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धार्मिक अनुष्ठानों का निश्चित ही मिलता है फल: आर्यिका प्रशममति माता
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संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट। आर्यिका प्रशममति माता ने कहा कि विश्व शांति की भावना से आत्म कल्याण के लिए किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का फल निश्चित ही मिलता है। व्यक्ति जीवन में जो कमाता है, उतना कभी नहीं भोग सकता और बच्चों के लिए छोड़कर चला जाता है, लेकिन जो साथ में जाता है उस पर किसी का ध्यान नहीं है।
अच्छे कर्म और पुण्य ही इंसान के साथ जाते हैं, उसने कितना कमाया और उसका कितना संचय किया ये महत्वपूर्ण है। वह पवागिरि में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान 1024 अर्घ्य की पूर्णाहुति के साथ विधान संपन्न हुआ।
शुक्रवार सुबह नित्यमय, अभिषेक शांतिधारा के बाद अतिशय युक्त चमत्कारी बाबा मूलनायक पारसनाथ स्वामी का महामस्तिकाभिषेक किया गया। इसके बाद दोपहर में भक्ति भाव से 1024 अर्घ्य समर्पित किए गए। विमानोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकली, जिसमें श्रीजी को विमान में लेकर श्रद्धालु, धर्म ध्वजा लेकर श्रावक श्रेष्ठी, मंगल गीत गाती हुईं महिलाएं, सत्य-अहिंसा के नारे व जयकारे लगाते पुरुष एवं नृत्य करते हुए युवा चल रहे थे। क्षेत्र परिक्रमा कर विमान वापस मंदिर पहुंचा, जहां कलशाभिषेक एवं फूलमाल का आयोजन किया गया। रात में मंगल आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
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तालबेहट। आर्यिका प्रशममति माता ने कहा कि विश्व शांति की भावना से आत्म कल्याण के लिए किए गए धार्मिक अनुष्ठानों का फल निश्चित ही मिलता है। व्यक्ति जीवन में जो कमाता है, उतना कभी नहीं भोग सकता और बच्चों के लिए छोड़कर चला जाता है, लेकिन जो साथ में जाता है उस पर किसी का ध्यान नहीं है।
अच्छे कर्म और पुण्य ही इंसान के साथ जाते हैं, उसने कितना कमाया और उसका कितना संचय किया ये महत्वपूर्ण है। वह पवागिरि में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान 1024 अर्घ्य की पूर्णाहुति के साथ विधान संपन्न हुआ।
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शुक्रवार सुबह नित्यमय, अभिषेक शांतिधारा के बाद अतिशय युक्त चमत्कारी बाबा मूलनायक पारसनाथ स्वामी का महामस्तिकाभिषेक किया गया। इसके बाद दोपहर में भक्ति भाव से 1024 अर्घ्य समर्पित किए गए। विमानोत्सव कार्यक्रम के तहत श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकली, जिसमें श्रीजी को विमान में लेकर श्रद्धालु, धर्म ध्वजा लेकर श्रावक श्रेष्ठी, मंगल गीत गाती हुईं महिलाएं, सत्य-अहिंसा के नारे व जयकारे लगाते पुरुष एवं नृत्य करते हुए युवा चल रहे थे। क्षेत्र परिक्रमा कर विमान वापस मंदिर पहुंचा, जहां कलशाभिषेक एवं फूलमाल का आयोजन किया गया। रात में मंगल आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
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