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Lalitpur News: दुरुस्त कराए जाएंगे जामनी बांध से निकले रजवाहे, थमेगी पानी की बर्बादी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जामनी बांध से निकले चार रजवाहों का 6.68 करोड़ रुपये से जीर्णोद्धार कर इन्हें मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। सीपेज, लीकेज के जरिए होने वाली पानी की बर्बादी रुकेगी। आचार संहिता समाप्त होने के बाद सिंचाई विभाग इसकी निविदा प्रक्रिया शुरू करेगा।
मड़ावरा क्षेत्र में नदी पर जामनी बांध का निर्माण 1973 में हुआ था। बांध में पानी भंडारण क्षमता 92.87 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) है। सिंचाई के लिए 67 एमसीएम पानी आरक्षित है, जबकि पेयजल व अन्य वाणिज्यिक उपयोग के लिए 1.42 एमसीएम है। इस प्रकार उपयोगी जल की मात्रा 84 एमसीएम है। बांध से फसलों की सिंचाई के लिए नहर निकली है, जिनकी लंबाई करीब 230 किलोमीटर है। नहरों से निकले रजवाहा के जरिये भी खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। करीब दस हजार हेक्टेयर भूमि इन नहरों व रजवाहों से सिंचित होती है, जिसमें सर्वाधिक सिंचाई रबी के सीजन में की जाती है। बांध से निकली दाईं व बाईं नहर से 9.400 किमी. टीकमगढ़ रजवाहा, 14 किलोमीटर लंबा महरौनी रजवाहा, 13.378 किमी लंबा बानपुर रजवाहा, 15.335 किमी लंबा दैलवारा रजवाहा निकला है। उक्त रजवाहे काफी पुराने हो जाने से जर्जर अवस्था में हैं।
नहरों में पानी छोड़े जाने के दौरान लीकेज और सीपेज से काफी पानी बर्बाद हो जाता है और अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता। अब इस समस्या से छुटकारा मिलने की उम्मीद जगी है। सिंचाई विभाग ने जामनी बांध की नहरों के इन चारों रजवाहों का आधुनिकीकरण कर इसे मॉडल के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की है। रजवाहों के क्षतिग्रस्त स्थानों को सुधारा जाएगा, पक्के-कच्चे काम कराए जाएंगे। लाइनिंग के साथ अन्य काम भी कराए जाएंगे। सीपेज, लीकेज के जरिये होने वाली पानी की बर्बादी रुकेगी। जो पानी बचेगा उससे सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा और किसानों को फायदा होगा।
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रजवाहा का नाम - लंबाई - लागत
टीकमगढ़ - 9.400 किमी. - 1.88 करोड़
महरौनी - 14 किमी. - 1.50 करोड़
बानपुर - 13.378 किमी.- 1.60 करोड़
दैलवारा - 15.335 किमी.- 1.70 करोड़
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फैक्ट फाइल
- 403.55 मीटर पूर्ण जलस्तर
- 396.39 न्यूनतम जलस्तर
- 10 हजार हेक्टेयर सिंचाई की क्षमता
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बाउंड्री-पिलर बनाकर किया जाएगा सीमांकन
शहजाद बांध से निकली दाईं नहर के दोनों ओर मौजूद सिंचाई विभाग की जमीन को सुरक्षित करने और अवैध कब्जा रोकने के लिए यहां बाउंड्री वाल व पिलर बनाकर सीमांकन किया जाएगा।
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बांध की नहरों से निकले चार रजवाहा टीकमगढ़, महरौनी, बानपुर, दैलवारा का 6.68 करोड़ रुपये से आधुनिकीकरण किया जाएगा। आचार संहिता समाप्त हो जाने के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इं. सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड
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ललितपुर। जामनी बांध से निकले चार रजवाहों का 6.68 करोड़ रुपये से जीर्णोद्धार कर इन्हें मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। सीपेज, लीकेज के जरिए होने वाली पानी की बर्बादी रुकेगी। आचार संहिता समाप्त होने के बाद सिंचाई विभाग इसकी निविदा प्रक्रिया शुरू करेगा।
मड़ावरा क्षेत्र में नदी पर जामनी बांध का निर्माण 1973 में हुआ था। बांध में पानी भंडारण क्षमता 92.87 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) है। सिंचाई के लिए 67 एमसीएम पानी आरक्षित है, जबकि पेयजल व अन्य वाणिज्यिक उपयोग के लिए 1.42 एमसीएम है। इस प्रकार उपयोगी जल की मात्रा 84 एमसीएम है। बांध से फसलों की सिंचाई के लिए नहर निकली है, जिनकी लंबाई करीब 230 किलोमीटर है। नहरों से निकले रजवाहा के जरिये भी खेतों तक पानी पहुंचाया जाता है। करीब दस हजार हेक्टेयर भूमि इन नहरों व रजवाहों से सिंचित होती है, जिसमें सर्वाधिक सिंचाई रबी के सीजन में की जाती है। बांध से निकली दाईं व बाईं नहर से 9.400 किमी. टीकमगढ़ रजवाहा, 14 किलोमीटर लंबा महरौनी रजवाहा, 13.378 किमी लंबा बानपुर रजवाहा, 15.335 किमी लंबा दैलवारा रजवाहा निकला है। उक्त रजवाहे काफी पुराने हो जाने से जर्जर अवस्था में हैं।
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नहरों में पानी छोड़े जाने के दौरान लीकेज और सीपेज से काफी पानी बर्बाद हो जाता है और अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता। अब इस समस्या से छुटकारा मिलने की उम्मीद जगी है। सिंचाई विभाग ने जामनी बांध की नहरों के इन चारों रजवाहों का आधुनिकीकरण कर इसे मॉडल के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की है। रजवाहों के क्षतिग्रस्त स्थानों को सुधारा जाएगा, पक्के-कच्चे काम कराए जाएंगे। लाइनिंग के साथ अन्य काम भी कराए जाएंगे। सीपेज, लीकेज के जरिये होने वाली पानी की बर्बादी रुकेगी। जो पानी बचेगा उससे सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा और किसानों को फायदा होगा।
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रजवाहा का नाम - लंबाई - लागत
टीकमगढ़ - 9.400 किमी. - 1.88 करोड़
महरौनी - 14 किमी. - 1.50 करोड़
बानपुर - 13.378 किमी.- 1.60 करोड़
दैलवारा - 15.335 किमी.- 1.70 करोड़
फैक्ट फाइल
- 403.55 मीटर पूर्ण जलस्तर
- 396.39 न्यूनतम जलस्तर
- 10 हजार हेक्टेयर सिंचाई की क्षमता
बाउंड्री-पिलर बनाकर किया जाएगा सीमांकन
शहजाद बांध से निकली दाईं नहर के दोनों ओर मौजूद सिंचाई विभाग की जमीन को सुरक्षित करने और अवैध कब्जा रोकने के लिए यहां बाउंड्री वाल व पिलर बनाकर सीमांकन किया जाएगा।
बांध की नहरों से निकले चार रजवाहा टीकमगढ़, महरौनी, बानपुर, दैलवारा का 6.68 करोड़ रुपये से आधुनिकीकरण किया जाएगा। आचार संहिता समाप्त हो जाने के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इं. सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड