{"_id":"58792ef24f1c1b8327ba9dbb","slug":"school-contruction","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्था के खिलाफ कार्रवाई से कतरा रहे अफसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्था के खिलाफ कार्रवाई से कतरा रहे अफसर
lalitpur
Updated Sat, 14 Jan 2017 01:18 AM IST
विज्ञापन
निरमाण्ा
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजकीय हाईस्कूलों के निर्माण का जिम्मा संभाल रही पैक्सफेड संस्था के खिलाफ विधिक कार्रवाई के निर्देश हवाहवाई साबित हो रहे हैं। वर्तमान में संस्था को अवशेष कार्य पूरा करने के लिए एक और अवसर प्रदान कर दिया गया है, जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
वर्ष 2010-11 में पैक्सफेड संस्था को दस विद्यालयों के निर्माण का जिम्मा दिया गया था। इसमें से संस्था अभी तक आठ विद्यालय ही हैंडओवर करा सकी है। वर्तमान में राजकीय हाईस्कूल धौरीसागर व पठा के भवनों का काम पूरा नहीं हो सका है। बीते माहों में मुख्य विकास अधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने गठित टास्क फोर्स को भवनों के निर्माण का निरीक्षण करने के लिए कहा था। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक डा. आरपी वर्मा ने भी स्वयं निरीक्षण किया था। इस दौरान दोनों के भवनों में अनेक कमियां पाई गई। जिस पर सीडीओ ने तीन दिन में कमियों को पूरा करने के निर्देश दिए थे। अन्यथा की स्थिति में कार्यसंस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को कहा था। यही नहीं, विद्यालय की कुल लागत 51.98 लाख रुपये की पांच प्रतिशत राशि में कटौती करने के निर्देशित किया गया था। जिस पर संस्था के सहायक अभियंता ने माह नवंबर 16 के अंत तक का समय मांगा।
संस्था ने समय लेने के बाद भी अवशेष कार्य पूरा नहीं कराया। सीडीओ के निर्देश पर 18 नवंबर को जिला विकास अधिकारी और डीआरडीए के सहायक अभियंता ने विद्यालयों का निरीक्षण किया। इसमें हॉल की एक दीवाल पर क्रेक्स व निर्माण की गुणवत्ता की कमी पाई गई। इस पर डीएम डा. रूपेश कुमार ने उचित कार्रवाई करने का अनुमोदन कर दिया। कार्यदायी संस्था ने भवनों की कमियों को नजरअंदाज करते हुए तीन दिसंबर को दोनों विद्यालयों के हैंडओवर के लिए डीआईओएस कार्यालय में इन्वेंट्री प्रस्तुत कर दी। इस दौरान संस्था ने अपूर्ण कार्यों व कमियों का उल्लेख नहीं किया। आठ दिसंबर को टास्क फोर्स ने दोबारा भवनों का निरीक्षण किया। इस दौरान भी राजकीय हाईस्कूल पठा के भवन में सात व धौरीसागर स्कूल भवन में चार कमियां पाई गई। खिड़कियों व रोशनदान खाली पड़े हैं। वहीं, विद्यालयों में श्यामपट भी नहीं पाए गए। दो जनवरी को डीएम डा. रूपेश कुमार ने कार्यदायी संस्था को कमियां पूर्ण करने के लिए एक और मौका प्रदान कर दिया, साथ ही कहा कि भवनों की कमियों का निराकरण नहीं होने पर संस्था के अभियंताओं के विरुद्ध विधिक कार्रवाई कराई जाए। जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक डा. आरपी वर्मा ने संस्था को सात दिन का समय दे दिया। हालत यह है कि डीआईओएस द्वारा दी गई समय सीमा पूरी हो गई लेकिन संस्था के खिलाफ एफआईआर नहीं हो सकी।
विज्ञापन
अल्टीमेटम का नहीं होता असर
पैक्सफेड संस्था को भवनों का निर्माण कार्य कराते हुए छह वर्ष पूरे हो गए हैं। इस दौरान संस्था को कई मर्तबा अल्टीमेटम दिए गए। तत्कालीन डीएम ओपी वर्मा ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अभियान के डायरेक्टर को संस्था से वसूली कराने का पत्र लिखा था। मंडलायुक्त झांसी के राममोहन राव ने समीक्षा बैठक में अनेकों बार नाराजी जाहिर करते हुए कार्य पूर्ण कराने को कहा। बीते माह सीडीओ ने तेवर दिखाते हुए संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की पूरी तैयार कर ली। डीआईओएस को कार्रवाई के लिए निर्देश किया। इसके बाद भी कार्रवाई अंजाम तक नहीं पहुंच सकी।
सीएमओ कार्यालय भी नहीं हुआ हैंडओवर
पैक्सपैड संस्था द्वारा हीलाहवाली केवल स्कूलों के निर्माण में ही नहीं, बल्कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी भवन के निर्माण कार्य में भी बरती गई है। वर्ष 2011 में करीब साढ़ेे 15 करोड़ रुपये की लागत से सीएमओ कार्यालय का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। जहां पैक्सपैड निर्माण कार्य को पूर्ण बता रहा है, वहीं चिकित्सा विभाग द्वारा निर्माणाधीन मकान में तमाम कमियां बताईं जा रही है। चिकित्सा विभाग का कहना है, कि सीएमओ कार्यालय में कई जरुरी काम अधूरे पड़े हुए हैं। अधूरे भवन को हैंडओवर करने का कोई औचित्य नहीं है। नए सीएमओ कार्यालय का काम डेढ़ साल से संस्था पूर्ण बता रही है और चिकित्सा विभाग अधूरा। इस फेर में करोड़ों की कीमत का भवन धूल खा रहा है।
विज्ञापन
वर्ष 2010-11 में पैक्सफेड संस्था को दस विद्यालयों के निर्माण का जिम्मा दिया गया था। इसमें से संस्था अभी तक आठ विद्यालय ही हैंडओवर करा सकी है। वर्तमान में राजकीय हाईस्कूल धौरीसागर व पठा के भवनों का काम पूरा नहीं हो सका है। बीते माहों में मुख्य विकास अधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने गठित टास्क फोर्स को भवनों के निर्माण का निरीक्षण करने के लिए कहा था। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक डा. आरपी वर्मा ने भी स्वयं निरीक्षण किया था। इस दौरान दोनों के भवनों में अनेक कमियां पाई गई। जिस पर सीडीओ ने तीन दिन में कमियों को पूरा करने के निर्देश दिए थे। अन्यथा की स्थिति में कार्यसंस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को कहा था। यही नहीं, विद्यालय की कुल लागत 51.98 लाख रुपये की पांच प्रतिशत राशि में कटौती करने के निर्देशित किया गया था। जिस पर संस्था के सहायक अभियंता ने माह नवंबर 16 के अंत तक का समय मांगा।
विज्ञापन
संस्था ने समय लेने के बाद भी अवशेष कार्य पूरा नहीं कराया। सीडीओ के निर्देश पर 18 नवंबर को जिला विकास अधिकारी और डीआरडीए के सहायक अभियंता ने विद्यालयों का निरीक्षण किया। इसमें हॉल की एक दीवाल पर क्रेक्स व निर्माण की गुणवत्ता की कमी पाई गई। इस पर डीएम डा. रूपेश कुमार ने उचित कार्रवाई करने का अनुमोदन कर दिया। कार्यदायी संस्था ने भवनों की कमियों को नजरअंदाज करते हुए तीन दिसंबर को दोनों विद्यालयों के हैंडओवर के लिए डीआईओएस कार्यालय में इन्वेंट्री प्रस्तुत कर दी। इस दौरान संस्था ने अपूर्ण कार्यों व कमियों का उल्लेख नहीं किया। आठ दिसंबर को टास्क फोर्स ने दोबारा भवनों का निरीक्षण किया। इस दौरान भी राजकीय हाईस्कूल पठा के भवन में सात व धौरीसागर स्कूल भवन में चार कमियां पाई गई। खिड़कियों व रोशनदान खाली पड़े हैं। वहीं, विद्यालयों में श्यामपट भी नहीं पाए गए। दो जनवरी को डीएम डा. रूपेश कुमार ने कार्यदायी संस्था को कमियां पूर्ण करने के लिए एक और मौका प्रदान कर दिया, साथ ही कहा कि भवनों की कमियों का निराकरण नहीं होने पर संस्था के अभियंताओं के विरुद्ध विधिक कार्रवाई कराई जाए। जिस पर जिला विद्यालय निरीक्षक डा. आरपी वर्मा ने संस्था को सात दिन का समय दे दिया। हालत यह है कि डीआईओएस द्वारा दी गई समय सीमा पूरी हो गई लेकिन संस्था के खिलाफ एफआईआर नहीं हो सकी।
विज्ञापन
अल्टीमेटम का नहीं होता असर
पैक्सफेड संस्था को भवनों का निर्माण कार्य कराते हुए छह वर्ष पूरे हो गए हैं। इस दौरान संस्था को कई मर्तबा अल्टीमेटम दिए गए। तत्कालीन डीएम ओपी वर्मा ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अभियान के डायरेक्टर को संस्था से वसूली कराने का पत्र लिखा था। मंडलायुक्त झांसी के राममोहन राव ने समीक्षा बैठक में अनेकों बार नाराजी जाहिर करते हुए कार्य पूर्ण कराने को कहा। बीते माह सीडीओ ने तेवर दिखाते हुए संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की पूरी तैयार कर ली। डीआईओएस को कार्रवाई के लिए निर्देश किया। इसके बाद भी कार्रवाई अंजाम तक नहीं पहुंच सकी।
सीएमओ कार्यालय भी नहीं हुआ हैंडओवर
पैक्सपैड संस्था द्वारा हीलाहवाली केवल स्कूलों के निर्माण में ही नहीं, बल्कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी भवन के निर्माण कार्य में भी बरती गई है। वर्ष 2011 में करीब साढ़ेे 15 करोड़ रुपये की लागत से सीएमओ कार्यालय का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। जहां पैक्सपैड निर्माण कार्य को पूर्ण बता रहा है, वहीं चिकित्सा विभाग द्वारा निर्माणाधीन मकान में तमाम कमियां बताईं जा रही है। चिकित्सा विभाग का कहना है, कि सीएमओ कार्यालय में कई जरुरी काम अधूरे पड़े हुए हैं। अधूरे भवन को हैंडओवर करने का कोई औचित्य नहीं है। नए सीएमओ कार्यालय का काम डेढ़ साल से संस्था पूर्ण बता रही है और चिकित्सा विभाग अधूरा। इस फेर में करोड़ों की कीमत का भवन धूल खा रहा है।