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छाता विधानसभा सीट: तीन दशक से चौधरी लक्ष्मी नारायण और ठाकुर तेजपाल में ही चल रहा शह-मात का खेल

Wed, 26 Jan 2022 06:36 PM IST
ishwar ashish रामकुमार रौतेला, अमर उजाला, मथुरा
रामकुमार रौतेला, अमर उजाला, मथुरा Published by: ishwar ashish Updated Wed, 26 Jan 2022 06:36 PM IST
सार

छाता विधानसभा सीट पर इस बार मिथक तोड़ने की बेकरारी है। भाजपा प्रत्याशी ने विकास कार्यों का दावा किया पर दूसरे नंबर रहे प्रत्याशी का कहना है कि राशन और थाने की राजनीति क अलावा यहां कुछ भी नहीं हुआ।

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chaudhary lakshmi narayan and tahkur tejpal on chhata assembly seat.
योगी सरकार में मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण भाजपा के प्रत्याशी हैं। - फोटो : amar ujala

विस्तार

छाता विधानसभा क्षेत्र में चिर-परिचित प्रतिद्वंद्वी चौधरी लक्ष्मी नारायण और ठाकुर तेजपाल सिंह फिर आमने-सामने हैं। पिछले करीब तीन दशक से इनके बीच शह-मात का खेल चल रहा है। दल बदले तब भी जीतने-हारने वाले योद्धा यही रहे। भाजपा ने कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण पर फिर दांव लगाया है, तो रालोद ने तेजपाल सिंह पर बाजी लगाई है। कांग्रेस ने महिला उम्मीदवार पूनम देवी को बसपा ने सोनपाल को मैदान में उतारा है।

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छाता का मुकाबला बेहद रोचक होता है। तीन दशक के चुनावों पर नजर दौड़ाएं तो न तेजपाल लगातार दो बार जीत पाए और न चौधरी लक्ष्मीनारायण। ये दोनों जिस भी दल से उतरे मुकाबला इन्हीं के बीच रहा। पिछले चुनाव में ठाकुर तेजपाल ने अपने बेटे को चुनाव मैदान में उतारा था। लोग कहते हैं, भले ही प्रतिद्वंद्वी बदल गया हो, पर जीत की बारी चौधरी लक्ष्मी नारायण की थी, और वे जीत गए। बहरहाल, ठाकुर तेजपाल इस बार खुद उम्मीदवार हैं। चौधरी लक्ष्मी नारायण इस बार लगातार नहीं जीतने के मिथक को तोड़ने के लिए बेकरार हैं। वे इसके लिए हर दांवपेच आजमा रहे हैं। वहीं, अन्य दल तीन दशक से  चले आ रहे इस मिथक को तोड़ अपने लिए स्थान बनाने की जुगत में हैं।
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 छाता विधानसभा क्षेत्र में करीब एक लाख ठाकुर हैं तो जाटों की संख्या करीब 72 हजार है। 45 हजार ब्राह्मण और 45 हजार मुस्लिम मतदाता भी हैं। दलितों की संख्या करीब 60 हजार है। 15 हजार गुर्जर और 17 हजार बघेल मतदाता भी यहां हैं। दलित और मुस्लिम मतदाता यहां निर्णायक भूमिका अदा करते हैं।
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तेजपाल के बेटे से हुआ था लक्ष्मी नारायण का मुकाबला
2017  के चुनाव में भाजपा से मैदान में उतरे लक्ष्मी नारायण ने 1,17,537 मत प्राप्त करते हुए जीत हासिल की थी। दूसरे स्थान पर निर्दलीय अतुल सिंह रहे, जिन्हें 53,699 मत मिले थे। अतुल, तेजपाल सिंह के पुत्र हैं। बसपा के मनोज पाठक को 41,290 और रालोद के ऋषि राज को 9801 मत मिले थे। छाता विधानसभा क्षेत्र हरियाणा से सटा हुआ है। इससे जनपद की गोवर्धन, मथुरा और मांट विधानसभा क्षेत्र की सीमाएं भी मिलती हैं। हालांकि, गोवर्धन और मांट का बड़ा हिस्सा इससे सटा हुआ है।

खूब हुए विकास कार्य

मंत्री एवं छाता विधायक चौधरी लक्ष्मी नारायण का कहना है कि सैकड़ों किलोमीटर सड़कों का विकास कराया है। 50 करोड़ से अधिक लागत की इंटरलॉकिंग सड़कें कस्बों और गांवों में बनाई गईं।  पानी की टंकियां बनवाने के साथ स्कूल और कॉलेजों में बड़ा बदलाव कराया है। नहर और रजबहा की सफाई कराकर टेल तक सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता कराई है। बरसाना के विकास की परियोजनाओं पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने बरसाना की होली को विश्व पटल पर ख्याति प्रदान की है।

राशन और थाने की राजनीति के अलावा कुछ नहीं हुआ
2017 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे अतुल सिंह का कहना है कि इन पांच सालों में राशन और थाने की राजनीति के अलावा कुछ भी नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री कई बार बरसाना आए, छाता शुगर मिल की चर्चा तक नहीं हुई। सिर्फ मिल को चालू कराने का वादा ही किया। विकास के नाम पर भी कोई नया काम छाता विधानसभा क्षेत्र में नहीं हुआ है। सड़कों का हाल देखना है तो कोसी-नंदगांव की रोड को देख लीजिए।

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