{"_id":"5e5ffda48ebc3ec78a751421","slug":"rakh-panchampur-fair-lalitpur-news-jhs1617387146","type":"story","status":"publish","title_hn":"होली की रंग पंचमी के लिए विख्यात है राख पंचमपुर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
होली की रंग पंचमी के लिए विख्यात है राख पंचमपुर
विज्ञापन
राखपंचमपुर मंदिर में स्थित सिद्वबाबा
- फोटो : LALITPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। होली पर्व की पंचमी पर ब्लाक जखौरा के ग्राम राख पंचमपुर में मेला लगता है। यहां का मेला बुंदेलखंड सहित आसपास के जिलों में प्रसिद्ध है। मेला में करीब दो लाख श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं। यह मेला सिद्ध बाबा के चमत्कारों के लिए भी जाना जाता है। सिद्ध बाबा मंदिर की राख फोड़ा व फुंसी ठीक करती है। लोगों का मत है कि यहां कई असाध्य रोग वाले मरीजों को आराम मिल जाता है।
होली को उत्साह से मनाया जाता है। होली की पंचमी पर लगने वाले राख पंचमपुर मेला की प्रसिद्धि निरंतर बढ़ती ही जा रही है। इसे वार्षिक कैलेंडर में स्थान दिया जाता है। सिद्घ बाबा का मंदिर आस्था का केंद्र बनता जा रहा है। यहां फोड़ा और फुंसी से लेकर लाइलाज बीमारी मात्र बाबी की राख (भस्म) से ठीक होती है। बाबा के चमत्कार ग्रामवासियों के मुंह से सुने जा सकते हैं। लोगों का कहना है कि जब चिकित्सक उपचार करने से मनाही कर देता है तो सिद्घबाबा ऐसे मरीजों की मदद करते हैं। सिद्घ बाबा का नाम लेकर जो भी व्यक्ति शरीर में राख का लेपन करता है, उससे राहत मिलना शुरू हो जाती है। जिन लोगों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वे यहां प्रसाद चढ़ाते हैं।
मेला मिट्टी के बर्तनों के लिए भी प्रसिद्ध है। ग्राम राख पंचमपुर का मेला गर्मी के ठीक पहले आयोजित होता है, इससे यहां मिट्टी के बर्तनों की मांग रहती है। इसे ध्यान में रखकर दुकानदार बड़ी संख्या में मिट्टी के बर्तन बिक्री के लिए लाते हैं।
विज्ञापन
ये है कार्यक्रम
13 मार्च को मेला का उदघाटन जिलाधिकारी करेंगे। 14 मार्च को गांव में विमानों की शोभायात्रा निकलेगी। 15,16 व 17 मार्च को मेला लगेगा। 17 को मेले का समापन हो जाएगा। मेला के दौरान स्टाफ व श्रद्घालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी होता है।
35 साल से सिद्ध बाबा की सेवा में लगे हैं। यहां आने वाले श्रद्घालु अपनी समस्या बताते हैं तो वह उसके शरीर पर राख का लेपन कर देते हैं। इससे ही लोगों को आराम मिल जाता है। यहां दाद, खाज, फोड़ा व फुंसी ठीक हो जाते हैं। कई असाध्य रोगियों को भी आराम मिला है। बाबा दुखी को सुखी करते हैं।
- शिवलाल पंडा
नाती को फोड़ा हो गया था। चिकित्सक ने उसके लिए आपरेशन कराने के लिए कह दिया था। लगातार पांच दिन बाबा के दरबार में आए और विनती की। इसके बाद फोड़ा के आपरेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ी। एक रिश्तेदार को बबासीर की शिकायत हो गई थी, वह भी दूर हो गई।
- दयाराम झां
पहले पिताजी सिद्ध दरबार में सेवा करते थे। अब उनकी जगह एक साल से हम सिद्घ बाबा के दरबार में सेवा कर रहे हैं। जो भी श्रद्घालु प्रसाद चढ़ाने के लिए आता है, वह उनका प्रसाद सिद्घ बाबा के दरबार में चढ़ाते हैं।
- रामअवतार
पहले पेट दर्द होता है, लेकिन जिस दिन बाबा के दरबार में आए, उस दिन के बाद से पेट में दर्द नहीं हुआ। मनोकामना पूरी होने पर यहां अखंड रामायण का आयोजन कराया है।
- लल्लू राजा
नौ साल से मंदिर में पूजा करते चले आ रहे हैं। रंग पंचमी के दिन अधिकांश ट्रेनें यहां रुकती हैं। इस दिन श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ती है। भीड़ में सिद्घ बाबा के दर्शन करना मुश्किल हो जाता है। बाबा की महिमा अपरंपार है।
- वीरेंद्र सिंह पंडा
मेला के दौरान गांव में विमान की शोभायात्रा निकाली जाती है, जो भ्रमण करती हुई मेला स्थल पर पहुंचती है। यहां पंचमी तक भगवान विश्राम करते हैं। मेला समापन पर भगवान वापस मंदिर पहुंचते हैं। वह खुद भगवान भोले के स्वरूप में शोभायात्रा में शामिल होते हैं।
- किशोरी लाल
मेला के दिन गैर जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्घालु आते हैं। इसमें तमाम वे लोग होते हैं, जिनकी मनोकामना पूरी हो गई है और कई अपनी समस्या लेकर बाबा के दरबार में पहुंचते हैं। जो सच्चे मन से दरबार में आता है, उनकी बाबा जरूर सुनते हैं।
- इंदल पंडा
मेला स्थल पर दुकानदारों को स्थान मुहैया कराने के लिए ऊबड़-खाबड़ जमीन का समतलीकरण कराया जा रहा है। जिला प्रशासन भी मेला तैयारियों पर नजर रखे हुए है। सुरक्षा के मद्देनजर मेला में पुलिस भी तैनात रहती है।
- लाखन सिंह, ग्राम प्रधान
ग्राम राख पंचमपुर में मेला स्थल पर सुविधाओं का विस्तार होता जा रहा है। यहां अतिथिगृह व छांव के लिए कई शेडों का निर्माण हो गया है। इसके अलावा पानी की भी सुविधा हो गई है।
- देवेंद्र शर्मा
विज्ञापन
होली को उत्साह से मनाया जाता है। होली की पंचमी पर लगने वाले राख पंचमपुर मेला की प्रसिद्धि निरंतर बढ़ती ही जा रही है। इसे वार्षिक कैलेंडर में स्थान दिया जाता है। सिद्घ बाबा का मंदिर आस्था का केंद्र बनता जा रहा है। यहां फोड़ा और फुंसी से लेकर लाइलाज बीमारी मात्र बाबी की राख (भस्म) से ठीक होती है। बाबा के चमत्कार ग्रामवासियों के मुंह से सुने जा सकते हैं। लोगों का कहना है कि जब चिकित्सक उपचार करने से मनाही कर देता है तो सिद्घबाबा ऐसे मरीजों की मदद करते हैं। सिद्घ बाबा का नाम लेकर जो भी व्यक्ति शरीर में राख का लेपन करता है, उससे राहत मिलना शुरू हो जाती है। जिन लोगों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वे यहां प्रसाद चढ़ाते हैं।
विज्ञापन
मेला मिट्टी के बर्तनों के लिए भी प्रसिद्ध है। ग्राम राख पंचमपुर का मेला गर्मी के ठीक पहले आयोजित होता है, इससे यहां मिट्टी के बर्तनों की मांग रहती है। इसे ध्यान में रखकर दुकानदार बड़ी संख्या में मिट्टी के बर्तन बिक्री के लिए लाते हैं।
विज्ञापन
ये है कार्यक्रम
13 मार्च को मेला का उदघाटन जिलाधिकारी करेंगे। 14 मार्च को गांव में विमानों की शोभायात्रा निकलेगी। 15,16 व 17 मार्च को मेला लगेगा। 17 को मेले का समापन हो जाएगा। मेला के दौरान स्टाफ व श्रद्घालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी होता है।
35 साल से सिद्ध बाबा की सेवा में लगे हैं। यहां आने वाले श्रद्घालु अपनी समस्या बताते हैं तो वह उसके शरीर पर राख का लेपन कर देते हैं। इससे ही लोगों को आराम मिल जाता है। यहां दाद, खाज, फोड़ा व फुंसी ठीक हो जाते हैं। कई असाध्य रोगियों को भी आराम मिला है। बाबा दुखी को सुखी करते हैं।
- शिवलाल पंडा
नाती को फोड़ा हो गया था। चिकित्सक ने उसके लिए आपरेशन कराने के लिए कह दिया था। लगातार पांच दिन बाबा के दरबार में आए और विनती की। इसके बाद फोड़ा के आपरेशन कराने की जरूरत नहीं पड़ी। एक रिश्तेदार को बबासीर की शिकायत हो गई थी, वह भी दूर हो गई।
- दयाराम झां
पहले पिताजी सिद्ध दरबार में सेवा करते थे। अब उनकी जगह एक साल से हम सिद्घ बाबा के दरबार में सेवा कर रहे हैं। जो भी श्रद्घालु प्रसाद चढ़ाने के लिए आता है, वह उनका प्रसाद सिद्घ बाबा के दरबार में चढ़ाते हैं।
- रामअवतार
पहले पेट दर्द होता है, लेकिन जिस दिन बाबा के दरबार में आए, उस दिन के बाद से पेट में दर्द नहीं हुआ। मनोकामना पूरी होने पर यहां अखंड रामायण का आयोजन कराया है।
- लल्लू राजा
नौ साल से मंदिर में पूजा करते चले आ रहे हैं। रंग पंचमी के दिन अधिकांश ट्रेनें यहां रुकती हैं। इस दिन श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ती है। भीड़ में सिद्घ बाबा के दर्शन करना मुश्किल हो जाता है। बाबा की महिमा अपरंपार है।
- वीरेंद्र सिंह पंडा
मेला के दौरान गांव में विमान की शोभायात्रा निकाली जाती है, जो भ्रमण करती हुई मेला स्थल पर पहुंचती है। यहां पंचमी तक भगवान विश्राम करते हैं। मेला समापन पर भगवान वापस मंदिर पहुंचते हैं। वह खुद भगवान भोले के स्वरूप में शोभायात्रा में शामिल होते हैं।
- किशोरी लाल
मेला के दिन गैर जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्घालु आते हैं। इसमें तमाम वे लोग होते हैं, जिनकी मनोकामना पूरी हो गई है और कई अपनी समस्या लेकर बाबा के दरबार में पहुंचते हैं। जो सच्चे मन से दरबार में आता है, उनकी बाबा जरूर सुनते हैं।
- इंदल पंडा
मेला स्थल पर दुकानदारों को स्थान मुहैया कराने के लिए ऊबड़-खाबड़ जमीन का समतलीकरण कराया जा रहा है। जिला प्रशासन भी मेला तैयारियों पर नजर रखे हुए है। सुरक्षा के मद्देनजर मेला में पुलिस भी तैनात रहती है।
- लाखन सिंह, ग्राम प्रधान
ग्राम राख पंचमपुर में मेला स्थल पर सुविधाओं का विस्तार होता जा रहा है। यहां अतिथिगृह व छांव के लिए कई शेडों का निर्माण हो गया है। इसके अलावा पानी की भी सुविधा हो गई है।
- देवेंद्र शर्मा