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लाखों खर्च, फिर भी मिल रहा अस्वच्छ पानी
lalitpur
Updated Sun, 19 Jun 2016 01:18 AM IST
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पानी
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को स्वच्छ पानी पिलाने के लिए खरीदे गए वाटर प्यूरीफायर पिछले पांच सालों से जल निगम के स्टोर में रखे धूल खा रहे हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सरकारी स्कूल के बच्चों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वर्ष 2008-09 में शासन ने जनपद के परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लगे हैंडपंपों के पानी का परीक्षण कराया था। प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने पर जिले के 174 विद्यालयों के हैंडपंपों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से काफी अधिक पाई गई थी, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इस पर बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार द्वारा जलमणि योजना के तहत उक्त विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर लगवाने की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई, इसको लगाने की जिम्मेदारी जल निगम को सौंपी गई।
जल निगम के अधिकारियों ने दिल्ली की एक कंपनी को 174 विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट लगाने का ठेका 27 लाख रुपये में दिया था। लेकिन, जिले के सभी विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट लगाए बिना ही कंपनी जल निगम से भुगतान लेकर गायब हो गई। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में 44 विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट लगाए थे, बाकि 19 लाख रुपये की लागत के 130 प्यूरीफायर सेट जल निगम के स्टोर में धूल खा रहे हैं। सरकार के 27 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे जहरीला पानी को मजबूर हैं। जल निगम के के अफसर कंपनी से पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं आ रहा है।
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जल निगम ने कर दिया पूरा भुगतान
जलनिगम के अधिकारियों ने विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट को लगाने के लिए दिल्ली की कंपनी को 27 लाख रुपए में ठेका दिया था। कंपनी को 174 विद्यालयों में सेट लगाने थे, लेकिन एक भी विद्यालय में सेट नहीं लगाया गया था। इसके बावजूद जल निगम के अधिकारियों द्वारा कंपनी का पूरा भुगतान कर दिया गया। जल निगम के स्टोर में रखे 130 वाटर प्यूरीफायर सेट इस बात के गवाह हैं कि अफसरों को इस बात की अच्छे से जानकारी थी कि विद्यालयों में प्यूरीफायर सेट लगाए ही नहीं गए है, इसके बावजूद कंपनी को एडवांस भुगतान कर दिया गया।
44 प्यूरीफायर की यह है स्थिति
विभागीय रिकार्ड के अनुसार कंपनी द्वारा जिले के 44 विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर लगाए गए थे, इसमें से तालबेहट ब्लाक क्षेत्र के 11, महरौनी के 06, मड़ावरा के 04, जखौरा के 11, बिरधा के 02 व बार ब्लाक क्षेत्र के 10 विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट लगाए जा चुके थे। लेकिन, वर्ष 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई गई जांच के दौरान यह सामने आया था कि जनपद के किसी भी विद्यालय में प्यूरीफायर सेट नहीं लगाया गया है।
एफआईआर की मांग
महरौनी के ग्राम सौजना निवासी सुनील कुमार वैध ने मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। जांच में आरोपी पाए जाने पर जल निगम व कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
टेंडर लखनऊ से हुआ था। कंपनी से पत्राचार किया गया है, लेकिन कंपनी का पता गलत होने के कारण पत्राचार नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में शासन को लिखा गया है।
- इंजी. यशवीर सिंह
अधिशासी अभियंता जल संस्थान
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वर्ष 2008-09 में शासन ने जनपद के परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लगे हैंडपंपों के पानी का परीक्षण कराया था। प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने पर जिले के 174 विद्यालयों के हैंडपंपों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से काफी अधिक पाई गई थी, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इस पर बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार द्वारा जलमणि योजना के तहत उक्त विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर लगवाने की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई, इसको लगाने की जिम्मेदारी जल निगम को सौंपी गई।
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जल निगम के अधिकारियों ने दिल्ली की एक कंपनी को 174 विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट लगाने का ठेका 27 लाख रुपये में दिया था। लेकिन, जिले के सभी विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट लगाए बिना ही कंपनी जल निगम से भुगतान लेकर गायब हो गई। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में 44 विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट लगाए थे, बाकि 19 लाख रुपये की लागत के 130 प्यूरीफायर सेट जल निगम के स्टोर में धूल खा रहे हैं। सरकार के 27 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे जहरीला पानी को मजबूर हैं। जल निगम के के अफसर कंपनी से पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं आ रहा है।
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जल निगम ने कर दिया पूरा भुगतान
जलनिगम के अधिकारियों ने विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट को लगाने के लिए दिल्ली की कंपनी को 27 लाख रुपए में ठेका दिया था। कंपनी को 174 विद्यालयों में सेट लगाने थे, लेकिन एक भी विद्यालय में सेट नहीं लगाया गया था। इसके बावजूद जल निगम के अधिकारियों द्वारा कंपनी का पूरा भुगतान कर दिया गया। जल निगम के स्टोर में रखे 130 वाटर प्यूरीफायर सेट इस बात के गवाह हैं कि अफसरों को इस बात की अच्छे से जानकारी थी कि विद्यालयों में प्यूरीफायर सेट लगाए ही नहीं गए है, इसके बावजूद कंपनी को एडवांस भुगतान कर दिया गया।
44 प्यूरीफायर की यह है स्थिति
विभागीय रिकार्ड के अनुसार कंपनी द्वारा जिले के 44 विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर लगाए गए थे, इसमें से तालबेहट ब्लाक क्षेत्र के 11, महरौनी के 06, मड़ावरा के 04, जखौरा के 11, बिरधा के 02 व बार ब्लाक क्षेत्र के 10 विद्यालयों में वाटर प्यूरीफायर सेट लगाए जा चुके थे। लेकिन, वर्ष 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई गई जांच के दौरान यह सामने आया था कि जनपद के किसी भी विद्यालय में प्यूरीफायर सेट नहीं लगाया गया है।
एफआईआर की मांग
महरौनी के ग्राम सौजना निवासी सुनील कुमार वैध ने मंडलायुक्त को ज्ञापन देकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। जांच में आरोपी पाए जाने पर जल निगम व कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
टेंडर लखनऊ से हुआ था। कंपनी से पत्राचार किया गया है, लेकिन कंपनी का पता गलत होने के कारण पत्राचार नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में शासन को लिखा गया है।
- इंजी. यशवीर सिंह
अधिशासी अभियंता जल संस्थान