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मसूर उत्पादन में अग्रणी बन गया है ललितपुर
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- फोटो : kisan.jpg
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ललितपुर। जिला मसूर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। कृषि प्रधान जिले में सर्वाधिक उत्पादन मसूर का किया जाता है। दाल की कीमत अधिक होने से किसानों को इसमे अच्छा खास मुनाफा मिलता है। यहां के कारोबारी मसूर की दाल का बरेली, आगरा, कानपुर, हाथरस आदि जगहों पर निर्यात करते हैं।
जनपद मसूर दाल का हब बन गया है। यहां का प्रमुख उद्यम कृषि पर आधारित है। जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि 30 हजार हेक्टेयर भूमि में यहां के किसान मसूर की खेती करते हैं। किसानों को मसूर के दाम ऊंचे मिलते हैं, इसलिए रबी के मौसम में मसूर दाल का उत्पादन अधिक किया जाता है। वर्तमान समय में मसूर का दाम 6500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। मसूर के उत्पादन में काली दोमट मिट्टी उपजाऊ मानी जाती है। नमी सोखने वाली मिट्टी इस कार्य के लिए सर्वाधिक उपयुक्त रहती है। मध्य भारत का मौसम और यहां की मिट्टी मसूर उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
60 गुना तक पैदावार
बुंदेलखंड में तीन फूल वाली मसूर का उत्पादन सबसे अधिक किया जा रहा है। इसकी पैदावार सबसे अच्छी मानी जाती है। उन्नतशील किसानों ने एक क्विंटल बीज से 60 क्विंटल मसूर पैदाकर रिकार्ड बनाए हैं। छोटे दाने वाली मसूर की मांग अधिक रहती है इसका प्रयोग नमकीन बनाने ेेमें किया जाता है। मसूर दाल की तासीर गर्म होती है। पकी मसूर दाल को फ्रिज में पांच दिन तक रखा जा सकता है।
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मसूर दाल में पोषण व औषधीय दोनों गुण पाए जाते हैं। यह मोटापा, कैंसर व हृदय रोग के खतरे को कम करती है। इसमें पॉलीफिनोल्स व अन्य बायोएक्टिव तत्व पाए जाते हैं। इसे बढ़ते वजन को नियंत्रित करने वाला माना जाता है। इसमें फाइबर और प्रोटीन की मात्रा अधिक पाई जाती है जो भूख को शांत करती है। यह दाल होमोसिस्टीन नामक एमिनो एसिड को नियंत्रित करती है। इससे उच्च रक्तचाप तथा कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित होता है। कांप्लेक्स कार्बोहाइड्रेट खून में धीरे- धीरे रिलीज होकर डायबिटीज का खतरा घटाते हैं। मसूर दाल की 100 ग्राम मात्रा में 343 कैलोरी ऊर्जा, 24.5 ग्राम प्रोटीन, 64.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 11 ग्राम फाइबर, 44 मिलीग्राम कैल्सियम, 6 मिलीग्राम आयरन, 667 मिलीग्राम पोटैशियम, 5.3 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।
- डा. विनीता भारती, आयुष चिकित्सक
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जनपद मसूर दाल का हब बन गया है। यहां का प्रमुख उद्यम कृषि पर आधारित है। जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि 30 हजार हेक्टेयर भूमि में यहां के किसान मसूर की खेती करते हैं। किसानों को मसूर के दाम ऊंचे मिलते हैं, इसलिए रबी के मौसम में मसूर दाल का उत्पादन अधिक किया जाता है। वर्तमान समय में मसूर का दाम 6500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। मसूर के उत्पादन में काली दोमट मिट्टी उपजाऊ मानी जाती है। नमी सोखने वाली मिट्टी इस कार्य के लिए सर्वाधिक उपयुक्त रहती है। मध्य भारत का मौसम और यहां की मिट्टी मसूर उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
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60 गुना तक पैदावार
बुंदेलखंड में तीन फूल वाली मसूर का उत्पादन सबसे अधिक किया जा रहा है। इसकी पैदावार सबसे अच्छी मानी जाती है। उन्नतशील किसानों ने एक क्विंटल बीज से 60 क्विंटल मसूर पैदाकर रिकार्ड बनाए हैं। छोटे दाने वाली मसूर की मांग अधिक रहती है इसका प्रयोग नमकीन बनाने ेेमें किया जाता है। मसूर दाल की तासीर गर्म होती है। पकी मसूर दाल को फ्रिज में पांच दिन तक रखा जा सकता है।
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मसूर दाल में पोषण व औषधीय दोनों गुण पाए जाते हैं। यह मोटापा, कैंसर व हृदय रोग के खतरे को कम करती है। इसमें पॉलीफिनोल्स व अन्य बायोएक्टिव तत्व पाए जाते हैं। इसे बढ़ते वजन को नियंत्रित करने वाला माना जाता है। इसमें फाइबर और प्रोटीन की मात्रा अधिक पाई जाती है जो भूख को शांत करती है। यह दाल होमोसिस्टीन नामक एमिनो एसिड को नियंत्रित करती है। इससे उच्च रक्तचाप तथा कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित होता है। कांप्लेक्स कार्बोहाइड्रेट खून में धीरे- धीरे रिलीज होकर डायबिटीज का खतरा घटाते हैं। मसूर दाल की 100 ग्राम मात्रा में 343 कैलोरी ऊर्जा, 24.5 ग्राम प्रोटीन, 64.5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 11 ग्राम फाइबर, 44 मिलीग्राम कैल्सियम, 6 मिलीग्राम आयरन, 667 मिलीग्राम पोटैशियम, 5.3 मिलीग्राम विटामिन सी पाया जाता है।
- डा. विनीता भारती, आयुष चिकित्सक