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Mathura News: अब अगले वर्ष फूलों के बंगले में विराजेंगे ठा. श्रीबांकेबिहारी
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वृंदावन। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में बुधवार को इस सीजन का अंतिम फूलबंगला सजाया जाएगा। गर्मी के दिनों में आराध्य को शीतलता प्रदान करने के लिए सजने वाले फूलबंगलों की सेवा हरियाली अमावस्या के साथ समाप्त हो जाएगी। अब श्रद्धालुओं को ठाकुरजी के फूलबंगले के दर्शन अगले वर्ष हो सकेंगे।
ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी की सेवा परंपरा उनके प्राकट्यकर्ता स्वामी हरिदास ने शुरू की थी। गर्मी के दिनों में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए फूलबंगला सजाने की परंपरा भी उन्हीं की देन है। चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी से शुरू हुई फूलबंगलाें की सेवा हरियाली अमावस्या तक चलती है। इस दौरान केवल एक दिन अक्षय तृतीया पर फूलबंगला नहीं सजाया जाता। इसके चलते 109 दिनों में दोनों समय में मिलाकर 218 फूलबंगला सजाए जाते हैं। इस वर्ष 12 अगस्त तक फूलबंगले सजेंगे।
परंपरा में आया बदलाव
फूलबंगला सजाने की परंपरा में समय के साथ बदलाव आया है। पहले केले के तने और पत्तियों से फूलबंगले तैयार किए जाते थे। अब विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से फूलबंगलों को सजाया जाता है। फूलों की आकर्षक सजावट से ठाकुरजी का दरबार और मंदिर परिसर दिव्य नजर आता है। कई भक्तों ने अभी से अगले वर्ष के लिए फूलबंगले की सेवा के लिए बुकिंग करानी शुरू कर दी है।
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ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी की सेवा परंपरा उनके प्राकट्यकर्ता स्वामी हरिदास ने शुरू की थी। गर्मी के दिनों में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए फूलबंगला सजाने की परंपरा भी उन्हीं की देन है। चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी से शुरू हुई फूलबंगलाें की सेवा हरियाली अमावस्या तक चलती है। इस दौरान केवल एक दिन अक्षय तृतीया पर फूलबंगला नहीं सजाया जाता। इसके चलते 109 दिनों में दोनों समय में मिलाकर 218 फूलबंगला सजाए जाते हैं। इस वर्ष 12 अगस्त तक फूलबंगले सजेंगे।
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परंपरा में आया बदलाव
फूलबंगला सजाने की परंपरा में समय के साथ बदलाव आया है। पहले केले के तने और पत्तियों से फूलबंगले तैयार किए जाते थे। अब विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से फूलबंगलों को सजाया जाता है। फूलों की आकर्षक सजावट से ठाकुरजी का दरबार और मंदिर परिसर दिव्य नजर आता है। कई भक्तों ने अभी से अगले वर्ष के लिए फूलबंगले की सेवा के लिए बुकिंग करानी शुरू कर दी है।
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