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पहली बार खेत जाना दोनों चचेरे भाइयों के लिए बन गया अंतिम दिन
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खरेला (महोबा)। कस्बा खरेला में खेत तालाब में भरे पानी में डूबकर दो चचेरे भाइयों की मौत की घटना ने सभी को झकझोर दिया। पढ़नेे-लिखने में होनहार दोनों भाई विद्यालय बंद होने के चलते घर पर ही रहकर पढ़ाई करते थे। रविवार को जिद करके पहली बार खेत गए चचेरे भाइयों के लिए यह दिन आखिरी दिन बन गया।
घटना के बाद मृतक चित्रांश के चाचा गनपत प्रजापति ने बताया कि भतीजा चित्रांश व धीरज पढ़ने-लिखने में होनहार थे। कभी खेत नहीं गए। पहली बार जिद करके मां के साथ खेत गए थे। किसी को क्या पता था कि रविवार की छुट्टी मनाने खेत जाने की जिद उनके लिए आखिरी दिन बन जाएगा।
मृतक चित्रांश तीन भाइयों में सबसे छोटा था। उसके दो बड़े भाई लखन व भूपेंद्र हैं। बेनीप्रसाद के तीन पुत्रों में परशुराम के बाद मृतक धीरज और नीरज जुड़वा भाई थे। घटना से दो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतकों की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसी व रिश्तेदार उन्हें ढांढ़स बंधाते रहे। घटना देखकर हर किसी की आंखे नम हो गई।
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अस्पताल से कब घर आएगा भइया
पानी में डूबने से धीरज की मौत की खबर मिलने पर जुड़वा भाई नीरज को गहरा सदमा लगा है। कस्बे के काशी प्रसाद इंटर कॉलेज में कक्षा नौवीं तक साथ-साथ पढ़ने वाले जुड़वा भाई के बिछड़ने से नीरज कई बार अचेत हो गया।
कुछ भी पूछने पर वह केवल एक बात ही दोहराता रहा कि मेरा भइया धीरज अस्पताल से घर कब वापस आएगा। जल्दी बुलाओ, कोई कहता है कि अब वह नहीं रहा। दहाड़े मारकर रो रहे भाई को देखकर हर कोई गमगीन हो गया।
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घटना के बाद मृतक चित्रांश के चाचा गनपत प्रजापति ने बताया कि भतीजा चित्रांश व धीरज पढ़ने-लिखने में होनहार थे। कभी खेत नहीं गए। पहली बार जिद करके मां के साथ खेत गए थे। किसी को क्या पता था कि रविवार की छुट्टी मनाने खेत जाने की जिद उनके लिए आखिरी दिन बन जाएगा।
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मृतक चित्रांश तीन भाइयों में सबसे छोटा था। उसके दो बड़े भाई लखन व भूपेंद्र हैं। बेनीप्रसाद के तीन पुत्रों में परशुराम के बाद मृतक धीरज और नीरज जुड़वा भाई थे। घटना से दो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतकों की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसी व रिश्तेदार उन्हें ढांढ़स बंधाते रहे। घटना देखकर हर किसी की आंखे नम हो गई।
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अस्पताल से कब घर आएगा भइया
पानी में डूबने से धीरज की मौत की खबर मिलने पर जुड़वा भाई नीरज को गहरा सदमा लगा है। कस्बे के काशी प्रसाद इंटर कॉलेज में कक्षा नौवीं तक साथ-साथ पढ़ने वाले जुड़वा भाई के बिछड़ने से नीरज कई बार अचेत हो गया।
कुछ भी पूछने पर वह केवल एक बात ही दोहराता रहा कि मेरा भइया धीरज अस्पताल से घर कब वापस आएगा। जल्दी बुलाओ, कोई कहता है कि अब वह नहीं रहा। दहाड़े मारकर रो रहे भाई को देखकर हर कोई गमगीन हो गया।