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Mahoba News: पिता की पेंशन के लिए बेटे को मिला हक
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चित्रकूट। पिता की मौत के बाद सरकारी फाइलों में उलझे बेटे को आखिरकार सिविल कोर्ट से न्याय मिला है। सिविल जज जूनियर डिवीजन विदिशा भूषण ने मृतक कर्मचारी की बकाया पेंशन और इलाज के 4.46 लाख रुपये के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी कर दिया है।
कर्वी के द्वारिकापुरी, काली देवी मंदिर रोड निवासी लालजी रैकवार सिंचाई विभाग में कार्यरत थे। 9 सितंबर 2025 को लखनऊ के नोवा हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। उनके दो बेटे धीरज, दीपक और एक अविवाहित बेटी रोशनी है। पिता की मौत के बाद कोषागार में जमा पेंशन और मेडिकल खर्च बकाया था। इसे पाने के लिए धीरज कार्यालयों के चक्कर काट रहा था, लेकिन विभाग फाइलों में उलझाए था।
धीरज ने कोर्ट में वाद दायर किया। सुनवाई में छोटे भाई दीपक और बहन रोशनी ने कोर्ट में कहा कि हमें कोई आपत्ति नहीं है, भाई के नाम ही प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाए। पिता ने कोई वसीयत नहीं की थी। कोषाधिकारी ने रिपोर्ट में बताया कि 9 दिन की पेंशन के 11,248 रुपये और 4 लाख 34 हजार 996 रुपये मेडिकल खर्च बकाया है। कुल 4,46,244 रुपये का भुगतान बनता है। सभी तथ्यों पर ध्यान देते हुए अदालत ने आवेदक के पक्ष में प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया।
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कर्वी के द्वारिकापुरी, काली देवी मंदिर रोड निवासी लालजी रैकवार सिंचाई विभाग में कार्यरत थे। 9 सितंबर 2025 को लखनऊ के नोवा हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। उनके दो बेटे धीरज, दीपक और एक अविवाहित बेटी रोशनी है। पिता की मौत के बाद कोषागार में जमा पेंशन और मेडिकल खर्च बकाया था। इसे पाने के लिए धीरज कार्यालयों के चक्कर काट रहा था, लेकिन विभाग फाइलों में उलझाए था।
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धीरज ने कोर्ट में वाद दायर किया। सुनवाई में छोटे भाई दीपक और बहन रोशनी ने कोर्ट में कहा कि हमें कोई आपत्ति नहीं है, भाई के नाम ही प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाए। पिता ने कोई वसीयत नहीं की थी। कोषाधिकारी ने रिपोर्ट में बताया कि 9 दिन की पेंशन के 11,248 रुपये और 4 लाख 34 हजार 996 रुपये मेडिकल खर्च बकाया है। कुल 4,46,244 रुपये का भुगतान बनता है। सभी तथ्यों पर ध्यान देते हुए अदालत ने आवेदक के पक्ष में प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया।
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