{"_id":"bb1bf1a12e69813bbb0fde1c129cd8e1","slug":"mandi-has-become-showpiece-made-up-of-millions-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शोपीस बनकर रह गई लाखों रुपये से बनी मंडी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शोपीस बनकर रह गई लाखों रुपये से बनी मंडी
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
Updated Mon, 15 Jun 2015 11:38 PM IST
विज्ञापन
लाखों की कीमत से तैयार गल्ला मंडी का संचालन चार साल बाद भी नहीं हो पा रहा है। बेशकीमती भवन में साज-सज्जा में लगा सामान भी सुरक्षा के अभाव में अराजकतत्व तोड़ रहे हैं। लाखों रुपये से बनाई गई मंडी अन्ना जानवरों का आरामगाह बनकर रह गई है।
खरेला कस्बे से जुड़े दो दर्जन गांव के किसानों की सुविधा को देखते हुए चार वर्ष पहले नवीन गल्लामंडी का निर्माण लाखों की लागत से कराया गया था। करीब बीस बीघा से अधिक स्थान पर बनी नवनिर्मित मंडी संचालन की राह दे रही है। क्षेत्र के किसान मजबूरन बिचौलिया और दलालों के माध्यम से अपनी उपज को कम दामों में बेंचने को मजबूर हैं। उन्हें इस मंडी की सुविधा का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। कस्बे में तीस वर्ष पहले से किराए के भवन में संचालित मंडी से जुड़े आधा दर्जन आढ़ती खरीद करते हैं, जहां किसानों की उपज लाने के बाद चौबीस घंटे बिना किसी सुविधा के बाद फसल बेच पाते हैं। नवनिर्मित नवीन गल्ला मंडी की सुरक्षा भी भगवान भरोसे ही है। जिससे मंडी में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई है। गेट पर ताला न लगा होने से पूरे दिन जानवर घूम-घूम कर गंदगी फैला रहे है। भवनों के बरामदा और खरीददारी के लिए बनाया गया विशाल टीनशेड भी गंदगी से पटा पड़ा है। गल्ला मंडी को बने चार वर्ष होने के बाद भी क्षेत्र के किसानों को कोई लाभ न मिल पाने से काफी मायूसी है। कृषक राजेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, जीतेंद्र तिवारी ने बताया कि इस मंडी से सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद संचालन न होने से किसानों को लोकल खरीददारों और मुस्करा चरखारी की मंडी का सहारा लेना पड़ रहा है। चरखारी मंडी सचिव विशम्भर तिवारी ने बताया कि खरेला मंडी के संचालन का प्रयास लगातार किया जा रहा है, तीन बार नीलामी कराई गई, लेकिन आढ़तियों की कमी के चलते मंडी संचालन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। जल्द ही मंडी संचालन कराया जाएगा, उन्होंने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से गार्ड की तैनाती के लिए लिखा गया है।
विज्ञापन
खरेला कस्बे से जुड़े दो दर्जन गांव के किसानों की सुविधा को देखते हुए चार वर्ष पहले नवीन गल्लामंडी का निर्माण लाखों की लागत से कराया गया था। करीब बीस बीघा से अधिक स्थान पर बनी नवनिर्मित मंडी संचालन की राह दे रही है। क्षेत्र के किसान मजबूरन बिचौलिया और दलालों के माध्यम से अपनी उपज को कम दामों में बेंचने को मजबूर हैं। उन्हें इस मंडी की सुविधा का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। कस्बे में तीस वर्ष पहले से किराए के भवन में संचालित मंडी से जुड़े आधा दर्जन आढ़ती खरीद करते हैं, जहां किसानों की उपज लाने के बाद चौबीस घंटे बिना किसी सुविधा के बाद फसल बेच पाते हैं। नवनिर्मित नवीन गल्ला मंडी की सुरक्षा भी भगवान भरोसे ही है। जिससे मंडी में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई है। गेट पर ताला न लगा होने से पूरे दिन जानवर घूम-घूम कर गंदगी फैला रहे है। भवनों के बरामदा और खरीददारी के लिए बनाया गया विशाल टीनशेड भी गंदगी से पटा पड़ा है। गल्ला मंडी को बने चार वर्ष होने के बाद भी क्षेत्र के किसानों को कोई लाभ न मिल पाने से काफी मायूसी है। कृषक राजेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, जीतेंद्र तिवारी ने बताया कि इस मंडी से सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद संचालन न होने से किसानों को लोकल खरीददारों और मुस्करा चरखारी की मंडी का सहारा लेना पड़ रहा है। चरखारी मंडी सचिव विशम्भर तिवारी ने बताया कि खरेला मंडी के संचालन का प्रयास लगातार किया जा रहा है, तीन बार नीलामी कराई गई, लेकिन आढ़तियों की कमी के चलते मंडी संचालन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। जल्द ही मंडी संचालन कराया जाएगा, उन्होंने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से गार्ड की तैनाती के लिए लिखा गया है।
विज्ञापन