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Mainpuri News: सी-आर्म मशीन दो साल से खराब
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मैनपुरी। शासन की ओर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिले में हर साल करोड़ों के नए भवन तो बन रहे हैं, लेकिन जरूरी मशीनों का इंतजाम करने में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। सबसे हैरान करने वाली स्थिति जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर की है, जहां हड्डी रोग के जटिल ऑपरेशन के लिए जरूरी सी-आर्म मशीन पिछले दो साल से खराब पड़ी है। विभाग हड्डी रोग विशेषज्ञों के वेतन पर हर महीने करीब 8 लाख रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन महज चार लाख रुपये की इस जीवनरक्षक मशीन की दो साल में भी व्यवस्था नहीं हो पाई।
महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में डॉ. आरके शुक्ला और डॉ. ललित कुमार विशेषज्ञ के रूप में तैनात हैं। इसके अलावा दो संविदा डॉक्टर भी कार्यरत हैं। एक हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती टेलीमेडिसिन विभाग में की गई है, हालांकि वास्तविकता यह है कि वे टेलीमेडिसिन में न बैठकर जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में ही बैठते हैं। इन सभी चिकित्सकों को लगभग 8 लाख रुपये हर माह वेतन के रूप में दिए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पिछले दो साल में करीब 50 मरीजों के माइनर ऑपरेशन तो हुए, लेकिन मेजर सर्जरी एक भी नहीं हो पाई। इसका सीधा नतीजा यह है कि इमरजेंसी से लगातार गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। विभागीय अफसर मेजर ऑपरेशन न होने की वजह सी-आर्म मशीन का खराब होना बताते हैं। बाजार में इस मशीन की कीमत लगभग चार लाख रुपये है।
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जिला अस्पताल के डॉक्टर निजी अस्पतालों में कर रहे ऑपरेशन
सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर भले ही जिला अस्पताल में ऑपरेशन न कर रहे हों। विभागीय अधिकारी उनके दूसरे काम गिना रहे हों लेकिन वही डॉक्टर निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के लिए बुलाए जाते हैं। सच तो यह है कि जिला अस्पताल में बैठकर ये डॉक्टर अपने दलालों के माध्यम से मरीजों को निजी अस्पतालों पर भेजते हैं।
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केस नंबर-1
बेवर थाना क्षेत्र के गांव खांकेताल निवासी पुष्पा ई-रिक्शा पलटने से घायल होकर 6 अगस्त को जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंची। उनके कूले में चोट थी। इमरजेंसी के डॉक्टर ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह देते हुए मेडिकल कॉलेज सैफई के लिए रेफर कर दिया। पुष्पा के पति की मौत हो चुकी है। बच्चे छोटे-छोटे हैं। उसके साथ सैफई जाने वाला कोई नहीं था। साथ आए लोग इमरजेंसी में डॉक्टरों से यहीं उपचार कराने की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया बाद में उन लोगों को निजी डॉक्टर के यहां पुष्पा को ले जाना पड़ा।
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केस नंबर- 2
देवी रोड निवासी रेखा सिंह को शनिवार को पैर में चोट लग गई। परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉ. रविकांत ने उनका एक्सरे कराया और ऑपरेशन की सलाह दी। जब उनके पति ने जिला अस्पताल में ऑपरेशन की जानकारी की तो पता चला कि यहां सी-आर्म मशीन नहीं है इसके चलते उनका ऑपरेशन यहां नहीं हो सकता। बाद में परिजन उन्हें एक निजी डॉक्टर के यहां ले गए। उनके पति कौशलेंद्र सिंह का कहना था कि करोड़ों के भवनों का क्या फायदा है जब यहां छोटे से उपचार की व्यवस्था नहीं है।
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पिछले सात महीने जिला अस्पताल से रेफर मरीज
जनवरी- 33
फरवरी- 27
मार्च- 38
अप्रैल- 31
मई- 29
जून- 22
जुलाई- 25
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सी-आर्म मशीन का कार्य
सी-आर्म मशीन एक पोर्टेबल मेडिकल इमेजिंग उपकरण है जो एक्स-रे और फ्लोरोस्कोपी तकनीक का उपयोग करके सर्जरी या ऑपरेशन के दौरान शरीर के अंदरूनी हिस्सों की लाइव (वास्तविक समय) और साफ तस्वीरें डॉक्टर को कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाता है।
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मैंने दो महीने पहले ही कार्यभार ग्रहण किया है। विशेषज्ञ के रूप में डॉ. आरके शुक्ला और डॉ.ललित कुमार की तैनाती है। डॉ. ललित कुमार दो महीने से अस्पताल नहीं आ रहे हैं। सी-आर्म मशीन के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। अतिरिक्त डॉक्टर की भी मांग की गई है। जब तक मशीन नहीं आ जाती तब तक ऑपरेशन कराना संभव नहीं है।
डॉ. राज सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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महाराजा तेज सिंह जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में डॉ. आरके शुक्ला और डॉ. ललित कुमार विशेषज्ञ के रूप में तैनात हैं। इसके अलावा दो संविदा डॉक्टर भी कार्यरत हैं। एक हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती टेलीमेडिसिन विभाग में की गई है, हालांकि वास्तविकता यह है कि वे टेलीमेडिसिन में न बैठकर जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में ही बैठते हैं। इन सभी चिकित्सकों को लगभग 8 लाख रुपये हर माह वेतन के रूप में दिए जा रहे हैं।
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जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पिछले दो साल में करीब 50 मरीजों के माइनर ऑपरेशन तो हुए, लेकिन मेजर सर्जरी एक भी नहीं हो पाई। इसका सीधा नतीजा यह है कि इमरजेंसी से लगातार गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। विभागीय अफसर मेजर ऑपरेशन न होने की वजह सी-आर्म मशीन का खराब होना बताते हैं। बाजार में इस मशीन की कीमत लगभग चार लाख रुपये है।
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जिला अस्पताल के डॉक्टर निजी अस्पतालों में कर रहे ऑपरेशन
सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के डॉक्टर भले ही जिला अस्पताल में ऑपरेशन न कर रहे हों। विभागीय अधिकारी उनके दूसरे काम गिना रहे हों लेकिन वही डॉक्टर निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के लिए बुलाए जाते हैं। सच तो यह है कि जिला अस्पताल में बैठकर ये डॉक्टर अपने दलालों के माध्यम से मरीजों को निजी अस्पतालों पर भेजते हैं।
केस नंबर-1
बेवर थाना क्षेत्र के गांव खांकेताल निवासी पुष्पा ई-रिक्शा पलटने से घायल होकर 6 अगस्त को जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंची। उनके कूले में चोट थी। इमरजेंसी के डॉक्टर ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह देते हुए मेडिकल कॉलेज सैफई के लिए रेफर कर दिया। पुष्पा के पति की मौत हो चुकी है। बच्चे छोटे-छोटे हैं। उसके साथ सैफई जाने वाला कोई नहीं था। साथ आए लोग इमरजेंसी में डॉक्टरों से यहीं उपचार कराने की गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया बाद में उन लोगों को निजी डॉक्टर के यहां पुष्पा को ले जाना पड़ा।
केस नंबर- 2
देवी रोड निवासी रेखा सिंह को शनिवार को पैर में चोट लग गई। परिजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉ. रविकांत ने उनका एक्सरे कराया और ऑपरेशन की सलाह दी। जब उनके पति ने जिला अस्पताल में ऑपरेशन की जानकारी की तो पता चला कि यहां सी-आर्म मशीन नहीं है इसके चलते उनका ऑपरेशन यहां नहीं हो सकता। बाद में परिजन उन्हें एक निजी डॉक्टर के यहां ले गए। उनके पति कौशलेंद्र सिंह का कहना था कि करोड़ों के भवनों का क्या फायदा है जब यहां छोटे से उपचार की व्यवस्था नहीं है।
पिछले सात महीने जिला अस्पताल से रेफर मरीज
जनवरी- 33
फरवरी- 27
मार्च- 38
अप्रैल- 31
मई- 29
जून- 22
जुलाई- 25
सी-आर्म मशीन का कार्य
सी-आर्म मशीन एक पोर्टेबल मेडिकल इमेजिंग उपकरण है जो एक्स-रे और फ्लोरोस्कोपी तकनीक का उपयोग करके सर्जरी या ऑपरेशन के दौरान शरीर के अंदरूनी हिस्सों की लाइव (वास्तविक समय) और साफ तस्वीरें डॉक्टर को कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाता है।
मैंने दो महीने पहले ही कार्यभार ग्रहण किया है। विशेषज्ञ के रूप में डॉ. आरके शुक्ला और डॉ.ललित कुमार की तैनाती है। डॉ. ललित कुमार दो महीने से अस्पताल नहीं आ रहे हैं। सी-आर्म मशीन के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। अतिरिक्त डॉक्टर की भी मांग की गई है। जब तक मशीन नहीं आ जाती तब तक ऑपरेशन कराना संभव नहीं है।
डॉ. राज सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक