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Lalitpur News: जिले की जनसंख्या तो बढ़ी लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं
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जनसंख्या दिवस पर विशेष
- समयबद्ध तरीके से सतत विकास न होने के कारण जनसंख्या बढ़ने पर सुविधाओं के लिए परेशान हो रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। वर्ष 1991 में जिले की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 6,46,495 थी, जो अब 24 साल में बढ़कर लगभग 15 लाख पहुंच गई है। आबादी तो डेढ़ गुना बढ़ गई है, जबकि सुविधाएं धरातल पर नजर नहीं आ रही हैं। करीब एक लाख मकानों में बिजली का संयोजन नहीं है। 33 हजार घरों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
जिले की जनसंख्या बढ़कर 2001 में 8,35,790 हो गई। वर्ष 2011 में हुई जनगणना में जिले की आबादी 10,46,214 का आकलन किया था। वर्ष 2011 के बाद जनगणना नहीं हुई है, लेकिन विगत लोकसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग की जनसंख्या सर्वे के अनुसार एक जनवरी 2024 को जिले की जनसंख्या 15,64,711 का आंकलन किया था, जिसके अनुसार 8,21,057 पुरुष व 7,43,654 महिलाएं हैं। जिले में 1991 से अभी तक करीब दस लाख जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, अगर जनसंख्या घनत्व के हिसाब से सुविधा का आंकलन किया जाए, तो वह न के बराबर ही बढ़ी है। जनपद में लोग मूलभूत सुविधाएं बिजली व पानी के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं। अभी भी कई गांव ऐसे हैं, जिनका संपर्क मार्ग नहीं है, तो बिजली व पानी से वह संतृप्त नहीं हैं। जिले में विद्युत संयोजन सिर्फ एक लाख 63 हजार है, जबकि नलों को संयोजन जोड़ने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अभी सरकार हर घर में नल के माध्यम से पानी नहीं पहुंचा पाई है।
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फोटो- 31
जनसंख्या के घनत्व के हिसाब से विकास कार्य की कार्ययोजना तैयार की गई है, उसके अनुसार कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में पिछली सरकारों की अनदेखी के कारण यह समस्याएं आम जनता को हो रही है। हर-घर जल नल योजना से लोगों का पानी व सड़कों के निर्माण का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
रामरतन कुशवाहा, सदर विधायक
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फोटो- 32
नगर पालिका का सीमा विस्तार तो हुआ है, लेकिन शहरी विस्तार नहीं हुआ। अभी ग्राम सभा की भूमि नगर पालिका नजूल में दर्ज नहीं गई है। इन भूमियों को नगर पालिका में दर्जकर शहरी विकास की कार्ययोजना तैयार की जा सकती है। साथ ही शहरी यातायात पर नियंत्रण के लिए शहर सीमा के चारों ओर रिंग रोड का निर्माण होना चाहिए, जिससे शहर में जाम स्थिति न उत्पन्न हो। शहरी विकास में निवेश कमी व राजनैतिक अस्थिरता भी बाधक बनी है।
सुभाष जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष
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फोटो- 33
जिस हिसाब से जनसंख्या बढ़ी है, उस हिसाब से विकास नहीं हुआ है। पचास साल पुरानी सड़कें हैं, उन्हीं की मरम्मत व निर्माण चल रहा है। नए रास्ते नहीं बनाए गए हैं। पेयजल के लिए वाटर वर्क्स में 30 हजार आबादी को संतृप्त करने के लिए प्लांट बनाया गया था। आज शहर की आबादी करीब डेढ़ लाख से अधिक हैं, समयबद्ध तरीके से कार्ययोजना तैयार न करने के कारण जनसंख्या बोझ लगने लगी है।
जसपाल सिंह बंटी, पूर्व सचिव उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी
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- समयबद्ध तरीके से सतत विकास न होने के कारण जनसंख्या बढ़ने पर सुविधाओं के लिए परेशान हो रहे लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। वर्ष 1991 में जिले की जनगणना के अनुसार जनसंख्या 6,46,495 थी, जो अब 24 साल में बढ़कर लगभग 15 लाख पहुंच गई है। आबादी तो डेढ़ गुना बढ़ गई है, जबकि सुविधाएं धरातल पर नजर नहीं आ रही हैं। करीब एक लाख मकानों में बिजली का संयोजन नहीं है। 33 हजार घरों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
जिले की जनसंख्या बढ़कर 2001 में 8,35,790 हो गई। वर्ष 2011 में हुई जनगणना में जिले की आबादी 10,46,214 का आकलन किया था। वर्ष 2011 के बाद जनगणना नहीं हुई है, लेकिन विगत लोकसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग की जनसंख्या सर्वे के अनुसार एक जनवरी 2024 को जिले की जनसंख्या 15,64,711 का आंकलन किया था, जिसके अनुसार 8,21,057 पुरुष व 7,43,654 महिलाएं हैं। जिले में 1991 से अभी तक करीब दस लाख जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, अगर जनसंख्या घनत्व के हिसाब से सुविधा का आंकलन किया जाए, तो वह न के बराबर ही बढ़ी है। जनपद में लोग मूलभूत सुविधाएं बिजली व पानी के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं। अभी भी कई गांव ऐसे हैं, जिनका संपर्क मार्ग नहीं है, तो बिजली व पानी से वह संतृप्त नहीं हैं। जिले में विद्युत संयोजन सिर्फ एक लाख 63 हजार है, जबकि नलों को संयोजन जोड़ने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अभी सरकार हर घर में नल के माध्यम से पानी नहीं पहुंचा पाई है।
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जनसंख्या के घनत्व के हिसाब से विकास कार्य की कार्ययोजना तैयार की गई है, उसके अनुसार कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में पिछली सरकारों की अनदेखी के कारण यह समस्याएं आम जनता को हो रही है। हर-घर जल नल योजना से लोगों का पानी व सड़कों के निर्माण का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
रामरतन कुशवाहा, सदर विधायक
फोटो- 32
नगर पालिका का सीमा विस्तार तो हुआ है, लेकिन शहरी विस्तार नहीं हुआ। अभी ग्राम सभा की भूमि नगर पालिका नजूल में दर्ज नहीं गई है। इन भूमियों को नगर पालिका में दर्जकर शहरी विकास की कार्ययोजना तैयार की जा सकती है। साथ ही शहरी यातायात पर नियंत्रण के लिए शहर सीमा के चारों ओर रिंग रोड का निर्माण होना चाहिए, जिससे शहर में जाम स्थिति न उत्पन्न हो। शहरी विकास में निवेश कमी व राजनैतिक अस्थिरता भी बाधक बनी है।
सुभाष जायसवाल, नगर पालिका अध्यक्ष
फोटो- 33
जिस हिसाब से जनसंख्या बढ़ी है, उस हिसाब से विकास नहीं हुआ है। पचास साल पुरानी सड़कें हैं, उन्हीं की मरम्मत व निर्माण चल रहा है। नए रास्ते नहीं बनाए गए हैं। पेयजल के लिए वाटर वर्क्स में 30 हजार आबादी को संतृप्त करने के लिए प्लांट बनाया गया था। आज शहर की आबादी करीब डेढ़ लाख से अधिक हैं, समयबद्ध तरीके से कार्ययोजना तैयार न करने के कारण जनसंख्या बोझ लगने लगी है।
जसपाल सिंह बंटी, पूर्व सचिव उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी