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सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाने में बिजली की समस्या अब नहीं बनेगी बाधा
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solar power
- फोटो : solar power
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ललितपुर। जाखलौन पंप केनाल को सौर ऊर्जा से संचालित करने और जमीन की बचत करने के उद्देश्य से सिंचाई विभाग द्वारा नहर के ठीक ऊपर सोलर ऊर्जा प्लांट की स्थापना का कार्य अक्तूबर के अंत तक पूर्ण कर लिया जाएगा। यहां दो यूनिटों से तकरीबन 5.92 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जाना है। इससे सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाने में अब बिजली की समस्या बाधा नहीं बनेगी।
बेेतवा नदी किनारे बंदरगुढ़ा में पहाड़ी पर करीब डेढ़ सौ फीट ऊंचाई पर स्थापित जाखलौन पंप केनाल के संचालन से लगभग 34 किलोमीटर लंबी नहर से करीब 100 गांवों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। समय से बिजली नहीं मिल पाने की वजह से जेपीसी का संचालन रोस्टर के अनुसार नहीं हो पा रहा था। अब सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित होने से नहर का संचालन सही तरीके से होने लगेगा।
सिंचाई विभाग के अनुसार नहर संचालन के लिए यहां पांच पंप स्थापित हैं। लेकिन आए दिन बिजली वोल्टेज या फिर बिजली की कमी के कारण सभी पांच पंपों का संचालन नियमित नहीं हो पाता है। इससे नहर कई बार पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं हो पाती है और नहर का पानी कई बार टेल वाले गांवों तक नहीं पहुंच पाता है। इसके चलते सिंचाई विभाग द्वारा शासन की योजना के तहत नहर चलने योग्य कम क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करना प्रस्तावित किया गया, ताकि जाखलौन पंप केनाल के सुचारु संचालन में बिजली की बाधा उत्पन्न न हो सके। साथ ही किसानों को समय से सिंचाई के लिए केनाल का पानी उपलब्ध कराया जा सके।
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प्रत्येक वर्ष एक करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा
सिंचाई विभाग निर्माण खंड द्वितीय द्वारा जाखलौन पंप केनाल पर सोलर ऊर्जा प्लांट की स्थापना के लिए यहां 3.42 मेगावाट और 2.50 मेगावाट क्षमता की दो यूनिटें बनाई जा रही हैं। 2.50 मेगावाट की यूनिट का कार्य पूर्ण हो चुका है और 3.42 मेगावाट की यूनिट का काम मात्र दस प्रतिशत बचा है। सिंचाई विभाग की अधिकारियों की मानें तो अक्तूबर माह में इसका कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा। 5.92 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट बनाने में 29.64 करोड़ रुपये की लागत आई है। इससे प्रत्येक वर्ष एक करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। वर्ष 2016 में 27.08 करोड़ रुपये की परियोजना की स्वीकृति मिली थी लेकिन नहर पर स्थापित मॉडल और डिजाइन में मामूली बदलाव किया गया और काम में देरी होने की वजह से पूर्व में स्वीकृत लागत 27.08 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2019 में 29.64 करोड़ रुपये हो गई।
केनाल के ऊपर लगाया गया है प्लांट
यह प्लांट नहर के ऊपर स्थापित किया गया है। इसमें नहर से पानी भी बहता रहेगा और नहर के ऊपर बने ढांचे पर सोलर प्लांट की प्लेटों से सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होता रहेगा। प्लांट नहर पर करीब ढाई किलोमीटर क्षेत्र में स्थापित किया गया है। इसकी स्थापना सिंचाई विभाग निर्माण खंड द्वितीय के अधिकारियों की देखरेख में किया जा रहा है।
सोलर प्लांट शुरू होने पर ग्रिड में जोड़ा जाएगा। विद्युत उत्पादन का तो लेखाजोखा हमारे पास रहेगा लेकिन सिंचाई विभाग को उससे कोई मतलब नहीं होगा कि हमारे पास कितनी बिजली की बचत हो रही है या नहीं। अभी तक मेरे पास इससे संबंधित शासन स्तर से कोई जानकारी नहीं है।
आकाश सचान, अधिशासी अभियंता विद्युत, ग्रामीण
रबी की फसल के लिए नवंबर से मार्च तक करीब साढ़े चार महीने जाखलौन पंप कैनाल का संचालन किया जाता है इस वर्ष 17,300 हेक्टेयर भूमि सिंचित करने का लक्ष्य है। खरीफ की फसल के लिए बेतवा रिवर बोर्ड से पानी नहीं मिलता है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पानी के बंटवारे में केवल रबी की फसल के लिए ही पानी की उपलब्धता है।
भागीरथ, अधिशासी अभियंता सिंचाई, निर्माण खंड प्रथम
अक्तूबर माह तक सोलर प्लांट चालू कर दिया जाएगा। बिजली विभाग से बर्ष 2018 में बैंकिंग अनुबंध हुआ था लेकिन बर्ष 2019 रेगुलेशन में बदलाव किया गया है जिसके तहत बैंकिंग अनुबंध की कार्यवाही चल रही है।
राजीव कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड द्वितीय
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बेेतवा नदी किनारे बंदरगुढ़ा में पहाड़ी पर करीब डेढ़ सौ फीट ऊंचाई पर स्थापित जाखलौन पंप केनाल के संचालन से लगभग 34 किलोमीटर लंबी नहर से करीब 100 गांवों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। समय से बिजली नहीं मिल पाने की वजह से जेपीसी का संचालन रोस्टर के अनुसार नहीं हो पा रहा था। अब सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित होने से नहर का संचालन सही तरीके से होने लगेगा।
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सिंचाई विभाग के अनुसार नहर संचालन के लिए यहां पांच पंप स्थापित हैं। लेकिन आए दिन बिजली वोल्टेज या फिर बिजली की कमी के कारण सभी पांच पंपों का संचालन नियमित नहीं हो पाता है। इससे नहर कई बार पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं हो पाती है और नहर का पानी कई बार टेल वाले गांवों तक नहीं पहुंच पाता है। इसके चलते सिंचाई विभाग द्वारा शासन की योजना के तहत नहर चलने योग्य कम क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करना प्रस्तावित किया गया, ताकि जाखलौन पंप केनाल के सुचारु संचालन में बिजली की बाधा उत्पन्न न हो सके। साथ ही किसानों को समय से सिंचाई के लिए केनाल का पानी उपलब्ध कराया जा सके।
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प्रत्येक वर्ष एक करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा
सिंचाई विभाग निर्माण खंड द्वितीय द्वारा जाखलौन पंप केनाल पर सोलर ऊर्जा प्लांट की स्थापना के लिए यहां 3.42 मेगावाट और 2.50 मेगावाट क्षमता की दो यूनिटें बनाई जा रही हैं। 2.50 मेगावाट की यूनिट का कार्य पूर्ण हो चुका है और 3.42 मेगावाट की यूनिट का काम मात्र दस प्रतिशत बचा है। सिंचाई विभाग की अधिकारियों की मानें तो अक्तूबर माह में इसका कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा। 5.92 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट बनाने में 29.64 करोड़ रुपये की लागत आई है। इससे प्रत्येक वर्ष एक करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। वर्ष 2016 में 27.08 करोड़ रुपये की परियोजना की स्वीकृति मिली थी लेकिन नहर पर स्थापित मॉडल और डिजाइन में मामूली बदलाव किया गया और काम में देरी होने की वजह से पूर्व में स्वीकृत लागत 27.08 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2019 में 29.64 करोड़ रुपये हो गई।
केनाल के ऊपर लगाया गया है प्लांट
यह प्लांट नहर के ऊपर स्थापित किया गया है। इसमें नहर से पानी भी बहता रहेगा और नहर के ऊपर बने ढांचे पर सोलर प्लांट की प्लेटों से सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होता रहेगा। प्लांट नहर पर करीब ढाई किलोमीटर क्षेत्र में स्थापित किया गया है। इसकी स्थापना सिंचाई विभाग निर्माण खंड द्वितीय के अधिकारियों की देखरेख में किया जा रहा है।
सोलर प्लांट शुरू होने पर ग्रिड में जोड़ा जाएगा। विद्युत उत्पादन का तो लेखाजोखा हमारे पास रहेगा लेकिन सिंचाई विभाग को उससे कोई मतलब नहीं होगा कि हमारे पास कितनी बिजली की बचत हो रही है या नहीं। अभी तक मेरे पास इससे संबंधित शासन स्तर से कोई जानकारी नहीं है।
आकाश सचान, अधिशासी अभियंता विद्युत, ग्रामीण
रबी की फसल के लिए नवंबर से मार्च तक करीब साढ़े चार महीने जाखलौन पंप कैनाल का संचालन किया जाता है इस वर्ष 17,300 हेक्टेयर भूमि सिंचित करने का लक्ष्य है। खरीफ की फसल के लिए बेतवा रिवर बोर्ड से पानी नहीं मिलता है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पानी के बंटवारे में केवल रबी की फसल के लिए ही पानी की उपलब्धता है।
भागीरथ, अधिशासी अभियंता सिंचाई, निर्माण खंड प्रथम
अक्तूबर माह तक सोलर प्लांट चालू कर दिया जाएगा। बिजली विभाग से बर्ष 2018 में बैंकिंग अनुबंध हुआ था लेकिन बर्ष 2019 रेगुलेशन में बदलाव किया गया है जिसके तहत बैंकिंग अनुबंध की कार्यवाही चल रही है।
राजीव कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड द्वितीय