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Lalitpur News: बाल उपन्यास मेंढकपुर के रक्षक का विमोचन
Mon, 05 Oct 2026 02:02 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:02 AM IST
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ललितपुर। बुंदेलखंड के पर्यावरणविद् पुष्पेंद्र सिंह चौहान ‘अमीन साब’ के बाल उपन्यास ‘मेंढकपुर के रक्षक’ का लखनऊ में विमोचन हुआ। 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में साहित्य और पर्यावरण से जुड़े लोग मौजूद थे। पुस्तक को ऑनलाइन और बुक-शॉप से करीब 300 ऑर्डर मिले, जो पाठकों की शुरुआती रुचि दर्शाता है।
पुष्पेंद्र ने बताया कि उपन्यास बच्चों के मनोरंजन के साथ उन्हें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाता है। इसमें फैंटेसी और एडवेंचर के जरिये बच्चों की कल्पनाशक्ति को उड़ान देने वाली कहानी है। यह उन्हें प्राकृतिक परिवेश से जोड़ने का प्रयास करती है। विमोचन समारोह में बच्चों में मोबाइल निर्भरता और पढ़ने की घटती आदत पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने बाल साहित्य को व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण बताया। कहाकि मोबाइल बच्चों की दुनिया का केंद्र नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश बच्चों की शिक्षा और साहित्य का हिस्सा बनना चाहिए। उपन्यास के शीर्षक और कथानक में मेंढक और जल-पर्यावरण प्रतीकों को विशेष स्थान दिया गया है। ‘महाराज मंडूकेश्वर’ का उल्लेख पर्यावरणीय संदेश को लोक-सांस्कृतिक भावभूमि से जोड़ता है। यह बच्चों को प्रकृति और जल-पर्यावरण का महत्व रोचक कथा से समझाता है। इस कृति में बाल मनोरंजन, कल्पना, रोमांच, पर्यावरण और आधुनिक तकनीक को एक साथ पिरोया गया है।
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पुष्पेंद्र ने बताया कि उपन्यास बच्चों के मनोरंजन के साथ उन्हें प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाता है। इसमें फैंटेसी और एडवेंचर के जरिये बच्चों की कल्पनाशक्ति को उड़ान देने वाली कहानी है। यह उन्हें प्राकृतिक परिवेश से जोड़ने का प्रयास करती है। विमोचन समारोह में बच्चों में मोबाइल निर्भरता और पढ़ने की घटती आदत पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने बाल साहित्य को व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण बताया। कहाकि मोबाइल बच्चों की दुनिया का केंद्र नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश बच्चों की शिक्षा और साहित्य का हिस्सा बनना चाहिए। उपन्यास के शीर्षक और कथानक में मेंढक और जल-पर्यावरण प्रतीकों को विशेष स्थान दिया गया है। ‘महाराज मंडूकेश्वर’ का उल्लेख पर्यावरणीय संदेश को लोक-सांस्कृतिक भावभूमि से जोड़ता है। यह बच्चों को प्रकृति और जल-पर्यावरण का महत्व रोचक कथा से समझाता है। इस कृति में बाल मनोरंजन, कल्पना, रोमांच, पर्यावरण और आधुनिक तकनीक को एक साथ पिरोया गया है।
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