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Maharajganj News: बदलते मौसम में त्वचा रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ी
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जिला अस्पताल के ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़।
ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे 80 से 100 मरीज
मौसम में उतार-चढ़ाव व लोक कॉस्मेटिक उत्पाद बन रहे वजह
डॉक्टर ढीले और सूती कपड़े पहनने की दे रहे सलाह
महराजगंज। जिला संयुक्त चिकित्सालय में इन दिनों त्वचा रोगों के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मौसम के उतार-चढ़ाव और गर्मी बढ़ने के साथ-साथ लोकल कॉस्मेटिक उत्पादों के इस्तेमाल से यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। अस्पताल में रोजाना 80 से 100 तक स्किन के मरीज पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह पहले इन बीमारियों के मरीजों की संख्या 60-80 के तक थी। इनमें महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है।
डॉक्टरों के अनुसार, मुख्य रूप से खुजली, दाद-खाज, एक्जिमा, फंगल इंफेक्शन और मोस्टर जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। कई मरीजों के चेहरे पर दाग-धब्बे पड़ रहे हैं, लाल चकत्ते उभर आए हैं और जलन की समस्या हो रही है। गर्मी के कारण पसीना ज्यादा आना, त्वचा का तैलीय होना और फिटिंग वाले कपड़ों का इस्तेमाल इन समस्याओं को बढ़ावा दे रहा है। खासकर युवतियां और 40-50 वर्ष की महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। लोकल बाजार में बिकने वाले सस्ते कॉस्मेटिक सामान में हानिकारक केमिकल होते हैं। यह त्वचा को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि मौसम के बदलाव और अनुचित उत्पादों के इस्तेमाल से त्वचा पर एलर्जी, रैशेज और संक्रमण की घटनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को ढीले और सूती कपड़े पहनने चाहिए। पसीने से बचने के लिए शरीर को साफ-सुथरा रखें। रोजाना स्नान करें और त्वचा को नम रखने के बजाय सूखा रखने की कोशिश करें। अगर चेहरे पर दाग, खुजली या चकत्ते नजर आए तो घरेलू उपचार से बचें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। देरी करने से समस्या बढ़ सकती है।
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मौसम में उतार-चढ़ाव व लोक कॉस्मेटिक उत्पाद बन रहे वजह
डॉक्टर ढीले और सूती कपड़े पहनने की दे रहे सलाह
महराजगंज। जिला संयुक्त चिकित्सालय में इन दिनों त्वचा रोगों के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मौसम के उतार-चढ़ाव और गर्मी बढ़ने के साथ-साथ लोकल कॉस्मेटिक उत्पादों के इस्तेमाल से यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। अस्पताल में रोजाना 80 से 100 तक स्किन के मरीज पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह पहले इन बीमारियों के मरीजों की संख्या 60-80 के तक थी। इनमें महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है।
डॉक्टरों के अनुसार, मुख्य रूप से खुजली, दाद-खाज, एक्जिमा, फंगल इंफेक्शन और मोस्टर जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। कई मरीजों के चेहरे पर दाग-धब्बे पड़ रहे हैं, लाल चकत्ते उभर आए हैं और जलन की समस्या हो रही है। गर्मी के कारण पसीना ज्यादा आना, त्वचा का तैलीय होना और फिटिंग वाले कपड़ों का इस्तेमाल इन समस्याओं को बढ़ावा दे रहा है। खासकर युवतियां और 40-50 वर्ष की महिलाएं इससे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। लोकल बाजार में बिकने वाले सस्ते कॉस्मेटिक सामान में हानिकारक केमिकल होते हैं। यह त्वचा को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि मौसम के बदलाव और अनुचित उत्पादों के इस्तेमाल से त्वचा पर एलर्जी, रैशेज और संक्रमण की घटनाएं बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को ढीले और सूती कपड़े पहनने चाहिए। पसीने से बचने के लिए शरीर को साफ-सुथरा रखें। रोजाना स्नान करें और त्वचा को नम रखने के बजाय सूखा रखने की कोशिश करें। अगर चेहरे पर दाग, खुजली या चकत्ते नजर आए तो घरेलू उपचार से बचें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। देरी करने से समस्या बढ़ सकती है।
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