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गोद में गांव, दर्द तक नहीं पूछते सांसद

Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी Published by: Anonymous User Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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Lap village, ask for pain MP
मैनपुरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर संसदीय क्षेत्र में एक आदर्श गांव बनाने की जिम्मेदारी सांसदों से लेेने की अपील की थी। सांसद तेजप्रताप यादव ने सगामई गांव को गोद तो ले लिया लेकिन गोद लेने के बाद से अब तक न तो एक भी बार गांव ही गए और न ही गांव के विकास के लिए अपनी निधि से कोई कार्य कराया। ग्रामीणों का कहना है कि सांसद द्वारा गांव को गोद लेने का अब तक तो कोई फायदा मिला नहीं है। यहां तक कि बेमौसम बारिश से बर्बाद किसानों को अब तक मुआवजे के चेक तक नहीं मिल सके हैं।
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मोदी सरकार का एक वर्ष पूरा होने की ओर है। प्रधानमंत्री ने सांसदों से गांव गोद लेकर उसमें सड़क, नाली, रोशनी, सफाई, शौचालय आदि की पर्याप्त व्यवस्थाएं करने की अपील की थी। ताकि संसदीय क्षेत्र में प्रत्येक साल एक आदर्श गांव बन सके। पीएम की अपील पर सांसद तेज प्रताप यादव ने जागीर क्षेत्र के गांव सगामई को गोद तो ले लिया लेकिन गांव के विकास की ओर से आंखें मूंद लीं। ग्रामीणों के अनुसार उपचुनाव से पूर्व प्रचार के लिए तो वह गांव आए थे लेकिन जब से गांव को गोद लिया है तब से गांव के लोग उनकी सूरत देखने को तरस गए हैं। ग्रामीणों को इस बात का भी मलाल है कि सांसद ने अपनी निधि से गांव की एक गली तक पक्की नहीं कराई। संासद द्वारा गोद लेने के बाद सगामई के लोगों को उम्मीद थी कि गांव की बदहाल गलियां और नालियां पक्की हो जाएंगी। गंदगी की समस्या से निजात मिलेगी और रात में गांव की गलियां रोशन होंगी। करीब एक साल बीतने के बाद भी ग्रामीणों की उम्मीदें पूरी होती नहीं दिख रहीं। गांव की अधिकांश गलियां कच्ची हैं तो सफाई कर्मी के न आने से जगह-जगह कूड़े के ढेर नजर आते हैं। बेमौसम की मार से तबाह किसानों को उम्मीद थी कि सांसद के गोद लेने से गांव के किसानों को मुआवजा प्राथमिकता के आधार पर मिल जाएगा लेकिन आसपास के गांवों में तो मुआवजा मिल गया लेकिन यहां के किसान अभी भी मुआवजे के इंतजार में हैं।
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यह कहते हैं ग्रामीण
चंद्रप्रकाश का कहना था कि वह तो सांसद तेज प्रताप को पहचान भी नहीं पाएंगे। गोद लेने के बाद से आज तक वह गांव नहीं आए। शिशुपाल सिंह गौर ने कहा कि जब सांसद ने गांव गोद लिया था तभी तत्कालीन डीएम एवं अन्य अधिकारी आए थे। उसके बाद कोई गांव में नहीं आया। रामबक्स शंखवार ने कहा कि गांव में सफाई कर्मी तो आता ही नहीं है। कच्ची गलियों में जलभराव और दलदल के हालात हैं। ग्रामीण पुरुष और महिलाएं मजबूरन नालियां साफ करते हैं।
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नहीं मिले आवास
गांव के राममोहन बाथम चार भाई हैं। पुराना कच्चा मकान गिर चुका है। एक कमरा शेष है। गांव में मेहनत मजदूरी करते हैं। दो भाई दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। कई बार आवास के लिए मांग की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। गांव के राजेंद्र चक मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। आवास नहीं मिला झोपड़ी में परिवार निवास करता है। विधवा उर्मिला राजपूत भी झोपड़ी में निवास करती हैं। ऐसा ही आलम गांव के ख्यालीराम वाल्मीकि के घर का था। वहां भी कच्चे मकान में झोपड़ी डालकर परिवार निवास करता है।

पंचायत भवन बदहाल
वर्षों पुराने ग्राम पंचायत भवन भवन में थाना एलाऊ, ब्लाक जागीर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सगामई और पुलिस चौकी जागीर संचालित होते रहे थे। लेकिन अब पंचायत भवन जर्जर हो चला है। ग्रामीणों ने पंचायत भवन की मरम्मत के लिए कई बार मांग तो उठाई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

मंदिर के पास ठेका खुलने से आक्रोश
गांव में पीएचसी के समीप मंदिर के पास शराब का ठेका खुला हुआ है। स्थानीय निवासी गोविंद का कहना था कि शराबी आए दिन उत्पात मचाते रहते हैं। मंदिर में लोगों को पूजा करना भी मुश्किल हो रहा है। शराब का ठेका हटाया जाए। ऐसा ही कुछ अन्य ग्रामीणों का भी कहना था।

एक तार से गली में जल रही बिजली
सांसद के गोद लिए गांव में बिजली व्यवस्था भी बदहाल दिखी। प्राथमिक विद्यालय से गांव के अंदर जाने वाली कच्ची गली में बिजली आपूर्ति के लिए सिर्फ एक तार है। ग्रामीण तार पर कटिया डालकर जमीन से अर्थ लेकर बिजली का प्रयोग कर रहे थे। ग्रामवासी भाकियू के जिला उपाध्यक्ष राजा ठाकुर का कहना था कि इससे किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।


अस्पताल में नहीं रुकते डाक्टर
ग्रामवासी राजेंद्र अग्निहोत्री का कहना था कि चिकित्सक अस्पताल में नहीं रुकते। वह जिला मुख्यालय पर रहते हैं। अस्पताल या तो आते नहीं हैं आते तो कुछ समय रुककर चले जाते हैं। जांच करने से भी मना कर दिया जाता है। प्रभारी चिकित्साधिकारी के कक्ष का ताला खुला था लेकिन वह नदारद थे।
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