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अब दुकान नहीं जमीन किराए पर देगी नगर पालिका
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Oct 2016 12:45 AM IST
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nagar palika lalitpur
- फोटो : demo pic
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आर्थिक तंगी से जूझ रही नगर पालिका अब एक रुपये खर्च किए बिना ही करोड़ों रुपये की आए बढ़ाएगी। योजना के अनुसार पालिका इस बार बोली दाता को जमीन किराए पर देगी, दुकान का निर्माण स्वयं बोली दाता को कराना होगा। दुकानों की जमीन से जमा होने वाली प्रीमियम राशि से नगर पालिका अपने ठेकेदारों का भुगतान अदा कर पाएगी।
नगर पालिका विगत वित्तीय वर्ष 2015 से बजट की कमी के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रही है। विगत दो माह पूर्व नपा ने शहर में करीब एक सैकड़ों से अधिक दुकानों का निर्माण कराकर उन्हें किराए पर संचालित करने का फैसला लिया था। लेकिन बजट नहीं होने के कारण नपा अध्यक्ष सुभाष जायसवाल व अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार ने नवीन कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत विभाग इस बार बिना दुकानों के लिए रुपये खर्च न करके अपनी जमीन दुकानों के निर्माण के लिए किराए पर देगी। सर्वप्रथम स्थानीय नझाई बाजार में स्थित डा. भीमराव अंबेडकर कांप्लेक्स में बने ए, बी और सी तीनों ब्लॉकों में भूतल पर निर्मित 76 दुकानों की छत दुकानों के निर्माण के लिए किराए पर नीलाम की जाएगी। निर्मित दुकानों की तरह ही खाली जमीन की भी नीलामी खुली बैठक में की जाएगी, जिसके बाद सर्वाधिक बोली दाता से नीलामी बोली की प्रीमियम राशि जमा कराकर जमीन बोलीदाता को किराए पर दे दी जाएगी। बोली दाता को स्वयं के रुपयों से ही दुकान का निर्माण कराना होगा और विभाग से निर्धारित दुकानों का किराया प्रत्येक माह विभाग में जमा करना होगा। नगर पालिका दुकानों के निर्माण के लिए छत की सरकारी निलामी बोली तीन से पांच लाख रुपये तक निर्धारित कर सकती है।
नगर पालिका में वित्तीय समस्या शासन द्वारा विगत फरवरी माह 2015 से नगर पालिका में तैनात 222 संविदा सफाई कर्मचारियों का मानदेय 3,600 रुपए से बढ़ाकर करीब पांच गुना 17 हजार रुपए से अधिक लागू कर देने बाद से पैदा हुई है। प्रत्येक माह लाखों रुपये का अधिक बोझ बढ़ने के कारण विभाग का बजट का हिसाब गड़बड़ा गया था, इसके बाद वित्तीय वर्ष 2015 में शासन ने खर्च के सापेक्ष बजट बढ़ाने की वजह वर्ष 2014-15 के सापेक्ष सात करोड़ रुपये का बजट कम करके विभाग को केवल 15.48 करोड़ रुपये दिया था। वहीं, नगर पालिका ने विभागीय बजट कम होने के बावजूद विगत वर्ष 2015 माह जुलाई में करीब 16.38 करोड़ रुपये की लागत के निर्माण कार्यों के टेंडर एक साथ कर दिए थे, जिससे नगर पालिका का बजट का हिसाब-किताब और भी बिगड़ता चला गया। वहीं नगर पालिका बोर्ड में बजट पास होने के दौरान चल रही आपसी अनबन के कारण विभागीय वार्षिक बजट करीब दो महीने देर से पास होकर शासन को भेजा गया था, जिससे बजट स्वीकृत होने में भी लेटलतीफी हुई थी। वर्तमान में नगर पालिका को शासन से हर महीने कुल 1.49 करोड़ रुपये उपलब्ध कराया जाता है, इनमें से 1.10 करोड़ रुपये प्रत्येक माह स्थायी, संविदा व आउट सोर्सिंग सफाई कर्मचारियों, विभागीय कर्मियों व अधिकारियों को वेतन, पेंशन में खर्च कर देती है, करीब दस लाख रुपये सफाई-वाहन आदि पर व्यय हो जाता है, जिसमें से नगर पालिका के पास शहर के विकास कार्यों के लिए केवल तीस लाख रुपए ही शेष बचा पाती है, जिसका उपयोग विभाग ठेकेदारों के भुगतान अदा करने में जुटी है।
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नगर पालिका विगत वित्तीय वर्ष 2015 से बजट की कमी के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रही है। विगत दो माह पूर्व नपा ने शहर में करीब एक सैकड़ों से अधिक दुकानों का निर्माण कराकर उन्हें किराए पर संचालित करने का फैसला लिया था। लेकिन बजट नहीं होने के कारण नपा अध्यक्ष सुभाष जायसवाल व अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार ने नवीन कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत विभाग इस बार बिना दुकानों के लिए रुपये खर्च न करके अपनी जमीन दुकानों के निर्माण के लिए किराए पर देगी। सर्वप्रथम स्थानीय नझाई बाजार में स्थित डा. भीमराव अंबेडकर कांप्लेक्स में बने ए, बी और सी तीनों ब्लॉकों में भूतल पर निर्मित 76 दुकानों की छत दुकानों के निर्माण के लिए किराए पर नीलाम की जाएगी। निर्मित दुकानों की तरह ही खाली जमीन की भी नीलामी खुली बैठक में की जाएगी, जिसके बाद सर्वाधिक बोली दाता से नीलामी बोली की प्रीमियम राशि जमा कराकर जमीन बोलीदाता को किराए पर दे दी जाएगी। बोली दाता को स्वयं के रुपयों से ही दुकान का निर्माण कराना होगा और विभाग से निर्धारित दुकानों का किराया प्रत्येक माह विभाग में जमा करना होगा। नगर पालिका दुकानों के निर्माण के लिए छत की सरकारी निलामी बोली तीन से पांच लाख रुपये तक निर्धारित कर सकती है।
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नगर पालिका में वित्तीय समस्या शासन द्वारा विगत फरवरी माह 2015 से नगर पालिका में तैनात 222 संविदा सफाई कर्मचारियों का मानदेय 3,600 रुपए से बढ़ाकर करीब पांच गुना 17 हजार रुपए से अधिक लागू कर देने बाद से पैदा हुई है। प्रत्येक माह लाखों रुपये का अधिक बोझ बढ़ने के कारण विभाग का बजट का हिसाब गड़बड़ा गया था, इसके बाद वित्तीय वर्ष 2015 में शासन ने खर्च के सापेक्ष बजट बढ़ाने की वजह वर्ष 2014-15 के सापेक्ष सात करोड़ रुपये का बजट कम करके विभाग को केवल 15.48 करोड़ रुपये दिया था। वहीं, नगर पालिका ने विभागीय बजट कम होने के बावजूद विगत वर्ष 2015 माह जुलाई में करीब 16.38 करोड़ रुपये की लागत के निर्माण कार्यों के टेंडर एक साथ कर दिए थे, जिससे नगर पालिका का बजट का हिसाब-किताब और भी बिगड़ता चला गया। वहीं नगर पालिका बोर्ड में बजट पास होने के दौरान चल रही आपसी अनबन के कारण विभागीय वार्षिक बजट करीब दो महीने देर से पास होकर शासन को भेजा गया था, जिससे बजट स्वीकृत होने में भी लेटलतीफी हुई थी। वर्तमान में नगर पालिका को शासन से हर महीने कुल 1.49 करोड़ रुपये उपलब्ध कराया जाता है, इनमें से 1.10 करोड़ रुपये प्रत्येक माह स्थायी, संविदा व आउट सोर्सिंग सफाई कर्मचारियों, विभागीय कर्मियों व अधिकारियों को वेतन, पेंशन में खर्च कर देती है, करीब दस लाख रुपये सफाई-वाहन आदि पर व्यय हो जाता है, जिसमें से नगर पालिका के पास शहर के विकास कार्यों के लिए केवल तीस लाख रुपए ही शेष बचा पाती है, जिसका उपयोग विभाग ठेकेदारों के भुगतान अदा करने में जुटी है।
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