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Maharajganj News: नेपाल में विरोध समाप्त, फिर से शुरू हुआ सार्वजनिक परिवहन

Thu, 05 Jun 2025 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Thu, 05 Jun 2025 01:10 AM IST
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Protests end in Nepal, public transport resumes
महराजगंज/सोनौली। नेपाल में परिवहन स्वामियों की ओर से विरोध कार्यक्रम वापस लिए जाने के बाद सार्वजनिक परिवहन सेवा फिर से शुरू हो गई है। परिवहन उद्यमियों के महासंघ और सरकार के बीच मंगलवार को हुई सकारात्मक बातचीत के बाद बुधवार सुबह 10 बजे से हड़ताल समाप्त कर परिवहन सेवा बहाल कर दी गई।
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मंगलवार की शाम को गंडकी सरकार की ओर से राइड-शेयरिंग नियमों को एक महीने के लिए निलंबित किए जाने के बाद, परिवहन उद्यमियों ने भी अपना विरोध वापस लेने का फैसला किया। परिवहन उद्यमी राइड-शेयरिंग एप के संबंध में गंडकी प्रांतीय सरकार की ओर से लाए गए नियमों का विरोध कर रहे थे। इसके बाद पूरे नेपाल में बसों को बंद कर हड़ताल शुरू की, जिससे नेपाल पहुंचे पर्यटक दो दिनों तक पोखरा और काठमांडों में फंसे रहे।
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तीन दिन से सार्वजनिक परिवहन बंद होने के कारण बुटवल में विशेष काम से आए यात्री भी फंसे रहे। कैलाली के धनगढ़ी-12 मनोहरा की दो युवतियों को भैरहवां बस पार्क में गाड़ी का इंतजार करना पड़ा। मनोहरा की अंजलि चौधरी ने बताया कि हमें नहीं पता था कि गाड़ी बंद है। बीच सड़क पर पहुंचने पर परेशानी हुई। उनके साथ मौजूद सिमता राजी ने बताया कि वह सुबह से भूखी-प्यासी बस स्टैंड पर गाड़ी का इंतजार करती रहीं।
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मंगलवार की रात भारत से नेपाल के सोनौली बॉर्डर क्रॉसिंग से नेपाल पहुंचे पर्वत के नारद प्रसाद भुसाल मंगलवार की रात घर जाने के लिए बुटवल बस पार्क पहुंचे। पूरा दिन इसी उम्मीद में गुजारा कि बस चलेगी। उनकी तरह ही सात लोगों का समूह भी बस पार्क में था, जिन्हें बोरों में बर्तन और कपड़े लेकर विराटनगर पहुंचना था।
पूरी रात बस पार्क में सोए, पास खाने के लिए कुछ नहीं
समूह के बसंत ऋषिदेव ने बताया कि वे सूर्यपुरा में पुल निर्माण कार्य के लिए आए थे और घर जाते समय उन्हें वाहन नहीं मिला। बसंत ने कहा कि पास पैसे नहीं हैं। रातभर बस पार्क में सोए, पास खाने के लिए कुछ नहीं है, हम अभी भी भूखे हैं। हमारे पास बर्तन है, खाना बनाने के लिए एक पैसा भी नहीं है।'''' हालांकि, परिवहन उद्यमी और सरकार के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद लोगों को राहत मिली।
सोमवार और मंगलवार को रूपनदेही की मुख्य सड़कों पर छोटी और लंबी दूरी की कोई बस नहीं चली। बस सेवा की उम्मीद में बस पार्क में रात गुजारने वाले कुछ लोगों ने वाहन आरक्षित करने का प्रयास किया, लेकिन इस डर से फंस गए कि कहीं व्यापारी कुछ न कर दें। छोटे वाहन, टिपर और जीप भी फंसे लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने से इन्कार करते रहे।
होटल में ठहरने पर सारा पैसा खर्च कर दिया
पदम बहादुर भट, जो तीन दिन पहले जापान के अर्घाखांची से बुटवल आए और एक गेस्ट हाउस में रुके थे। उन्हें चिंता है कि अगर वे घर से निकलने के एक सप्ताह के भीतर उड़ान नहीं भरते हैं तो उनका वीजा रद्द हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वे नहीं जा सकते क्योंकि वे छोटे वाहन का अधिक किराया वहन नहीं कर सकते। बुटवल बस पार्क में फंसे कई यात्रियों का कहना था कि उन्हें गंतव्य तक पहुंचने में परेशानी हुई क्योंकि उन्होंने खाने और होटल में ठहरने पर अपना सारा पैसा खर्च कर दिया है।
भारत के गोरखपुर से 800 रुपये देकर ऑटोरिक्शा लेकर बुटवल पहुंचे अतुल सोनी के परिवार का कहना है कि उनके पास बिना वाहन के लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उनका चार सदस्यीय परिवार काठमांडों घूमने के लिए बुटवल पहुंचा था। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ बहुत परेशानी होती है, जब हमें घूमने के लिए रास्ते में रुकना पड़ता है तो हम फंस जाते हैं। इसी तरह पोखरा, प्यूथान, रोल्पा और हरैया के लोग जो छुट्टी पर भारत से घर लौटे थे, वे भी बस स्टैंड पर अपने वाहनों का इंतजार कर रहे थे।

पोखरा गए एक मित्र ने घर से छह हजार रुपये मंगवाए
प्यूथान के तिलक पुन ने बताया कि हमें ट्रैफिक जाम के बारे में पता नहीं था, हम दुखी थे, यहां दो दिन हो गए हैं, वाहन चलाने का कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर यात्रियों के पास पैसे खत्म हो गए थे और वे सड़क पर फंसे हुए थे। उन्होंने बताया कि पास पैसे खत्म हो गया। इधर-उधर भटकता रहा। पोखरा गए एक मित्र ने घर से छह हजार रुपये मंगवाए हैं और होटल में बस का इंतजार कर रहे हैं। यात्रियों की शिकायत है कि भीषण गर्मी में दिन-रात इंतजार करने के बावजूद किसी को परेशानी नहीं दिख रही है। चाहे वे नेपाली हों या यहां पहुंचने वाले भारतीय, उन्हें ई-रिक्शा और छोटे वाहनों में अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। यातायात विभाग संघ के सचिव देवेश थापा ने बताया कि गंडकी सरकार ने फैसला स्थगित कर दिया, जिसके बाद हड़ताल समाप्त हो गई है।
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