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प्राण से प्यारा रहा जिनको वतन है, स्वयं को चाहा नही दो गज कफन है

Tue, 31 Jan 2017 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी Updated Tue, 31 Jan 2017 11:25 PM IST
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Those lovely old country soul is not willing to own two-yard shroud
प्राण से प्यारा रहा जिनको वतन है, स्वयं को चाहा नही दो गज कफन है - फोटो : अमर उजाला
होली पब्लिक स्कूल में सोमवार शाम को आयोजित काव्य गोष्ठी के दौरान एक और बंटवारा पुस्तक का विमोचन किया गया।
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गोष्ठी के मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य जेसी त्रिपाठी और विशिष्ट अतिथि कवि समीक्षा जादौन कासंगज थी। संचालन बदन सिंह मस्ताना ने किया।

गोष्ठी में श्रीकृष्णा मिश्र ने कवि द्वारिक प्रसाद के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि कवि का जन्म जनवरी माह में जिला उन्नाव हुआ था आप की रचनाएं कृष्ण नायन, महाकाव्य प्रणेता श्रोत थे। डा. हरिश्चंद्र शाक्य ने रोला, छंद विधा पर कवियों की रचनाओं पर विस्तार से चर्चा की। अतिथियों ने डा. जयंती प्रसाद जयंत के काव्य संग्रह एक और बंटवारा पुस्तक का विमोचन किया। कवि बदन सिंह मस्ताना ने काव्य पाठ करते हुए ‘प्राण से प्यारा रहा जिनको वतन है, स्वयं को चाहा नही दो गज कफन है’ सुनाया। ईएम अनम ने ‘जन्ने वफा का हुस्न कोई देखता नहीं, सब देखते है जिस्म पे कैसा लिबास है।’ राशि राहत ने ‘पंतग उड़ाना उसे में सिखा तो दू राशिद, वो सबसे पहले मगर मेरी डोर काटेगा।’ सुनाया। समीक्षा सिंह जादौन कासगंज ने ‘जौहर पर लांछन लगा दिया है गुंडे और मवाली ने, पद्मा की मर्यादा को ललकारा है लीला भंसाली ने’, अभिवृत अक्षांश दिल्ली ने ‘गंगा दूषित हो जाएगी लज्जित होते भूप मिलेंगे कलयुग में ना जाने कितने जय चंद के रूप मिलेंगे’। राणा सक्सेना ने ‘शब्दों का साथ जोड़कर में एक कहानी लिख गया, सारा लहू जलता गया पर नव जवानी लिख गया।’ सुरेश चौहान नीरव ने ‘दर्द कहानी उन वीरों की, हम सुध कैसे भूल गए।’ भारत मां की खातिर वो तो, फांसी का फंदा झूल गए।’ सुनाया। डा. दीन मोहम्मद दीन ने ‘आओ अपना देश बचाएं आओ भेद भाव बिसराएं, मिलकर अपनी शक्ति बढ़ाएं भारत को आगे लेकर जाएं।’ सुनाया। धर्मेंद्र सिंह धरम ने ‘खत के साथ डाकिया जब लेकर आता था प्यार, मां बाबू जी बड़ी अम्मा का मिलता था खूब दुलार’ सुनाया। उदय वीर सिंह यादव, बिजेंद्र सरल, डा. राकेश रवि, श्री चंद्र वर्मा, संदीप, श्री चंद सरगम, विजय लक्ष्मी भदौरिया, डा. आशा सक्सेना, राम प्रकाश पांडेय, श्रीकृष्ण मिश्र आदि ने भी काव्य पाठ किया। उमेश दुबे, शिवनंदन सिंह, ज्ञानेंद्र दीक्षित, अभय शर्मा, श्री कृष्ण मौर्य, सत्य सेवक मिश्र, नीटू मिश्रा, डाक्टर अनुराग दुबे, पुष्पेंद्र , चतुर्वेदी, वीपी सिंह, हाकिम सिंह यादव, रामवीर यादव, एमएस कामठान आदि उपस्थित थे।
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