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मुनि नहीं तो अच्छे श्रावक ही बनें

Fri, 11 Nov 2016 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी। Updated Fri, 11 Nov 2016 11:54 PM IST
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Be so good as Muni disciples
मुनि नहीं तो अच्छे श्रावक ही बनें - फोटो : अमर उजाला
सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के पांचवें दिन पार्श्वनाथ उपवन मंदिर में प्रष्ठिाचार्य सनत कुमार, विनोदकुमार के निर्देशन में इंद्र, इंद्राणियों के साथ अभिषेक, पूजन, शांतिधारा की गई। शांतिधारा करने का सौभाग्य विमल कुमार, विचित्र कुमार को मिला। शांतिधारा के बाद प्रतिष्ठाचार्य ने पूजन कराया। इंद्र और इंद्राणी ने भाव विभोर होकर नृत्य किया।
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सिद्धचक्र विधानमंडल विधान में सिद्ध भगवान को 128 अर्घ्य चढ़ाए गए। सौधर्म इंद्र और शचि इंद्राणी ने परिवारीजनों के साथ प्रतिष्ठाचार्य का पगड़ी, तिलक, हार, माला, रजत पहनाकर सम्मान किया। महाआरती करने का सौभाग्य मीना जैन आगरा को मिला। विनोद जैन ने कहा तीर्थंकर की वाणी में धर्म दो प्रकार का होता है। एक मुनि धर्म तो दूसरा श्रावक धर्म होता है। हमको दोनों में से एक धर्म तो अंगीकार करना ही पड़ेगा। अगर हम मुनि नहीं बन पाएं तो कम से कम अच्छे श्रावक तो बन ही जाएं। जो हमें पवित्र कर दे वही पूजन कहलाता है। विकारी भाव को अपने अंदर से निकालकर अच्छे भावोें का आगमन ही पूजा कहलाती है। संजय जैन  लोहिया, आदेश जैन, गौरव जैन, रमेशचंद्र जैन, सम्यक जैन, कमल जैन, राजीव जैन, प्रवीन जैन आदि मौजूद थे।
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