{"_id":"60832d338ebc3e80d06c4032","slug":"no-budzet-for-handpump-lalitpur-news-jhs193749129","type":"story","status":"publish","title_hn":"हैंडपंपों के लिए अब तक नहीं मिला बजट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हैंडपंपों के लिए अब तक नहीं मिला बजट
विज्ञापन
handpum 1.JPG
- फोटो : handpum 1.JPG
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। जल संस्थान को गर्मी के मौसम में बजट नहीं मिल पा रहा है, विभाग को उधारी से काम चलाना पड़ रहा है। इससे हैंडपंप मरम्मत का काम गति नहीं पकड़ पा रहा है। लोगों को पीने के पानी की परेशानी हो रही है।
इस समय भगवान भास्कर की तपिश बढ़ने लगी है, जिससे भूगर्भ जलस्तर नीचे की ओर खिसक रहा है, जो हैंडपंप पहले घंटों पानी देते थे, वह अब रुक-रुक कर पानी देने लगे हैं। कई हैंडपंपों ने तो पानी देना भी छोड़ दिया है। ऐसे में खराब हैंडपंपों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है, जो विभाग के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। इसकी वजह विभाग के पास हैंडपंप मरम्मत के लिए एक धेला भी नहीं है। इस स्थिति में विभागीय अफसर उधारी में कम कीमत के सामान को जुटाकर उन हैंडपंपों की मरम्मत कर पा रहे हैं, जिनमें महंगा सामान लगाने की जरूरत नहीं है, जिन हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने की आवश्यकता है या फिर बड़ी मरम्मत होनी है, ऐसे हैंडपंपों को अपने हाल छोड़ दिया गया है, जिससे वह ठीक नहीं हो पा रहे हैं। अब स्थानीय लोगों को कई दिनों तक खराब हैंडपंप की मरम्मत होने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इससे लोगों में विभाग के प्रति रोष पनप रहा है। कई मोहल्लों में लोगों को पीने का पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है। इनमें आजादपुरा प्रथम, नेहरू नगर, पठापुरा, चौबयाना, गोविंद नगर मोहल्ला शामिल हैं। इन मोहल्लों के लोगों को उस समय ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ता था, जब पाइप लाइन की आपूर्ति धोखा दे जाती थी। अब पाइप लाइन की आपूर्ति लड़खड़ाने पर लोगों के पास पानी भरने का और कोई विकल्प सामने नहीं रह जाता है। वर्तमान में विभाग द्वारा टैंकर भी नहीं चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग उससे पानी भर सकें। पंद्रहवें वित्त आयोग से विभाग को हैंडपंप मरम्मत के लिए पैसा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक पैसा विभाग के खाते में नहीं आ पाया है। श्रमिकों का भी मोह विभाग से भंग होता जा रहा है, वह भी समय से वेतन नहीं मिलने से परेशान हैं।
-----
प्रतिदिन दस से पंद्रह खराब हैंडपंप सुधारे जा रहे हैं। जिनमें ज्यादा काम किए जाने की आवश्यकता है, उन्हें सुधारने में दिक्कत आ रही है। विभाग के पास हैंडपंप मरम्मत मद में पैसा नहीं है, किसी तरह उधारी से काम चला रहे हैं।
विज्ञापन
संजय निरंजन, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान
विज्ञापन
इस समय भगवान भास्कर की तपिश बढ़ने लगी है, जिससे भूगर्भ जलस्तर नीचे की ओर खिसक रहा है, जो हैंडपंप पहले घंटों पानी देते थे, वह अब रुक-रुक कर पानी देने लगे हैं। कई हैंडपंपों ने तो पानी देना भी छोड़ दिया है। ऐसे में खराब हैंडपंपों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है, जो विभाग के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। इसकी वजह विभाग के पास हैंडपंप मरम्मत के लिए एक धेला भी नहीं है। इस स्थिति में विभागीय अफसर उधारी में कम कीमत के सामान को जुटाकर उन हैंडपंपों की मरम्मत कर पा रहे हैं, जिनमें महंगा सामान लगाने की जरूरत नहीं है, जिन हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने की आवश्यकता है या फिर बड़ी मरम्मत होनी है, ऐसे हैंडपंपों को अपने हाल छोड़ दिया गया है, जिससे वह ठीक नहीं हो पा रहे हैं। अब स्थानीय लोगों को कई दिनों तक खराब हैंडपंप की मरम्मत होने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इससे लोगों में विभाग के प्रति रोष पनप रहा है। कई मोहल्लों में लोगों को पीने का पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है। इनमें आजादपुरा प्रथम, नेहरू नगर, पठापुरा, चौबयाना, गोविंद नगर मोहल्ला शामिल हैं। इन मोहल्लों के लोगों को उस समय ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ता था, जब पाइप लाइन की आपूर्ति धोखा दे जाती थी। अब पाइप लाइन की आपूर्ति लड़खड़ाने पर लोगों के पास पानी भरने का और कोई विकल्प सामने नहीं रह जाता है। वर्तमान में विभाग द्वारा टैंकर भी नहीं चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग उससे पानी भर सकें। पंद्रहवें वित्त आयोग से विभाग को हैंडपंप मरम्मत के लिए पैसा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक पैसा विभाग के खाते में नहीं आ पाया है। श्रमिकों का भी मोह विभाग से भंग होता जा रहा है, वह भी समय से वेतन नहीं मिलने से परेशान हैं।
विज्ञापन
-----
प्रतिदिन दस से पंद्रह खराब हैंडपंप सुधारे जा रहे हैं। जिनमें ज्यादा काम किए जाने की आवश्यकता है, उन्हें सुधारने में दिक्कत आ रही है। विभाग के पास हैंडपंप मरम्मत मद में पैसा नहीं है, किसी तरह उधारी से काम चला रहे हैं।
विज्ञापन
संजय निरंजन, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान