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वैकुंठ जाने को भक्तों में दिखी उत्सुकता
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 09 Jan 2017 12:08 AM IST
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ठाकुर गोदारंगमन्नार
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धर्नुमास महोत्सव में वैकुंठ एकादशी पर वर्षभर में एक बार खुलने वाले श्रीरंगनाथ मंदिर के बैकुंठ द्वार के दर्शन के लिए भक्तों में भारी उत्सुकता देखी गई। सर्द मौसम में भी वैकुंठ द्वार से निकलने के लिए श्रद्धालु सुबह चार बजे से ही मंदिर परिसर में एकत्रित हो गए। असंख्य श्रद्घालु इस दिव्य वैकुंठ द्वार से निकलकर पुण्य के भागी बने।
रविवार की सुबह लगभग 4.30 बजे जब स्वर्ण जड़ित पालकी में भगवान श्रीगोदारंगमन्नार वैकुंठ द्वार से गुजरे तो संपूर्ण मंदिर परिसर भगवान श्रीगोदारंगमन्नार के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
अर्धरात्रि पंडित विजय किशोर मिश्र के आचार्यत्व में धनुर्मास उत्सव अंतर्गत वैकुुंठ द्वार की तैयारियां मध्य रात से प्रारंभ हो गईं। मंदिर सेवायतों द्वारा रात्रि में पुष्करिणी का जल लाया गया, इसके बाद पूजा-अर्चना प्रारंभ की गई। जो सुबह तक चली।
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इधर सुबह चार बजे से ही श्रद्घालुओं की भारी भीड़ मंदिर के अंदर और बाहर एकत्रित होने लगी। सूर्योदय से पूर्व 5:45 बजे वैकुुंठ द्वार जैसे ही खुला तो समूचा मंदिर प्रांगण भगवान श्रीगोदारंगमन्नार केे जयकारों से गूंज उठा।
सेवायत रत्न जड़ित पालकी में सवार भगवान श्रीगोदारंगमन्नार को कंधों पर लेकर निकले। वैकुंठ द्वार पर कुछ समय वेदपाठी ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चारण के मध्य पूजा-अर्चना की। इसके बाद भगवान श्रीगोदारंगमन्नार की सवारी वैकुंठ द्वारा से आगे चली और पीछे-पीछे भगवान श्रीगोदारंगमन्नार के 12 पार्षद भी पालकी में सवार होकर वैकुंठ द्वार से निकले। भगवान श्रीगोदारंगमन्नार की दिव्य सवारी निकले के बाद भक्त भी वैकुंठ द्वार से होकर निकले और इस दिव्य महोत्सव के साक्षी बने।
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रविवार की सुबह लगभग 4.30 बजे जब स्वर्ण जड़ित पालकी में भगवान श्रीगोदारंगमन्नार वैकुंठ द्वार से गुजरे तो संपूर्ण मंदिर परिसर भगवान श्रीगोदारंगमन्नार के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
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अर्धरात्रि पंडित विजय किशोर मिश्र के आचार्यत्व में धनुर्मास उत्सव अंतर्गत वैकुुंठ द्वार की तैयारियां मध्य रात से प्रारंभ हो गईं। मंदिर सेवायतों द्वारा रात्रि में पुष्करिणी का जल लाया गया, इसके बाद पूजा-अर्चना प्रारंभ की गई। जो सुबह तक चली।
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इधर सुबह चार बजे से ही श्रद्घालुओं की भारी भीड़ मंदिर के अंदर और बाहर एकत्रित होने लगी। सूर्योदय से पूर्व 5:45 बजे वैकुुंठ द्वार जैसे ही खुला तो समूचा मंदिर प्रांगण भगवान श्रीगोदारंगमन्नार केे जयकारों से गूंज उठा।
सेवायत रत्न जड़ित पालकी में सवार भगवान श्रीगोदारंगमन्नार को कंधों पर लेकर निकले। वैकुंठ द्वार पर कुछ समय वेदपाठी ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चारण के मध्य पूजा-अर्चना की। इसके बाद भगवान श्रीगोदारंगमन्नार की सवारी वैकुंठ द्वारा से आगे चली और पीछे-पीछे भगवान श्रीगोदारंगमन्नार के 12 पार्षद भी पालकी में सवार होकर वैकुंठ द्वार से निकले। भगवान श्रीगोदारंगमन्नार की दिव्य सवारी निकले के बाद भक्त भी वैकुंठ द्वार से होकर निकले और इस दिव्य महोत्सव के साक्षी बने।