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श्री क्षेत्रपाल मंदिर में आचार्यश्री का ससंघ प्रवेश
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क्षेत्रपाल मंदिर में प्रवचन करते विनिश्चय सागर महाराज
- फोटो : LALITPUR
श्री क्षेत्रपाल मंदिर में आचार्यश्री का ससंघ प्रवेश
ललितपुर। श्री क्षेत्रपाल मंदिर में गणाचार्य विरागसागर महाराज के शिष्य आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास कलश स्थापना समारोह पूर्वक किया गया। आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में भावना से ही कामना पूर्ण होती है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने चातुर्मास की महत्ता बताते हुए कहा कि इसमें जहां साधु एक स्थान पर रहकर चार महीने तक साधना और ध्यान के माध्यम से आत्मकल्याण करते हैं, वहीं श्रद्धालु भी साधु संगति में रहकर जीवन को परिवर्तित करने और धर्मांचरण करने की सीख लेते हैं। जीवन में भावना से ही कामना पूरी होती है। जो भी भावना प्रभु से सच्चे मन से की जाती है, उसकी कामना पूरी होती है। विसर्जन नहीं, सृजन की जरूरत है। दिमाग और हृदय का अटूट संबंध है। जब संत की वाणी हो तो दिमाग नहीं दिल लगाना चाहिए।
धर्मसभा का प्रारंभ मंगलाचरण से जयकुमार जैन बड़ागांव ने किया। मंगलगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति सुधासागर कन्या इंटर कालेज की वालिकाओं ने की। मोहिता जैन ने प्रभु की आराधना की। आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य जयकुमार, राकेश कुमार अम्बाह दिल्ली एवं वीरचंद व बिपिन सराफ को मिला, जबकि जैन पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सुंदरलाल व प्रकाशचंद अनौरा परिवार, प्रतिष्ठाचार्य पवन दीवान, कपूर चंद लागौन समेत अनेक श्रद्धालुओं ने शास्त्र भेंट किए।
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जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल ने आचार्यश्री के ससंघ सानिध्य को समाज का पुण्य बताया। उन्होंने कहा कि चातुर्मास निश्चय ही फलीभूत होगा। इस मौके पर राजीव कुमार सिर्स, प्रेमबाई, संजीव और अरूण परिवार झांसी, वीरचंद, बिपिन सर्राफ मौजूद रहे।
पवन शास्त्री द्वारा संपादित धन्यकुमार चारित्र पुस्तिका का विमोचन समाजश्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, राजेंद्र जैन थनवारा व भगवानदास कैलगुवा ने किया। मंचासीन आचार्यश्री के अतिरिक्त मुनिश्री नेमिसागर महाराज, मुनिश्री प्रांजल सागर महाराज, मुनिश्री प्रवीर सागर महाराज, मुनिश्री प्रत्यक्ष सागर महाराज, मुनिश्री प्रज्ञान सागर महाराज, क्षुल्लकश्री प्रज्ञाश सागर महाराज, क्षुल्लकश्री प्रकीर्त सागर महाराज विराजमान रहे। इस मौके पर पूर्व पंचायत अध्यक्ष अजित जैन खजुरिया, ज्ञानचंद इमलिया, अखिलेश गदयाना, प्रदीप सतरवांस, नरेंद्र कडंकी, कोमल दादा, मुकेश सराफ, मनोज जैन बबीना, अक्षय अलया, संजय मोदी, संजीव जैन, राजकुमार जैन, गेंदालाल सतभैया, वीरेंद्र आदि मौजूद रहे। आयोजन में श्री क्षेत्रपाल मंदिर के प्रबंधक राजेंद्र जैन थनवारा एवं पार्षद पंकज जैन के अलावा स्याद्वाद वर्द्धमान सेवा संघ के स्वयंसेवकों का सहयोग रहा।
जैन अटा मंदिर में ध्वजारोहण
श्री जैन अटा मंदिर में चातुर्मास स्थापना का ध्वजारोहण हुआ। इसमें आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में मंत्रोच्चारण के साथ ध्वज पताका निहालचंद उमरिया परिवार ने फहराई और मांगलिक क्रियाओं का शुभारंभ हुआ। इसके उपरान्त आचार्यश्री ससंघ का अटा मंदिर से क्षेत्रपाल मंदिर के लिए चातुर्मास कार्यक्रम हेतु विहार हुआ। वीर व्यायाम शाला बडा मंदिर के स्वयंसेवक जैन धर्म का जयघोष कर रहे थे। मार्ग में आचार्यश्री का पादप्रक्षालन कर आरती उतारी गई। क्षेत्रपाल मंदिर में आचार्यश्री की आहारचर्या का सौभाग्य स्थानीय समाज को मिला। कार्यक्रम के उपरांत आचार्य श्री की जैन अटा मंदिर के लिए वापसी हुई, जहां आचार्यश्री चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह प्रवचन करेंगे। जैन पंचायत के महामंत्री डा. अक्षय टड़ैया ने बताया कि जैन पंचायत एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा धार्मिक कार्यक्रम आचार्यश्री के सानिध्य में होंगे।
24 वर्ष पूर्व ब्रह्मचारी अवस्था में आए थे आचार्यश्री
आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज ने पुरानी स्मृति बताते हुए कहा कि श्री क्षेत्रपाल मंदिर में भगवान अभिंनदन नाथ के चरणों में आकर मुझे सन 1995 की याद ताजा हो गई, जब गुरूदेव आचार्य विराग सागर महाराज का चातुर्मास था और ब्रह्मचारी अवस्था में रहकर श्री क्षेत्रपाल मंदिर में साधना की। आज दिगंबर मुद्रा में श्री क्षेत्रपाल मंदिर आया हूं। यहां चातुर्मास स्थापित करने का पुण्य भगवान अभिनंदन नाथ के चरणों में मिल रहा है। धन्य हैं मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज, जिनकी प्रेरणा से क्षेत्रपाल मंदिर का निर्माण कार्य हो रहा है।
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ललितपुर। श्री क्षेत्रपाल मंदिर में गणाचार्य विरागसागर महाराज के शिष्य आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास कलश स्थापना समारोह पूर्वक किया गया। आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में भावना से ही कामना पूर्ण होती है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने चातुर्मास की महत्ता बताते हुए कहा कि इसमें जहां साधु एक स्थान पर रहकर चार महीने तक साधना और ध्यान के माध्यम से आत्मकल्याण करते हैं, वहीं श्रद्धालु भी साधु संगति में रहकर जीवन को परिवर्तित करने और धर्मांचरण करने की सीख लेते हैं। जीवन में भावना से ही कामना पूरी होती है। जो भी भावना प्रभु से सच्चे मन से की जाती है, उसकी कामना पूरी होती है। विसर्जन नहीं, सृजन की जरूरत है। दिमाग और हृदय का अटूट संबंध है। जब संत की वाणी हो तो दिमाग नहीं दिल लगाना चाहिए।
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धर्मसभा का प्रारंभ मंगलाचरण से जयकुमार जैन बड़ागांव ने किया। मंगलगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति सुधासागर कन्या इंटर कालेज की वालिकाओं ने की। मोहिता जैन ने प्रभु की आराधना की। आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य जयकुमार, राकेश कुमार अम्बाह दिल्ली एवं वीरचंद व बिपिन सराफ को मिला, जबकि जैन पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सुंदरलाल व प्रकाशचंद अनौरा परिवार, प्रतिष्ठाचार्य पवन दीवान, कपूर चंद लागौन समेत अनेक श्रद्धालुओं ने शास्त्र भेंट किए।
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जैन पंचायत अध्यक्ष अनिल जैन अंचल ने आचार्यश्री के ससंघ सानिध्य को समाज का पुण्य बताया। उन्होंने कहा कि चातुर्मास निश्चय ही फलीभूत होगा। इस मौके पर राजीव कुमार सिर्स, प्रेमबाई, संजीव और अरूण परिवार झांसी, वीरचंद, बिपिन सर्राफ मौजूद रहे।
पवन शास्त्री द्वारा संपादित धन्यकुमार चारित्र पुस्तिका का विमोचन समाजश्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, राजेंद्र जैन थनवारा व भगवानदास कैलगुवा ने किया। मंचासीन आचार्यश्री के अतिरिक्त मुनिश्री नेमिसागर महाराज, मुनिश्री प्रांजल सागर महाराज, मुनिश्री प्रवीर सागर महाराज, मुनिश्री प्रत्यक्ष सागर महाराज, मुनिश्री प्रज्ञान सागर महाराज, क्षुल्लकश्री प्रज्ञाश सागर महाराज, क्षुल्लकश्री प्रकीर्त सागर महाराज विराजमान रहे। इस मौके पर पूर्व पंचायत अध्यक्ष अजित जैन खजुरिया, ज्ञानचंद इमलिया, अखिलेश गदयाना, प्रदीप सतरवांस, नरेंद्र कडंकी, कोमल दादा, मुकेश सराफ, मनोज जैन बबीना, अक्षय अलया, संजय मोदी, संजीव जैन, राजकुमार जैन, गेंदालाल सतभैया, वीरेंद्र आदि मौजूद रहे। आयोजन में श्री क्षेत्रपाल मंदिर के प्रबंधक राजेंद्र जैन थनवारा एवं पार्षद पंकज जैन के अलावा स्याद्वाद वर्द्धमान सेवा संघ के स्वयंसेवकों का सहयोग रहा।
जैन अटा मंदिर में ध्वजारोहण
श्री जैन अटा मंदिर में चातुर्मास स्थापना का ध्वजारोहण हुआ। इसमें आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में मंत्रोच्चारण के साथ ध्वज पताका निहालचंद उमरिया परिवार ने फहराई और मांगलिक क्रियाओं का शुभारंभ हुआ। इसके उपरान्त आचार्यश्री ससंघ का अटा मंदिर से क्षेत्रपाल मंदिर के लिए चातुर्मास कार्यक्रम हेतु विहार हुआ। वीर व्यायाम शाला बडा मंदिर के स्वयंसेवक जैन धर्म का जयघोष कर रहे थे। मार्ग में आचार्यश्री का पादप्रक्षालन कर आरती उतारी गई। क्षेत्रपाल मंदिर में आचार्यश्री की आहारचर्या का सौभाग्य स्थानीय समाज को मिला। कार्यक्रम के उपरांत आचार्य श्री की जैन अटा मंदिर के लिए वापसी हुई, जहां आचार्यश्री चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह प्रवचन करेंगे। जैन पंचायत के महामंत्री डा. अक्षय टड़ैया ने बताया कि जैन पंचायत एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा धार्मिक कार्यक्रम आचार्यश्री के सानिध्य में होंगे।
24 वर्ष पूर्व ब्रह्मचारी अवस्था में आए थे आचार्यश्री
आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज ने पुरानी स्मृति बताते हुए कहा कि श्री क्षेत्रपाल मंदिर में भगवान अभिंनदन नाथ के चरणों में आकर मुझे सन 1995 की याद ताजा हो गई, जब गुरूदेव आचार्य विराग सागर महाराज का चातुर्मास था और ब्रह्मचारी अवस्था में रहकर श्री क्षेत्रपाल मंदिर में साधना की। आज दिगंबर मुद्रा में श्री क्षेत्रपाल मंदिर आया हूं। यहां चातुर्मास स्थापित करने का पुण्य भगवान अभिनंदन नाथ के चरणों में मिल रहा है। धन्य हैं मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज, जिनकी प्रेरणा से क्षेत्रपाल मंदिर का निर्माण कार्य हो रहा है।

श्री क्षेत्रपाल मंदिर में प्रवचन सुनते श्रद्धालु।- फोटो : LALITPUR