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देखरेख के अभाव में खंड़हर हो रहे विंध्याचल पर्वत की पहाड़ियों पर स्थित प्राचीन मंदिर
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दूधई में शिव मंदिर व वराह अवतार की मूर्ति
- फोटो : LALITPUR
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डोंगराखुर्द (ललितपुर)। जिला प्रशासन व पर्यटन विभाग की लापरवाही की वजह से पाली क्षेत्र में विंध्याचल पर्वत की पहाड़ियों पर स्थित प्राचीन मंदिर रख-रखाव के अभाव खंडहर होते जा रहे हैं। आलम यह है कि बरसात के मौसम में इस स्थान पर जाने के रास्ते बंद होने से आवागमन बाधित हो जाता है।
पाली तहसील क्षेत्र से होते हुए कनपुरा घाटी से पांच किलोमीटर दूर स्थित दूधई विंध्याचल पर्वत पर प्राचीन शिव मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी के किनारे से कच्चे कंकरीले पत्थर वाले रास्ते से होते हुए जाना पडता है। पूर्व दिशा में आकर्षक नक्काशी युक्त पत्थरों से बना सूर्य मंदिर, पश्चिम दिशा में शिव मंदिर, उत्तर दिशा में चबूतरे पर रखी वराह अवतार की मूर्ति की कारीगरी देखते ही बनती है,
लेकिन पश्चिम दिशा में अनेक मंदिर क्षतिग्रस्त होते जा रहे हैं। जबकि दक्षिण दिशा में सूर्य और शिव मंदिर पत्थरों से बने हैं। पत्थरों की कारीगरी ऐसी है कि आंधी हो या तूफान एक भी पत्थर गिर नहीं सकता। मंदिरों के पीछे एक बड़ा तालाब बना हुआ है। तालाब के पीछे पश्चिमी किनारे पर अनेक चौपाले कुएं हैं, जिनमें तालाब का पानी झिरकर आता है जिस कारण से यहां के चौपरे हमेशा स्वच्छ जल से भरे रहते हैं। यहां चौंसठ योगिनी मंदिर भी है, जो ऊंचाई पर स्थित है। प्राचीन क्षेत्र की प्रगति पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण रुकी हुई है यहां जिले के प्रसिद्ध मंदिर है। प्राचीन मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो रही हैं इनका संरक्षण पुरातत्व विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है।
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सड़क, बिजली-पानी का नहीं इंतजाम, लाखों खर्च कर बना रेस्ट हाउस बंद पड़ा
सूर्य, शिव व जैन मंदिर तक पहुंचने के लिए रास्ता कंकरीला पथरीला पगडंडी के रूप में बना हुआ है। अच्छा रास्ता न होने की वजह से पर्यटकों को यहां जाने के लिए अच्छी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों के लिए यहां बिजली और पानी तक की व्यवस्था नहीं है। यहां बनाए गए रेस्टोरेंट का भी उपयोग नहीं हो रहा।
वहीं, पर्यटकों के लिए करीब 18 वर्ष पहले दूधई में लाखों की लागत से रेस्ट हाउस बना था जो कुछ दिनों तक ठीक चला लेकिन वर्तमान में पूरी तरह से बंद पड़ा है। रख-रखाव के अभाव अब यह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। प्रशासन द्वारा प्रचार सामग्री तो लगा दी लेकिन हकीकत धरातल पर कुछ नहीं है।
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जिले सभी पर्यटन स्थलों की स्थिति बहुत खराब है पुरातत्व विभाग द्वारा जगह जगह बोर्ड तो लगवा दिए लेकिन धरातल पर शून्य है। भरत सिंह, अधिवक्ता
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दूधई मंदिर बहुत प्राचीन काल समय के है यहां भगवान श्रीकृष्ण का नाता रहा है कई कलाओं की नक्काशी से मंदिर बने हैं लेकिन रख-रखाव के अभाव खंडहर होते जा रहे हैं। महेंद्र पटैरिया
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पाली तहसील क्षेत्र से होते हुए कनपुरा घाटी से पांच किलोमीटर दूर स्थित दूधई विंध्याचल पर्वत पर प्राचीन शिव मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी के किनारे से कच्चे कंकरीले पत्थर वाले रास्ते से होते हुए जाना पडता है। पूर्व दिशा में आकर्षक नक्काशी युक्त पत्थरों से बना सूर्य मंदिर, पश्चिम दिशा में शिव मंदिर, उत्तर दिशा में चबूतरे पर रखी वराह अवतार की मूर्ति की कारीगरी देखते ही बनती है,
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लेकिन पश्चिम दिशा में अनेक मंदिर क्षतिग्रस्त होते जा रहे हैं। जबकि दक्षिण दिशा में सूर्य और शिव मंदिर पत्थरों से बने हैं। पत्थरों की कारीगरी ऐसी है कि आंधी हो या तूफान एक भी पत्थर गिर नहीं सकता। मंदिरों के पीछे एक बड़ा तालाब बना हुआ है। तालाब के पीछे पश्चिमी किनारे पर अनेक चौपाले कुएं हैं, जिनमें तालाब का पानी झिरकर आता है जिस कारण से यहां के चौपरे हमेशा स्वच्छ जल से भरे रहते हैं। यहां चौंसठ योगिनी मंदिर भी है, जो ऊंचाई पर स्थित है। प्राचीन क्षेत्र की प्रगति पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण रुकी हुई है यहां जिले के प्रसिद्ध मंदिर है। प्राचीन मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो रही हैं इनका संरक्षण पुरातत्व विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है।
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सड़क, बिजली-पानी का नहीं इंतजाम, लाखों खर्च कर बना रेस्ट हाउस बंद पड़ा
सूर्य, शिव व जैन मंदिर तक पहुंचने के लिए रास्ता कंकरीला पथरीला पगडंडी के रूप में बना हुआ है। अच्छा रास्ता न होने की वजह से पर्यटकों को यहां जाने के लिए अच्छी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोगों के लिए यहां बिजली और पानी तक की व्यवस्था नहीं है। यहां बनाए गए रेस्टोरेंट का भी उपयोग नहीं हो रहा।
वहीं, पर्यटकों के लिए करीब 18 वर्ष पहले दूधई में लाखों की लागत से रेस्ट हाउस बना था जो कुछ दिनों तक ठीक चला लेकिन वर्तमान में पूरी तरह से बंद पड़ा है। रख-रखाव के अभाव अब यह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। प्रशासन द्वारा प्रचार सामग्री तो लगा दी लेकिन हकीकत धरातल पर कुछ नहीं है।
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जिले सभी पर्यटन स्थलों की स्थिति बहुत खराब है पुरातत्व विभाग द्वारा जगह जगह बोर्ड तो लगवा दिए लेकिन धरातल पर शून्य है। भरत सिंह, अधिवक्ता
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दूधई मंदिर बहुत प्राचीन काल समय के है यहां भगवान श्रीकृष्ण का नाता रहा है कई कलाओं की नक्काशी से मंदिर बने हैं लेकिन रख-रखाव के अभाव खंडहर होते जा रहे हैं। महेंद्र पटैरिया

दूधई में शिव मंदिर- फोटो : LALITPUR

चौसठ योगिनी मंदिर र- फोटो : LALITPUR

खस्ताहाल रास्ता- फोटो : LALITPUR