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Lalitpur News: मेडिकल कॉलेज की जर्जर बिजली व्यवस्था, मरीजों की जान पर बड़ा खतरा
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विद्युत कक्ष में उठतीं लपटें
सुरेंद्र सिंह
ललितपुर। शासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू कराया और पुराने जिला अस्पताल भवन के जीर्णोद्धार व मरम्मत पर भी करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इससे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों के उपचार के साथ कई प्रमुख जांचों की सुविधा मिल रही है। इसके बावजूद पुराने भवन की विद्युत व्यवस्था अब तक पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। करीब चार दशक पुरानी केबलों के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है, जबकि मशीनों और अन्य उपकरणों की संख्या बढ़ने से विद्युत भार भी बढ़ गया है। ऐसे में बार-बार हो रहे शॉर्ट सर्किट और आगजनी के मामले मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पुरानी केबलें बढ़े हुए विद्युत भार का दबाव नहीं झेल पा रही हैं। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज में अलग-अलग स्थानों पर फॉल्ट और शॉर्ट सर्किट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं के दौरान मरीजों और तीमारदारों में अफरातफरी की स्थिति बनी। गनीमत रही कि अब तक आग की घटनाएं बड़े हादसे में तब्दील नहीं हुईं। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में विद्युत व्यवस्था की यह स्थिति किसी गंभीर घटना का कारण बन सकती है। संवाद
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दिसंबर 2024 में भूमिगत केबल में लगी थी आग
24 दिसंबर 2024 की देर रात तेज बारिश के दौरान मेडिकल कॉलेज परिसर में डाली गई भूमिगत केबल में चिंगारी उठने लगी थी। कुछ ही देर में केबल जलने लगी और आग की लपटें उठने लगीं। परिसर में आग देखकर मरीजों और तीमारदारों में हड़कंप मच गया। करंट की आशंका में लोग सुरक्षित स्थान की ओर भागे। कुछ देर बाद बारिश का पानी भरने से आग बुझ गई। गनीमत रही कि पास में खड़े एंबुलेंस और अन्य वाहन आग की चपेट में नहीं आए।
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ट्रॉमा सेंटर में आग से मची थी अफरातफरी
नौ अगस्त 2026 की रात ट्रॉमा सेंटर में विद्युत चेंजओवर की केबल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। देखते ही देखते लपटें उठने लगीं। आग देखकर मरीज और तीमारदार बाहर की ओर भागने लगे। बिजली गुल होने से ट्रॉमा सेंटर में अंधेरा छा गया। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों ने अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग पर काबू पाया। उस समय एक ईएमओ, दो चिकित्सकों समेत 12 मरीज और तीमारदार मौजूद थे। कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की तत्परता से आग को फैलने से रोक लिया गया।
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एसएनसीयू के बाहर भी जल चुकी है केबल
अगस्त के दूसरे सप्ताह में एसएनसीयू के बाहर लगे विद्युत पैनल की केबल में भी शॉर्ट सर्किट हुआ था। इससे आग की लपटें उठने लगीं और केबल जल गई। कर्मचारियों ने तत्काल इसकी सूचना देकर बिजली आपूर्ति बंद कराई, जिसके बाद आग पर काबू पाया जा सका। एसएनसीयू के पास हुई इस घटना में नवजात शिशुओं की सुरक्षा को लेकर भी खतरा पैदा हो गया था। समय रहते बिजली बंद होने से स्थिति गंभीर होने से बच गई।
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पैथोलॉजी की आग के बाद हुआ विद्युत ऑडिट
हाल में पैथोलॉजी के विद्युत कक्ष में आग लगने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने विद्युत लाइनों और पैनल का ऑडिट कराया। पुराने भवन परिसर के विभिन्न कक्षों और स्थानों की विद्युत व्यवस्था की जांच की गई। इसमें ओवरलोड की समस्या सामने आई। पैथोलॉजी के विद्युत कक्ष के पैनल में भी खराबी मिली। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, आपात स्थिति में काम आने वाले खराब उपकरणों को बदलवाया जाएगा और विद्युत व्यवस्था में जरूरी सुधार कराए जाएंगे।
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पैथोलॉजी के विद्युत कक्ष में आग लगने के बाद कॉलेज की विद्युत लाइन और पैनल का ऑडिट कराया गया। इसमें आपात स्थिति में काम आने वाले उपकरणों को बदलवाया जाएगा। पुरानी लाइन के कारण समस्या आ रही है, जिसे दूर कराने की प्रक्रिया की जा रही है।
- डॉ. मयंक कुमार शुक्ला, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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ललितपुर। शासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू कराया और पुराने जिला अस्पताल भवन के जीर्णोद्धार व मरम्मत पर भी करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इससे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों के उपचार के साथ कई प्रमुख जांचों की सुविधा मिल रही है। इसके बावजूद पुराने भवन की विद्युत व्यवस्था अब तक पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। करीब चार दशक पुरानी केबलों के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है, जबकि मशीनों और अन्य उपकरणों की संख्या बढ़ने से विद्युत भार भी बढ़ गया है। ऐसे में बार-बार हो रहे शॉर्ट सर्किट और आगजनी के मामले मरीजों, तीमारदारों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पुरानी केबलें बढ़े हुए विद्युत भार का दबाव नहीं झेल पा रही हैं। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज में अलग-अलग स्थानों पर फॉल्ट और शॉर्ट सर्किट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं के दौरान मरीजों और तीमारदारों में अफरातफरी की स्थिति बनी। गनीमत रही कि अब तक आग की घटनाएं बड़े हादसे में तब्दील नहीं हुईं। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में विद्युत व्यवस्था की यह स्थिति किसी गंभीर घटना का कारण बन सकती है। संवाद
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दिसंबर 2024 में भूमिगत केबल में लगी थी आग
24 दिसंबर 2024 की देर रात तेज बारिश के दौरान मेडिकल कॉलेज परिसर में डाली गई भूमिगत केबल में चिंगारी उठने लगी थी। कुछ ही देर में केबल जलने लगी और आग की लपटें उठने लगीं। परिसर में आग देखकर मरीजों और तीमारदारों में हड़कंप मच गया। करंट की आशंका में लोग सुरक्षित स्थान की ओर भागे। कुछ देर बाद बारिश का पानी भरने से आग बुझ गई। गनीमत रही कि पास में खड़े एंबुलेंस और अन्य वाहन आग की चपेट में नहीं आए।
ट्रॉमा सेंटर में आग से मची थी अफरातफरी
नौ अगस्त 2026 की रात ट्रॉमा सेंटर में विद्युत चेंजओवर की केबल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। देखते ही देखते लपटें उठने लगीं। आग देखकर मरीज और तीमारदार बाहर की ओर भागने लगे। बिजली गुल होने से ट्रॉमा सेंटर में अंधेरा छा गया। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों ने अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग पर काबू पाया। उस समय एक ईएमओ, दो चिकित्सकों समेत 12 मरीज और तीमारदार मौजूद थे। कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों की तत्परता से आग को फैलने से रोक लिया गया।
एसएनसीयू के बाहर भी जल चुकी है केबल
अगस्त के दूसरे सप्ताह में एसएनसीयू के बाहर लगे विद्युत पैनल की केबल में भी शॉर्ट सर्किट हुआ था। इससे आग की लपटें उठने लगीं और केबल जल गई। कर्मचारियों ने तत्काल इसकी सूचना देकर बिजली आपूर्ति बंद कराई, जिसके बाद आग पर काबू पाया जा सका। एसएनसीयू के पास हुई इस घटना में नवजात शिशुओं की सुरक्षा को लेकर भी खतरा पैदा हो गया था। समय रहते बिजली बंद होने से स्थिति गंभीर होने से बच गई।
पैथोलॉजी की आग के बाद हुआ विद्युत ऑडिट
हाल में पैथोलॉजी के विद्युत कक्ष में आग लगने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने विद्युत लाइनों और पैनल का ऑडिट कराया। पुराने भवन परिसर के विभिन्न कक्षों और स्थानों की विद्युत व्यवस्था की जांच की गई। इसमें ओवरलोड की समस्या सामने आई। पैथोलॉजी के विद्युत कक्ष के पैनल में भी खराबी मिली। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, आपात स्थिति में काम आने वाले खराब उपकरणों को बदलवाया जाएगा और विद्युत व्यवस्था में जरूरी सुधार कराए जाएंगे।
पैथोलॉजी के विद्युत कक्ष में आग लगने के बाद कॉलेज की विद्युत लाइन और पैनल का ऑडिट कराया गया। इसमें आपात स्थिति में काम आने वाले उपकरणों को बदलवाया जाएगा। पुरानी लाइन के कारण समस्या आ रही है, जिसे दूर कराने की प्रक्रिया की जा रही है।
- डॉ. मयंक कुमार शुक्ला, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज