांग को अनसुना कर गए अखिलेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मथुरा की सबसे बड़ी मांग को अनसुना कर गए अखिलेश
पुनीत शर्मा
Updated Mon, 13 Jun 2016 11:56 PM IST
विज्ञापन
मथुरा में सीएम अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जवाहरबाग हिंसा के ग्यारहवें दिन पहुंचे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मथुरा की सबसे बड़ी मांग को अनसुना कर गए। शहीद पुलिस अफसरों के परिवार वालों से लेकर सियासी लोगों ने आवाज उठाई, मथुरा वासियों ने मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की। सीएम की इस चुप्पी ने सियासी गलियारों में एक मुद्दा छोड़ दिया है जिसे दूसरी पार्टियां भुनाने में लग गईं हैं।
प्रदेश की सियासत को हिला देने वाली जवाहरबाग हिंसा में एसपी सिटी और थानाध्यक्ष समेत 29 लोगों की जान चली गई। हालांकि हिंसा को करीब से देखने वालों की माने तो यह आंकड़ा कहीं ज्यादा है। हिंसा के दौरान जिस तरह से पुलिस ने गोलियां चलाईं थीं उसको देखते हुए भी संख्या अधिक होने की बात कही जा रही है। ढाई साल तक रामवृक्ष के कब्जे में रहे जवाहरबाग से आज भी राख के ढेर से मांस जलने जैसी दुर्गंध उठ रही है। हिंसा के तमाम साक्ष्य यहां बिखरे पड़े हैं।
राख के ढेर के पास लोगों के जले बाल, खोपड़ी और अन्य अवशेष पड़े हैं। लगातार उठने वाले इन सवालों पर ही सीबीआई जांच की मांग की जा रही थी। लोगों को उम्मीद थी कि जब मुख्यमंत्री मथुरा पहुंचेंगे तो वह सीबीआई जांच की वकालत करने की बात जरूर कहेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसके सवाल पर चुप्पी साध ली। वह बस इतना कहते रहे कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। न्यायिक कमेटी जांच कर रही है। मथुरा में दो जून से ही विभिन्न संगठन सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। कभी प्रधानमंत्री को पत्र भेजा जा रहा है तो कभी राष्ट्रपति को। मुख्यमंत्री को भी 100 से ज्यादा ज्ञापन भेजे जा चुके हैं।
विज्ञापन
शहीद एसपी सिटी का परिवार भी चाहता सीबीआई जांच
जवाहरबाग हिंसा के शहीद मुकुल द्विवेदी का परिवार अब भी जांच को लेकर आशंकित हैं। मुख्यमंत्री के समक्ष मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी और भाई प्रफुल्ल द्विवेदी ने देश की सर्वोच्च एजेंसी से जांच कराने की इच्छा जताई। हालांकि इस पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कह दिया कि वह खुद इस मामले को देख रहे हैं। संपूर्ण प्रकरण के प्रत्येक पहलु की जांच कराई जाएगी। किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
इसलिए भी उठ रही थी मांग
ढाई साल में 12 से अधिक बार गई शासन को रिपोर्ट
मथुरा। प्रशासन ने जून 2014 से लेकर फरवरी 2015 तक शासन को 12 बार यह रिपोर्ट भेजी थी कि जवाहरबाग में भीड़ बढ़ रही है। लोगों के पास असलहे हैं। कभी भी हालात बिगड़ सकते हैं। तमाम उपद्रवी लोग भीड़ में शामिल हो गए हैं। इसके बावजूद शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।
एक मंत्री ने बांध रखे थे शासन के हाथ
मथुरा। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी लगातार कहते रहे हैं कि प्रशासन जब भी कार्रवाई की तैयारी करता था तभी प्रदेश सरकार के एक मंत्री अधिकारियों को फोन करके किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने के आदेश दे देते थे। इसके चलते भी सीबीआई जांच की मांग उठ रही थी।
सवाल, क्या रामवृक्ष को पुलिस ने पकड़ लिया था जिंदा
मथुरा। एक सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या रामवृक्ष को पुलिस ने जवाहरबाग से जिंदा पकड़ लिया था और उसे बाद में मारा गया है। यह बात जवाहर बाग से निकलकर भागे कब्जाधारियों ने कही तो शहर में चर्चाएं शुरू हो गई।
बीस से ज्यादा लोग लापता हैं
मथुरा। जवाहरबाग में रामवृक्ष के साथ रहने वाले बीस से ज्यादा लोग आज भी लापता हैं। परिवार वाले उन्हें खोजते हुए घूम रहे हैं लेकिन किसी का सुराग नहीं लग रहा है। अब यह लोग कहां हैं इसका भी कोई पता नहीं चल पा रहा है।
कहां से आ रहा था इतना गोला बारूद
मथुरा। पुलिस ने जवाहरबाग से भारी हथियार और गोला बारूद बरामद किया था। बम तक यहां से मिले। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने असलहे कहां से आ रहे थे। गोला बारूद कौन सप्लाई कर रहा था। इतनी रसद कहां से आ रही थी।
आखिर इनको न्याय कब मिलेगा
जवाहर बाग हिंसा के बाद अपने परिवारीजनों को तलाशने पहुंच रहे लोग लगातार कह रहे है कि रामवृक्ष लोगों को बरगला कर बाग में लाता और फिर उन्हें बंधक लिया जाता था। ऐसे लोग मरने वालों और घायलों में भी शामिल हैं। सवाल यह भी है कि क्या इन्हें न्याय मिलेगा।
जवाहर बाग रहने वाले कब्जाधारियों में से कोई बाहर जाने की कोशिश भी करता तो उसे जाने नहीं दिया जाता था। जवाहर बाग के गेट पर रामवृक्ष और उसके गुर्गों का कड़ा पहरा रहता था। काफी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे हिंसा के बाद से लापता है। विभिन्न अस्पतालों में जिनका उपचार चल रहा है, उनपर भी पुलिस ने पहरा बैठा दिया गया है। इनमें कोई बुजुर्ग है तो कोई महिला। कई तो ऐसे हैं जो सही से चलने फिरने के भी काबिल नहीं है। इनके शरीर की कई हड्डियां टूटी हुई है।
बरगला कर लाए गए इन लोगों तो शायद यह भी नहीं पता होगा कि जिस जवाहरबाग में वह रहे हैं वह सरकार का है और वे अवैध रूप से यहां कब्जा कर रह रहे हैं। पुलिस के डर के चलते इनके परिवार वाले भी नहीं आ रहे हैं।
विज्ञापन
प्रदेश की सियासत को हिला देने वाली जवाहरबाग हिंसा में एसपी सिटी और थानाध्यक्ष समेत 29 लोगों की जान चली गई। हालांकि हिंसा को करीब से देखने वालों की माने तो यह आंकड़ा कहीं ज्यादा है। हिंसा के दौरान जिस तरह से पुलिस ने गोलियां चलाईं थीं उसको देखते हुए भी संख्या अधिक होने की बात कही जा रही है। ढाई साल तक रामवृक्ष के कब्जे में रहे जवाहरबाग से आज भी राख के ढेर से मांस जलने जैसी दुर्गंध उठ रही है। हिंसा के तमाम साक्ष्य यहां बिखरे पड़े हैं।
विज्ञापन
राख के ढेर के पास लोगों के जले बाल, खोपड़ी और अन्य अवशेष पड़े हैं। लगातार उठने वाले इन सवालों पर ही सीबीआई जांच की मांग की जा रही थी। लोगों को उम्मीद थी कि जब मुख्यमंत्री मथुरा पहुंचेंगे तो वह सीबीआई जांच की वकालत करने की बात जरूर कहेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसके सवाल पर चुप्पी साध ली। वह बस इतना कहते रहे कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। न्यायिक कमेटी जांच कर रही है। मथुरा में दो जून से ही विभिन्न संगठन सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। कभी प्रधानमंत्री को पत्र भेजा जा रहा है तो कभी राष्ट्रपति को। मुख्यमंत्री को भी 100 से ज्यादा ज्ञापन भेजे जा चुके हैं।
विज्ञापन
शहीद एसपी सिटी का परिवार भी चाहता सीबीआई जांच
जवाहरबाग हिंसा के शहीद मुकुल द्विवेदी का परिवार अब भी जांच को लेकर आशंकित हैं। मुख्यमंत्री के समक्ष मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी और भाई प्रफुल्ल द्विवेदी ने देश की सर्वोच्च एजेंसी से जांच कराने की इच्छा जताई। हालांकि इस पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कह दिया कि वह खुद इस मामले को देख रहे हैं। संपूर्ण प्रकरण के प्रत्येक पहलु की जांच कराई जाएगी। किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
इसलिए भी उठ रही थी मांग
ढाई साल में 12 से अधिक बार गई शासन को रिपोर्ट
मथुरा। प्रशासन ने जून 2014 से लेकर फरवरी 2015 तक शासन को 12 बार यह रिपोर्ट भेजी थी कि जवाहरबाग में भीड़ बढ़ रही है। लोगों के पास असलहे हैं। कभी भी हालात बिगड़ सकते हैं। तमाम उपद्रवी लोग भीड़ में शामिल हो गए हैं। इसके बावजूद शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।
एक मंत्री ने बांध रखे थे शासन के हाथ
मथुरा। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी लगातार कहते रहे हैं कि प्रशासन जब भी कार्रवाई की तैयारी करता था तभी प्रदेश सरकार के एक मंत्री अधिकारियों को फोन करके किसी भी प्रकार की कार्रवाई न करने के आदेश दे देते थे। इसके चलते भी सीबीआई जांच की मांग उठ रही थी।
सवाल, क्या रामवृक्ष को पुलिस ने पकड़ लिया था जिंदा
मथुरा। एक सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या रामवृक्ष को पुलिस ने जवाहरबाग से जिंदा पकड़ लिया था और उसे बाद में मारा गया है। यह बात जवाहर बाग से निकलकर भागे कब्जाधारियों ने कही तो शहर में चर्चाएं शुरू हो गई।
बीस से ज्यादा लोग लापता हैं
मथुरा। जवाहरबाग में रामवृक्ष के साथ रहने वाले बीस से ज्यादा लोग आज भी लापता हैं। परिवार वाले उन्हें खोजते हुए घूम रहे हैं लेकिन किसी का सुराग नहीं लग रहा है। अब यह लोग कहां हैं इसका भी कोई पता नहीं चल पा रहा है।
कहां से आ रहा था इतना गोला बारूद
मथुरा। पुलिस ने जवाहरबाग से भारी हथियार और गोला बारूद बरामद किया था। बम तक यहां से मिले। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने असलहे कहां से आ रहे थे। गोला बारूद कौन सप्लाई कर रहा था। इतनी रसद कहां से आ रही थी।
आखिर इनको न्याय कब मिलेगा
जवाहर बाग हिंसा के बाद अपने परिवारीजनों को तलाशने पहुंच रहे लोग लगातार कह रहे है कि रामवृक्ष लोगों को बरगला कर बाग में लाता और फिर उन्हें बंधक लिया जाता था। ऐसे लोग मरने वालों और घायलों में भी शामिल हैं। सवाल यह भी है कि क्या इन्हें न्याय मिलेगा।
जवाहर बाग रहने वाले कब्जाधारियों में से कोई बाहर जाने की कोशिश भी करता तो उसे जाने नहीं दिया जाता था। जवाहर बाग के गेट पर रामवृक्ष और उसके गुर्गों का कड़ा पहरा रहता था। काफी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे हिंसा के बाद से लापता है। विभिन्न अस्पतालों में जिनका उपचार चल रहा है, उनपर भी पुलिस ने पहरा बैठा दिया गया है। इनमें कोई बुजुर्ग है तो कोई महिला। कई तो ऐसे हैं जो सही से चलने फिरने के भी काबिल नहीं है। इनके शरीर की कई हड्डियां टूटी हुई है।
बरगला कर लाए गए इन लोगों तो शायद यह भी नहीं पता होगा कि जिस जवाहरबाग में वह रहे हैं वह सरकार का है और वे अवैध रूप से यहां कब्जा कर रह रहे हैं। पुलिस के डर के चलते इनके परिवार वाले भी नहीं आ रहे हैं।