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Lalitpur News: गिन्नौट बाग के पर्यटन विकास की धनराशि शासन में होगी वापस
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एस्टीमेट रिवाइज न होने के कारण नहीं हो पाया था कार्य शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। गिन्नौट बाग में स्थित पांच प्राचीन पारीजात के वृक्षों के संरक्षण व सौंदर्यीकरण की योजना तैयार की गई थी, जिसे शासन ने स्वीकृति दे दी थी। इसके लिए 50 लाख रुपये धनराशि भी भेजी गई थी। इन कार्य के गिन्नौट बाग का बहुत बड़ा भू भाग शामिल किया जा रहा था। जबकि इस बाग में कई सार्वजनिक कार्यक्रम होते हैं। जिला प्रशासन ने कम एरिया के साथ नई कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी थी। जिसकी मंजूरी नहीं मिली है, इसके बाद अब यह धनराशि शासन को वापस भेजी जा रही है।
शहर में स्थित गिन्नौट बाग में पांच प्राचीन पारीजात के वृक्ष मौजूद हैं। यह पेड़ काफी प्राचीन दुलर्भ जाति के बताए जाते हैं। पर्यटन विभाग ने इन पेड़ों को संरक्षित व आसपास सौंदर्यीकरण कराने के लिए कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी थी। जिसके एवज में शासन ने 50 लाख रुपये की धनराशि भेेजी थी। पर्यटन विभाग की कार्ययोजना में गिन्नौट बाग का अधिक क्षेत्रफल लिया जा रहा था। जिससे वहां पर होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रम प्रभावित हो सकते थे। तत्कालीन जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने क्षेत्रफल कम करते हुए एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा था। लेकिन उस एस्टीमेट को शासन से अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में पूर्व की योजना का कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है, जिससे जनपद की सीएम डैशबोर्ड में रैकिंग खराब हो रही है। सीएम डैशबोर्ड में हटाने के लिए इस कार्ययोजना की धनराशि शासन को भेजने की कवायद विभागीय तौर पर प्रारंभ कर दी है।
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गिन्नौट बाग में पर्यटन विकास योजना के लिए जो शासन से धनराशि भेजी गई थी। एस्टीमेट रिवाइज न होने के कारण उसे वापस भेजा जा रहा है। नये सिरे से धनराशि मांगी गई है, वह मिलने के बाद नये एस्टीमेट के अनुसार कार्य कराया जाएगा।
हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। गिन्नौट बाग में स्थित पांच प्राचीन पारीजात के वृक्षों के संरक्षण व सौंदर्यीकरण की योजना तैयार की गई थी, जिसे शासन ने स्वीकृति दे दी थी। इसके लिए 50 लाख रुपये धनराशि भी भेजी गई थी। इन कार्य के गिन्नौट बाग का बहुत बड़ा भू भाग शामिल किया जा रहा था। जबकि इस बाग में कई सार्वजनिक कार्यक्रम होते हैं। जिला प्रशासन ने कम एरिया के साथ नई कार्ययोजना बनाकर शासन को भेजी थी। जिसकी मंजूरी नहीं मिली है, इसके बाद अब यह धनराशि शासन को वापस भेजी जा रही है।
शहर में स्थित गिन्नौट बाग में पांच प्राचीन पारीजात के वृक्ष मौजूद हैं। यह पेड़ काफी प्राचीन दुलर्भ जाति के बताए जाते हैं। पर्यटन विभाग ने इन पेड़ों को संरक्षित व आसपास सौंदर्यीकरण कराने के लिए कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी थी। जिसके एवज में शासन ने 50 लाख रुपये की धनराशि भेेजी थी। पर्यटन विभाग की कार्ययोजना में गिन्नौट बाग का अधिक क्षेत्रफल लिया जा रहा था। जिससे वहां पर होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रम प्रभावित हो सकते थे। तत्कालीन जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने क्षेत्रफल कम करते हुए एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा था। लेकिन उस एस्टीमेट को शासन से अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में पूर्व की योजना का कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है, जिससे जनपद की सीएम डैशबोर्ड में रैकिंग खराब हो रही है। सीएम डैशबोर्ड में हटाने के लिए इस कार्ययोजना की धनराशि शासन को भेजने की कवायद विभागीय तौर पर प्रारंभ कर दी है।
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गिन्नौट बाग में पर्यटन विकास योजना के लिए जो शासन से धनराशि भेजी गई थी। एस्टीमेट रिवाइज न होने के कारण उसे वापस भेजा जा रहा है। नये सिरे से धनराशि मांगी गई है, वह मिलने के बाद नये एस्टीमेट के अनुसार कार्य कराया जाएगा।
हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी