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Maharajganj News: रेल मार्ग से नहीं जुड़ सका जिला मुख्यालय 16-02-59
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रेल मार्ग से नहीं जुड़ सका जिला मुख्यालय
फाइलों में सिमट कर रह गई पटरी बिछाने की योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जनपद का सृजन हुए 33 साल गुजर गए, लेकिन जिला मुख्यालय रेल मार्ग से नहीं जुड़ सका। इसके लिए कई बार जनप्रतिनिधियों ने प्रयास किया, लेकिन सार्थक परिणाम नहीं निकला। जिले के घुघली, सिसवां नौतनवा, फरेंदा कस्बे तक तो रेल दौड़ रही है, लेकिन मुख्यालय तक रेल की पटरियां नहीं बिछ सकी हैं।
महराजगंज 2 अक्तूबर 1989 को जिला बना था। रेल मार्ग से जिला मुख्यालय को जोड़ने की मंशा अधूरी रह गई। वर्ष 2012-13 के रेल बजट में घुघली-फरेंदा रेल खंड को मंजूरी मिली थी। उस समय 10 लाख की टोकन मनी भी परियोजना के लिए आवंटित हुई थी। इसके बाद रेल प्रशासन ने घुघली से महराजगंज तक दो बार सर्वे कराया। सर्वे में स्टेशन बनाने के लिए जमीन का भी चयन हुआ, लेकिन नतीजा शून्य रहा। रेल मार्ग से जोड़ने की योजना हवा हवाई साबित हुई।
प्रस्ताव में बताया गया था कि आनंदनगर घुघली वाया महराजगंज प्रस्तावित रेल लाइन की दूरी 50 किमी की है। पांच रेलवे स्टेशन बनाने की योजना थी। घुघली रेलवे स्टेशन को जंक्शन बनाने का प्रस्ताव था। चौतरवा, पकड़ी नौनिया, महराजगंज, शिकारपुर व हरपुर में नए रेलवे स्टेशन बनाने की व्यवस्था के साथ ही घुघली-आनंदनगर रेल खंड पर 46 पुल बनाने के लिए रूप रेखा बनी थी। जैसे-जैसे समय बीतते गया सब कुछ फाइलों में ही सिमट कर रह गया।
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जिला मुख्यालय तक रेल की पटरी बिछने का सपना पूरा नहीं हो सका है। प्रत्येक चुनाव में नेता वादा करते हैं, लेकिन वक्त के साथ भूल जाते हैं।
- डॉ. शांति शरण मिश्रा, मीडिया प्रभारी, सिटीजन फोरम
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महराजगंज शहर का विकास बेहतर ढंग से नहीं हो सका है। परिवहन के नाम पर जिला मुख्यालय पर सिर्फ रोडवेज सेवा है। ट्रेन सेवा शुरू नहीं होना दुख की बात है।
- महेंद्रानंद जायसवाल, प्रबंधक, कास्मोपोलिटन स्कूल, गांधी नगर
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फाइलों में सिमट कर रह गई पटरी बिछाने की योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जनपद का सृजन हुए 33 साल गुजर गए, लेकिन जिला मुख्यालय रेल मार्ग से नहीं जुड़ सका। इसके लिए कई बार जनप्रतिनिधियों ने प्रयास किया, लेकिन सार्थक परिणाम नहीं निकला। जिले के घुघली, सिसवां नौतनवा, फरेंदा कस्बे तक तो रेल दौड़ रही है, लेकिन मुख्यालय तक रेल की पटरियां नहीं बिछ सकी हैं।
महराजगंज 2 अक्तूबर 1989 को जिला बना था। रेल मार्ग से जिला मुख्यालय को जोड़ने की मंशा अधूरी रह गई। वर्ष 2012-13 के रेल बजट में घुघली-फरेंदा रेल खंड को मंजूरी मिली थी। उस समय 10 लाख की टोकन मनी भी परियोजना के लिए आवंटित हुई थी। इसके बाद रेल प्रशासन ने घुघली से महराजगंज तक दो बार सर्वे कराया। सर्वे में स्टेशन बनाने के लिए जमीन का भी चयन हुआ, लेकिन नतीजा शून्य रहा। रेल मार्ग से जोड़ने की योजना हवा हवाई साबित हुई।
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प्रस्ताव में बताया गया था कि आनंदनगर घुघली वाया महराजगंज प्रस्तावित रेल लाइन की दूरी 50 किमी की है। पांच रेलवे स्टेशन बनाने की योजना थी। घुघली रेलवे स्टेशन को जंक्शन बनाने का प्रस्ताव था। चौतरवा, पकड़ी नौनिया, महराजगंज, शिकारपुर व हरपुर में नए रेलवे स्टेशन बनाने की व्यवस्था के साथ ही घुघली-आनंदनगर रेल खंड पर 46 पुल बनाने के लिए रूप रेखा बनी थी। जैसे-जैसे समय बीतते गया सब कुछ फाइलों में ही सिमट कर रह गया।
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जिला मुख्यालय तक रेल की पटरी बिछने का सपना पूरा नहीं हो सका है। प्रत्येक चुनाव में नेता वादा करते हैं, लेकिन वक्त के साथ भूल जाते हैं।
- डॉ. शांति शरण मिश्रा, मीडिया प्रभारी, सिटीजन फोरम
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महराजगंज शहर का विकास बेहतर ढंग से नहीं हो सका है। परिवहन के नाम पर जिला मुख्यालय पर सिर्फ रोडवेज सेवा है। ट्रेन सेवा शुरू नहीं होना दुख की बात है।
- महेंद्रानंद जायसवाल, प्रबंधक, कास्मोपोलिटन स्कूल, गांधी नगर