{"_id":"5ecbfea08ebc3e904806234d","slug":"prosess-of-migrant-workers-at-amjhara-deceased-lalitpur-news-jhs167536187","type":"story","status":"publish","title_hn":"बार्डर पर मजदूरों के आने का सिलसिला हुआ कम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बार्डर पर मजदूरों के आने का सिलसिला हुआ कम
विज्ञापन
अमझरा गोशाला में पेड़ की छांव में बैठे प्रवासी मजदूर
- फोटो : LALITPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डोंगराखुर्द। जिले के अमझरा घाटी बार्डर पर सोमवार को मजदूरों के आने का सिलसिला धीमा हो गया। पिछले एक सप्ताह से पांच से दस हजार मजदूरों की संख्या प्रतिदिन एकत्रित रहती थी, लेकिन अब यह सिलसिला थम गया है। सोमवार को बीस बसों से प्रवासियों को भिजवाया गया।
अमझरा बार्डर पर इतनी प्रवासी आ रहे थे कि गोशाला में भीड़ ही भीड़ दिखाई पड़ रही थी। लोगों को बैठने की भी जगह नहीं मिल रही थी। वह गोशाला के बाहर पेड़ों की छांव में समय बिता रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बस द्वारा भेजने के इंतजाम किए और मजदूरों की घर वापसी होने पर भीड़ के छंटने का भी सिलसिला शुरू हो गया। सोमवार को दोपहर बाद गोशाला में सन्नाटा सा पसरा रहा, जो प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात या अन्य प्रदेशों अपने घरों की ओर पैदल चल रहे थे, वह भी नहीं आए। यहां आने वाले प्रवासी मजदूरों को भीषण गर्मी और तेज धूप में खड़े होकर दिन-दिन भर बसों का इंतजार करना पड़ रहा था। इसी तरह उनका पूरा दिन निकल जाता था। जिला प्रशासन ने कड़ी मशक्कत करके रात और दिन मजदूरों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया। किसी को बसों के माध्यम से भेजा तो किसी को ट्रेनों के माध्यम से भिजवाया गया। बार्डर पर अब मजदूर कम आ रहे हैं, जो भी यहां आ रहे हैं हैं, उन्हें गोशाला में खड़ी बसों में बैठाकर अमरपुर मंडी भेजा जा रहा है, जहां से उन्हें ट्रेनों या बसों के माध्यम से गृह जनपद भेजा जा रहा है।
सोमवार को प्रवासी मजदूरों की भीड़ कम रही और उन्हें भोजन कराकर व पानी बीस बसों से भिजवाजा गया। गोशाला में अभी भी खाली बसें खड़ी हुई हैं, जैसे ही मजदूर आएंगे उन्हें तुरंत भेज दिया जाएगा।
विज्ञापन
- फूल सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी पाली।
विज्ञापन
अमझरा बार्डर पर इतनी प्रवासी आ रहे थे कि गोशाला में भीड़ ही भीड़ दिखाई पड़ रही थी। लोगों को बैठने की भी जगह नहीं मिल रही थी। वह गोशाला के बाहर पेड़ों की छांव में समय बिता रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बस द्वारा भेजने के इंतजाम किए और मजदूरों की घर वापसी होने पर भीड़ के छंटने का भी सिलसिला शुरू हो गया। सोमवार को दोपहर बाद गोशाला में सन्नाटा सा पसरा रहा, जो प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात या अन्य प्रदेशों अपने घरों की ओर पैदल चल रहे थे, वह भी नहीं आए। यहां आने वाले प्रवासी मजदूरों को भीषण गर्मी और तेज धूप में खड़े होकर दिन-दिन भर बसों का इंतजार करना पड़ रहा था। इसी तरह उनका पूरा दिन निकल जाता था। जिला प्रशासन ने कड़ी मशक्कत करके रात और दिन मजदूरों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया। किसी को बसों के माध्यम से भेजा तो किसी को ट्रेनों के माध्यम से भिजवाया गया। बार्डर पर अब मजदूर कम आ रहे हैं, जो भी यहां आ रहे हैं हैं, उन्हें गोशाला में खड़ी बसों में बैठाकर अमरपुर मंडी भेजा जा रहा है, जहां से उन्हें ट्रेनों या बसों के माध्यम से गृह जनपद भेजा जा रहा है।
विज्ञापन
सोमवार को प्रवासी मजदूरों की भीड़ कम रही और उन्हें भोजन कराकर व पानी बीस बसों से भिजवाजा गया। गोशाला में अभी भी खाली बसें खड़ी हुई हैं, जैसे ही मजदूर आएंगे उन्हें तुरंत भेज दिया जाएगा।
विज्ञापन
- फूल सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी पाली।