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जिले में लगेंगे 15 हजार विद्युत मीटर
ललितपुर ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2015 12:28 AM IST
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ललितपुर। विद्युत नियामक आयोग द्वारा नये संयोजनों पर विद्युत मीटर लगाने के लिए लगी पाबंदी हटा ली गई है। अब आयोग ने मीटर लगाने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय दे दिया है। साथ ही मीटर लगाने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए उप्र पावर कार्पोरेशन द्वारा मीटर विभाग को तीन हजार मीटर उपलब्ध कराए गए हैं। जिले भर में करीब 15 हजार मीटर लगाए जाएंगे।
जनपद में विद्युत उपभोक्ताओं को विभाग द्वारा वर्षों पूर्व संयोजन तो जारी कर दिए गए, लेकिन मीटर अब तक नहीं लगाए गए। इस कारण उपभोक्ताओं को बिना मीटर के फिक्स्ड यूनिट के हिसाब से विद्युत बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है। जनपद में बिना मीटर वाले व खराब मीटर वाले करीब 15 हजार उपभोक्ताओं के मीटर लगाए जाने हैं। अगस्त के पहले सप्ताह तक नियामक आयोग के आदेश के अनुसार नये संयोजनों पर मीटर लगाने का कार्य हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते नए संयोजनों पर मीटर लगाने का कार्य पूरा नहीं किया जा सका। नियामक आयोग की शर्त के अनुसार पावर कार्पोरेशन को बिना मीटर वाले संयोजनधारी उपभोक्ताओं को नि:शुल्क बिजली दी जानी थी।
लेकिन, मीटर लगाने के लिए कार्पोरेशन ने कुछ और समय की मांग की।
विभागीय सूत्रों के अनुसार नियामक आयोग ने पावर कार्पोरेशन की मांग पर मीटर लगाने के लिए दो माह की समय अवधि बढ़ा दी गई, जिसके चलते अब दो माह में पूरे जनपद में मीटर बदलने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। इसके लिए पावर कार्पोरेशन द्वारा विद्युत स्टोर के माध्यम से दो दिन पूर्व साढ़े पांच सौ मीटर उपलब्ध करा दिए गए। शनिवार को भी ढाई हजार मीटरों की एक और खेप उपलब्ध करा दी गई है। मीटर विभाग द्वारा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मीटर लगाने का कार्य तेजी पकड़ चुका है। यदि अकेले शहर की बात जाए तो विभाग को अभी खराब मीटर वाले संयोजनों के करीब साढ़े चार हजार से अधिक मीटर बदले जाने हैं, जबकि नए संयोजनों पर करीब डेढ़ हजार उपभोक्ताओं के मीटर लगाए जाने बाकी हैं। इसी प्रकार पूरे जनपद में नए बिना मीटर वाले संयोजनों पर करीब साढ़े 11 हजार मीटर लगाए जाने हैं, जबकि करीब चार हजार उपभोक्ताओं के घर खराब होने की दशा में मीटर बदले जाने हैं।
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विभाग को हो रहा करोड़ों का घाटा
ललितपुर। बिलिंग नहीं होने के कारण अकेले शहर में ही दोनों नये व पुराने संयोजनधारी उपभोक्ताओं से विभाग को हर माह 45 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। बिना मीटर के चलते बिलिंग एक या दो माह से नहीं, बल्कि करीब एक वर्ष से इसी प्रकार बाधित चल रही है। इसके चलते विद्युत विभाग को एक वर्ष में करीब पांच करोड़ 43 लाख 60 हजार रुपये का नुकसान हो चुका है। यह तो मात्र शहर में ही एक किलोवाट के हिसाब से अनुमानित राशि का आंकड़ा है। यदि पूरे जनपद में वास्तविक आंकलन किया जाए तो विभाग का यह आंकड़ा काफी अधिक हो सकता है।
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जनपद में विद्युत उपभोक्ताओं को विभाग द्वारा वर्षों पूर्व संयोजन तो जारी कर दिए गए, लेकिन मीटर अब तक नहीं लगाए गए। इस कारण उपभोक्ताओं को बिना मीटर के फिक्स्ड यूनिट के हिसाब से विद्युत बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है। जनपद में बिना मीटर वाले व खराब मीटर वाले करीब 15 हजार उपभोक्ताओं के मीटर लगाए जाने हैं। अगस्त के पहले सप्ताह तक नियामक आयोग के आदेश के अनुसार नये संयोजनों पर मीटर लगाने का कार्य हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते नए संयोजनों पर मीटर लगाने का कार्य पूरा नहीं किया जा सका। नियामक आयोग की शर्त के अनुसार पावर कार्पोरेशन को बिना मीटर वाले संयोजनधारी उपभोक्ताओं को नि:शुल्क बिजली दी जानी थी।
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लेकिन, मीटर लगाने के लिए कार्पोरेशन ने कुछ और समय की मांग की।
विभागीय सूत्रों के अनुसार नियामक आयोग ने पावर कार्पोरेशन की मांग पर मीटर लगाने के लिए दो माह की समय अवधि बढ़ा दी गई, जिसके चलते अब दो माह में पूरे जनपद में मीटर बदलने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। इसके लिए पावर कार्पोरेशन द्वारा विद्युत स्टोर के माध्यम से दो दिन पूर्व साढ़े पांच सौ मीटर उपलब्ध करा दिए गए। शनिवार को भी ढाई हजार मीटरों की एक और खेप उपलब्ध करा दी गई है। मीटर विभाग द्वारा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मीटर लगाने का कार्य तेजी पकड़ चुका है। यदि अकेले शहर की बात जाए तो विभाग को अभी खराब मीटर वाले संयोजनों के करीब साढ़े चार हजार से अधिक मीटर बदले जाने हैं, जबकि नए संयोजनों पर करीब डेढ़ हजार उपभोक्ताओं के मीटर लगाए जाने बाकी हैं। इसी प्रकार पूरे जनपद में नए बिना मीटर वाले संयोजनों पर करीब साढ़े 11 हजार मीटर लगाए जाने हैं, जबकि करीब चार हजार उपभोक्ताओं के घर खराब होने की दशा में मीटर बदले जाने हैं।
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विभाग को हो रहा करोड़ों का घाटा
ललितपुर। बिलिंग नहीं होने के कारण अकेले शहर में ही दोनों नये व पुराने संयोजनधारी उपभोक्ताओं से विभाग को हर माह 45 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। बिना मीटर के चलते बिलिंग एक या दो माह से नहीं, बल्कि करीब एक वर्ष से इसी प्रकार बाधित चल रही है। इसके चलते विद्युत विभाग को एक वर्ष में करीब पांच करोड़ 43 लाख 60 हजार रुपये का नुकसान हो चुका है। यह तो मात्र शहर में ही एक किलोवाट के हिसाब से अनुमानित राशि का आंकड़ा है। यदि पूरे जनपद में वास्तविक आंकलन किया जाए तो विभाग का यह आंकड़ा काफी अधिक हो सकता है।