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फसल बीमा के नाम पर छला जाने पर पूर्व सांसद ने दाखिल की याचिका
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महोबा। फसल बीमा के नाम पर करोड़ों रुपये हजम करने वाली बीमा कंपनी के खिलाफ पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल कर किसानों को फसल का मुआवजा दिलाने की मांग है। साथ ही, तीन साल से मुुआवजे के लिए भटक रहे किसान खासे परेशान हैं। किसानों की मांग को लेकर पूर्व सांसद किसानों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में खरीफ और रबी की फसल 80 फीसदी जबकि 2019 में खरीफ की फसल 95 फीसदी से ज्यादा नष्ट हो गई थी। बैंकों ने किसानों का प्रीमियम उनके खाते से काटकर बीमा कंपनी को भेज दिया था, लेकिन बीमा कंपनी ने आजतक फसल के नुकसान का मुआवजा नहीं दिया। किसानों ने महोबा-हमीरपुर के पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत से मुलाकात कर फसल बीमा के न मिलने की समस्या से अवगत कराया था।
पूर्व सांसद ने बीमा कंपनी के प्रबंधक को बुलाकर जिलाधिकारी कार्यालय में वार्ता कराई। जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में किसानों का फसल बीमा का मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने कोई सुध नहीं ली। नाराज पूर्व सांसद ने बीमा कंपनी के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। पूर्व सांसद का कहना है कि बीमा कंपनियों द्वारा किसानों के साथ किए गए छलावा के विरोध में वह किसानों की लड़ाई अब न्यायालय में लड़ रहे हैं।
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श्रीनगर निवासी किसान बृजभूषण सोनी का कहना है कि पहले केसीसी बनवाने वाले किसानों के खातों से बैंक प्रीमियम की धनराशि काटकर बैंकों को भेज देती थी। जिससे बीमा न कराने की स्थिति में भी बीमा कर दिया जाता था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फसल बीमा ऐच्छिक कर दिए जाने से किसानों का उत्पीड़न रुकेगा।
बिलरही निवासी कल्लू यादव कहते है कि तीन साल से बीमा करा रहे हैं। कभी अतिवृष्टि, ओलावृष्टि तो कभी सूखे से फसलें बर्बाद हो गई लेकिन फसल बीमा कंपनी ने न तो सर्वे कराया और न ही फसल के नुकसान का आजतक मुआवजा दिया। जिससे इस साल रबी की फसल का बीमा नहीं कराया है।
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गौरतलब है कि वर्ष 2018 में खरीफ और रबी की फसल 80 फीसदी जबकि 2019 में खरीफ की फसल 95 फीसदी से ज्यादा नष्ट हो गई थी। बैंकों ने किसानों का प्रीमियम उनके खाते से काटकर बीमा कंपनी को भेज दिया था, लेकिन बीमा कंपनी ने आजतक फसल के नुकसान का मुआवजा नहीं दिया। किसानों ने महोबा-हमीरपुर के पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत से मुलाकात कर फसल बीमा के न मिलने की समस्या से अवगत कराया था।
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पूर्व सांसद ने बीमा कंपनी के प्रबंधक को बुलाकर जिलाधिकारी कार्यालय में वार्ता कराई। जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में किसानों का फसल बीमा का मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने कोई सुध नहीं ली। नाराज पूर्व सांसद ने बीमा कंपनी के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। पूर्व सांसद का कहना है कि बीमा कंपनियों द्वारा किसानों के साथ किए गए छलावा के विरोध में वह किसानों की लड़ाई अब न्यायालय में लड़ रहे हैं।
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श्रीनगर निवासी किसान बृजभूषण सोनी का कहना है कि पहले केसीसी बनवाने वाले किसानों के खातों से बैंक प्रीमियम की धनराशि काटकर बैंकों को भेज देती थी। जिससे बीमा न कराने की स्थिति में भी बीमा कर दिया जाता था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फसल बीमा ऐच्छिक कर दिए जाने से किसानों का उत्पीड़न रुकेगा।
बिलरही निवासी कल्लू यादव कहते है कि तीन साल से बीमा करा रहे हैं। कभी अतिवृष्टि, ओलावृष्टि तो कभी सूखे से फसलें बर्बाद हो गई लेकिन फसल बीमा कंपनी ने न तो सर्वे कराया और न ही फसल के नुकसान का आजतक मुआवजा दिया। जिससे इस साल रबी की फसल का बीमा नहीं कराया है।