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ब्रज मच्यौ हल्ला रोहिणी ने जायौ लल्ला
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 08 Sep 2016 12:17 AM IST
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दाऊजी मंदिर बलदेव
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धरनीधर शेषावतार श्रीब्रजराज बलदेवजी का जन्मोत्सव बुधवार को दाऊजी मंदिर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इसके अलावा नगर के अन्य मंदिरों और घर-घर में जन्मोत्सव मनाया गया।
मुख्य कार्यक्रम दाऊजी मंदिर में सुबह चार बजे से शुरू हुआ। दोपहर तक लाखों भक्तों ने दाऊजी महाराज और रेवती मैया के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। क्षीरसागर में स्नान और आचमन कर भक्तों ने अपने दाऊ दादा का जन्मोत्सव मना कर मनौती मांगी।
देर रात तक दर्शन करने वालों का तांता लगा रहा। चाराें ओर जै हलधारी जै बलधारी तेरी जय हो। बाजे दाऊ बाबा का डंका चहुंओर, बलिहारी जाऊ अपने दाऊ दादा के चरणन में, ब्रज मच्यौ हल्ला रोहिणी ने जायौ लल्ला, दाऊ बाबा अवतारी इनकी महिमा है निराली, नंद के आनंद भए जय दाऊ दयाल की, आदि भजनों की धुन पर श्रद्धालु नाचते गाते रहे।
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मंदिर में सुबह 108 विद्वान पंडितों ने बलभद्र सहस्त्रनाम पाठ, हवन पूजा की। दोपहर में विशेष प्रकार से निर्मित पंचामृत से अभिषेक हुआ। हीरा, जवाहरात पहन कर ठाकुरजी ने विशेष दर्शन दिए। मंदिर में समाज गायन का आयोजन हुआ।
इसके उपरांत नंदोत्सव हुआ। इसमें मंदिर रिसीवर आरके पांडेय ने नारियल और प्रसाद हल्दी दही माखन केसर मिश्रित लाला की छीछी प्रसाद स्वरूप लुटाई। बलदेवजी के समक्ष नारियल लूटने के लिए मल्ल विद्या का प्रदर्शन हुआ। नंदोत्सव पश्चात क्षीरसागर की परिक्रमा करते हुए सेवायत अपने घरों को लूटे हुए नारियल जीत का जश्न मनाते हुए गए।
ब्रजराज के जन्मोत्सव के अवसर पर बहुत से श्रद्धालु लड्डू गोपाल के साथ आए। अपने कन्हैया बाल स्वरूप को उनके बड़े भैया के जन्मोत्सव में शामिल कर अपने को बड़भागी बनाया।
इस अवसर भागवत प्रवक्ता इंद्रेश उपाध्याय, गोकुल के पंकज बाबा ने कहा कि जि ऐसौ आनंद भयौ कि मुख सौ नहिं कह्यौ जाय। जि ब्रजराज अवतारी के जन्मोत्सव देखवै कू देवताऊ तरसैं। हमैं तो परमानंद आ गयौ। मंदिर में व्यवस्थाएं रिसीवर आरके पांडेय और कल्याण सेवा समिति के सदस्यों ने संभालीं।
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क्षीरसागर में लगा सेहरों का ढेर
बलदेव छठ पर उमड़ी भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सुबह से दोपहर तक सभी रास्ते भक्तों से खचाखच भरे थे। परिक्रमा मार्ग, छतों, मंदिर प्रांगण खचाखच भरा था। जिनके परिवार में शादी हुई, वे अपने देव के नाम पर न्यौछावर अलग से रखते हैं। वे अपने-अपने पुत्र के सेहरे को क्षीरसागर में प्रवाहित कर देते हैं। यह पुरानी परंपरा आज भी निभाई जा रही है। क्षीरसागर पर बुधवार को सेहरों का ढेर लग गया। इस पर्व को मोहर छठ भी कहते हैं।
ब्रजराज के जन्मोत्सव पर इंद्र भी बरसे
ब्रजराज श्रीदाऊजी महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर दोपहर समाज गायन के ठीक बाद नंदोत्सव का शुभारंभ हुआ तो अचानक इंद्र भगवान भी मेहरबान हो गए और देखते-देखते तेज वर्षा होने लगी। सभी बचने को इधर-उधर भागने लगे, लेकिन जैसे ही दधिकांधौ नंदोत्सव शुरू हुआ तो बारिश बंद हो गई।
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मुख्य कार्यक्रम दाऊजी मंदिर में सुबह चार बजे से शुरू हुआ। दोपहर तक लाखों भक्तों ने दाऊजी महाराज और रेवती मैया के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। क्षीरसागर में स्नान और आचमन कर भक्तों ने अपने दाऊ दादा का जन्मोत्सव मना कर मनौती मांगी।
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देर रात तक दर्शन करने वालों का तांता लगा रहा। चाराें ओर जै हलधारी जै बलधारी तेरी जय हो। बाजे दाऊ बाबा का डंका चहुंओर, बलिहारी जाऊ अपने दाऊ दादा के चरणन में, ब्रज मच्यौ हल्ला रोहिणी ने जायौ लल्ला, दाऊ बाबा अवतारी इनकी महिमा है निराली, नंद के आनंद भए जय दाऊ दयाल की, आदि भजनों की धुन पर श्रद्धालु नाचते गाते रहे।
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मंदिर में सुबह 108 विद्वान पंडितों ने बलभद्र सहस्त्रनाम पाठ, हवन पूजा की। दोपहर में विशेष प्रकार से निर्मित पंचामृत से अभिषेक हुआ। हीरा, जवाहरात पहन कर ठाकुरजी ने विशेष दर्शन दिए। मंदिर में समाज गायन का आयोजन हुआ।
इसके उपरांत नंदोत्सव हुआ। इसमें मंदिर रिसीवर आरके पांडेय ने नारियल और प्रसाद हल्दी दही माखन केसर मिश्रित लाला की छीछी प्रसाद स्वरूप लुटाई। बलदेवजी के समक्ष नारियल लूटने के लिए मल्ल विद्या का प्रदर्शन हुआ। नंदोत्सव पश्चात क्षीरसागर की परिक्रमा करते हुए सेवायत अपने घरों को लूटे हुए नारियल जीत का जश्न मनाते हुए गए।
ब्रजराज के जन्मोत्सव के अवसर पर बहुत से श्रद्धालु लड्डू गोपाल के साथ आए। अपने कन्हैया बाल स्वरूप को उनके बड़े भैया के जन्मोत्सव में शामिल कर अपने को बड़भागी बनाया।
इस अवसर भागवत प्रवक्ता इंद्रेश उपाध्याय, गोकुल के पंकज बाबा ने कहा कि जि ऐसौ आनंद भयौ कि मुख सौ नहिं कह्यौ जाय। जि ब्रजराज अवतारी के जन्मोत्सव देखवै कू देवताऊ तरसैं। हमैं तो परमानंद आ गयौ। मंदिर में व्यवस्थाएं रिसीवर आरके पांडेय और कल्याण सेवा समिति के सदस्यों ने संभालीं।
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क्षीरसागर में लगा सेहरों का ढेर
बलदेव छठ पर उमड़ी भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सुबह से दोपहर तक सभी रास्ते भक्तों से खचाखच भरे थे। परिक्रमा मार्ग, छतों, मंदिर प्रांगण खचाखच भरा था। जिनके परिवार में शादी हुई, वे अपने देव के नाम पर न्यौछावर अलग से रखते हैं। वे अपने-अपने पुत्र के सेहरे को क्षीरसागर में प्रवाहित कर देते हैं। यह पुरानी परंपरा आज भी निभाई जा रही है। क्षीरसागर पर बुधवार को सेहरों का ढेर लग गया। इस पर्व को मोहर छठ भी कहते हैं।
ब्रजराज के जन्मोत्सव पर इंद्र भी बरसे
ब्रजराज श्रीदाऊजी महाराज के जन्मोत्सव के अवसर पर दोपहर समाज गायन के ठीक बाद नंदोत्सव का शुभारंभ हुआ तो अचानक इंद्र भगवान भी मेहरबान हो गए और देखते-देखते तेज वर्षा होने लगी। सभी बचने को इधर-उधर भागने लगे, लेकिन जैसे ही दधिकांधौ नंदोत्सव शुरू हुआ तो बारिश बंद हो गई।