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विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा-रालोद गठबंधन
हिमांशु त्रिपाठी, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 14 Dec 2015 12:33 AM IST
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ब्रजभूमि में रालोद और भाजपा के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए गठबंधन हो गया है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नए समीकरण का आगाज हो गया है।
यहां पूर्व मंत्री भाजपा नेता लक्ष्मी नारायण चौधरी की पत्नी ममता को रालोद ने समर्थन का एलान कर दिया है। बसपा के पूर्व मंत्री श्यामसुंदर शर्मा को घेरने के लिए यह गठबंधन धरातल पर आया है।
पिछले तीन दिन से भाजपा और रालोद के बड़े नेताओं के बीच सियासी खिचड़ी पक रही थी। इसके बाद रविवार शाम भाजपा और रालोद के नेताओं ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर जिला पंचायत के इस नए गठबंधन की घोषण कर दी।
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पिछली बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहे रालोद नेता अनूप चौधरी के साथ इस प्रेसवार्ता में रालोद जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह सिकरवार और भाजपा की तरफ से लक्ष्मीनारायण चौधरी और अन्य नेता मौजूद रहे।
रालोद पिछली बार जिला पंचायत में अध्यक्ष पद पर काबिज थी और इस बार उसकी कमजोर दावेदारी के बीच बीजेपी को समर्थन देने का फैसला किया गया। इस गठबंधन को भाजपा के लोग मिशन 2017 के लक्ष्य के अहम पड़ाव के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान कहते हैं कि यह गठबंधन सिर्फ जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर हुआ है। सिर्फ लक्ष्मी नरायण चौधरी की पत्नी ममता को समर्थन दिया गया है।
विधानसभा चुनाव के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आगे की परिस्थितियां क्या होंगी यह उस पर निर्भर करेगा। इधर भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रविकांत गर्ग भी इसे स्थानीय परिस्थितियों को लेकर हुआ समझौता बताते हैं। उनके अनुसार विधानसभा चुनाव से जिला पंचायत के समझौते का कोई वास्ता नहीं है।
मथुरा रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी की सियासी कर्मभूमि है और यहां कोई भी फैसला उनकी सहमति के बगैर नहीं लिया जाता।
इस गठबंधन से साफ है कि पंचायत की राजनीति के बहाने ही सही, लेकिन रालोद और भाजपा के एक पाले में आ जाने के बाद विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के गठबंधन की जो चर्चा शुरू हुई है वह निश्चित ही दूर तक जाएगी।
श्यामसुंदर शर्मा को घेरने के लिए नई सियासत
पूर्व मंत्री श्यामसुंदर शर्मा और रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पुरानी है। श्याम इन दिनों बसपा के पाले में नजर आते हैं। जयंत ने श्याम को पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी परंपरागत मांट सीट से पराजित कर दिया था।
हालांकि बाद में जयंत के इस्तीफे के बाद उपचुनाव में श्याम ने अपनी सीट पर फिर कब्जा जमा लिया। श्याम की पत्नी सुधा शर्मा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं, इस बार श्याम अपने बेटे ललित को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज कराने की तैयारी में हैं।
उनके पाले में एक दर्जन से ज्याद जिला पंचायत सदस्य नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि रालोद महासचिव जयंत के पुराने प्रतिद्वंद्वी को घेरने के लिए भाजपा नेता लक्ष्मी नारायण पर दांव लगा दिया गया है।
गठबंधन के साथ ही 2017 के विधानसभा चुनाव को लेकर ब्रजभूमि से भाजपा और रालोद के बीच नए सियासी समीकरण के संकेत भी मिल गए हैं।
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यहां पूर्व मंत्री भाजपा नेता लक्ष्मी नारायण चौधरी की पत्नी ममता को रालोद ने समर्थन का एलान कर दिया है। बसपा के पूर्व मंत्री श्यामसुंदर शर्मा को घेरने के लिए यह गठबंधन धरातल पर आया है।
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पिछले तीन दिन से भाजपा और रालोद के बड़े नेताओं के बीच सियासी खिचड़ी पक रही थी। इसके बाद रविवार शाम भाजपा और रालोद के नेताओं ने संयुक्त प्रेसवार्ता कर जिला पंचायत के इस नए गठबंधन की घोषण कर दी।
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पिछली बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहे रालोद नेता अनूप चौधरी के साथ इस प्रेसवार्ता में रालोद जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह सिकरवार और भाजपा की तरफ से लक्ष्मीनारायण चौधरी और अन्य नेता मौजूद रहे।
रालोद पिछली बार जिला पंचायत में अध्यक्ष पद पर काबिज थी और इस बार उसकी कमजोर दावेदारी के बीच बीजेपी को समर्थन देने का फैसला किया गया। इस गठबंधन को भाजपा के लोग मिशन 2017 के लक्ष्य के अहम पड़ाव के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान कहते हैं कि यह गठबंधन सिर्फ जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर हुआ है। सिर्फ लक्ष्मी नरायण चौधरी की पत्नी ममता को समर्थन दिया गया है।
विधानसभा चुनाव के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आगे की परिस्थितियां क्या होंगी यह उस पर निर्भर करेगा। इधर भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रविकांत गर्ग भी इसे स्थानीय परिस्थितियों को लेकर हुआ समझौता बताते हैं। उनके अनुसार विधानसभा चुनाव से जिला पंचायत के समझौते का कोई वास्ता नहीं है।
मथुरा रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी की सियासी कर्मभूमि है और यहां कोई भी फैसला उनकी सहमति के बगैर नहीं लिया जाता।
इस गठबंधन से साफ है कि पंचायत की राजनीति के बहाने ही सही, लेकिन रालोद और भाजपा के एक पाले में आ जाने के बाद विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के गठबंधन की जो चर्चा शुरू हुई है वह निश्चित ही दूर तक जाएगी।
श्यामसुंदर शर्मा को घेरने के लिए नई सियासत
पूर्व मंत्री श्यामसुंदर शर्मा और रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पुरानी है। श्याम इन दिनों बसपा के पाले में नजर आते हैं। जयंत ने श्याम को पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी परंपरागत मांट सीट से पराजित कर दिया था।
हालांकि बाद में जयंत के इस्तीफे के बाद उपचुनाव में श्याम ने अपनी सीट पर फिर कब्जा जमा लिया। श्याम की पत्नी सुधा शर्मा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं, इस बार श्याम अपने बेटे ललित को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज कराने की तैयारी में हैं।
उनके पाले में एक दर्जन से ज्याद जिला पंचायत सदस्य नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि रालोद महासचिव जयंत के पुराने प्रतिद्वंद्वी को घेरने के लिए भाजपा नेता लक्ष्मी नारायण पर दांव लगा दिया गया है।
गठबंधन के साथ ही 2017 के विधानसभा चुनाव को लेकर ब्रजभूमि से भाजपा और रालोद के बीच नए सियासी समीकरण के संकेत भी मिल गए हैं।