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अस्तित्व को लड़ रहीं यमुना महारानी

Mathura Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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श्रीकृष्ण की पटरानी और यम की बहन मां यमुना आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही हैं। यमुना शुद्ध करने को योजना बनी करोड़ों रुपये पानी की तरह बहे लेकिन नहीं बह सकी तो यमुना में अविरल धारा। जीवनदायिनी मैली की मैली ही रही गई। इतना ही नहीं यमुना की दुर्दशा पर गंभीर माननीय सुप्रीम कोर्ट की फटकार से भी धूर्त अधिकारियों और निष्क्रिय सरकारों के कानों पर जूं नहीं रेंगा। वे यमुना मैय्या पर हो रहे सितम में कभी भागीदार बने तो कभी मूक दर्शक की भूमिका में रहे। तीन ओर से यमुना से घिरी मंदिरों की नगरी श्रीधाम वृंदावन में आज यमुना एक नाले के रूप में तब्दील होकर कर रह गई है।
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वृंदावन। दूषित यमुना को पुराना स्वरूप प्रदान करने की योजनाएं कागजों पर ही सिमट कर रह गईं। यमुना बचाने और स्वच्छ बनाने के लिए बनाए गए यमुना एक्शन प्लान में भी गोलमाल किया गया। इसमें कुछ गैर सरकारी संगठनों ने प्लान के प्रथम चरण में जागरूकता अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये डकार लिए तो संबंधित अधिकारी भी पीछे नहीं रहे।
कागजों में दौड़े यमुना बचाने के घोड़ों की हकीकत आज सभी के सामने है। प्रथम चरण में वृंदावन में यमुना शुद्धीकरण के लिए सात सौ करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया। इसके बावजूद एक दर्जन से अधिक शहर और गांव के खुले नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं। यमुना शुद्धीकरण का दूसरा चरण भी यमुना को स्वच्छ नहीं कर सका। पिछले कई वर्षों से यमुना में सीधे तौर पर प्रवाहित हो रहे नालों की न टेपिंग की गई और न ही इनको एसटीपी से जोड़ा गया। करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़ी यमुना नाले में तब्दील हो गई है, लेकिन इस ओर से बेखबर प्रशासन यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं कर रहा है।

यहां गिर रहे यमुना में नाले
वृंदावन (ब्यूरो)। दिल्ली और हरियाणा से दूषित पानी आने के अलावा वृंदावन और आसपास के कई गांवों और वृंदावन शहर का दूषित पानी सीधे यमुना में गिर रहा है। इनमें गांव बाबूगढ़ का बड़ा नाला, वाराह घाट, कालीदह घाट, जुगल घाट, बिहार घाट, शृंगार वट, केशीघाट, भौंराघाट, ज्ञान गुदड़ी घाट, चीरघाट, टिकारी घाट, श्मशान घाट, वंशीवट, दुर्गापुरम कालोनी, गांव राजपुर के नालों के अलावा यमुना पार के गांव पानीगांव, अक्रूर एवं अहिल्यागंज के नाले सीधे यमुना में गिर रहे हैं।

नहीं कारगर सिद्ध हो पा रहा है एसटीपी प्लांट
वृंदावन (ब्यूरो)। यमुना एक्शन प्लान के अंतर्गत 90 के दशक में कालीदह घाट और ज्ञान गुदड़ी घाट पर एसटीपी का निर्माण कराया गया। इनमें कालीदहघाट स्थित एसटीपी का पिछले कई महीने से नव निर्माण कार्य चलने के कारण प्रभावित है। इससे पानी ट्रीट नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा बिहारघाट, बड़ा बगीचा और कालीदह पर छोटे पंपिंग स्टेशनों का निर्माण हुआ। इन एसटीपी और पंपिंग स्टेशनों का उद्देश्य यमुना में गिरने वाले सभी नाले के पानी को पंप के माध्यम से मुखर्जी पार्क स्थित बड़े पंपिंग स्टेशन प्रवाहित करना था। मुखर्जी पार्क में लगे पंपिंग स्टेशन का कार्य यहां एकत्रित हुए गंदे पानी को पागल बाबा स्थित बड़े एसटीपी प्लांट पर भेजा जाना था। पूर्व में एसटीपी का संचालन जलनिगम द्वारा किया गया लेकिन जब से नगर पालिका के हाथों एसटीपी का रख-रखाव आया है, सारी व्यवस्थाएं चौपट हो गई हैं।
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