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Lalitpur News: राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड तक पहुंच रहा ललितपुर का महुआ
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- गल्ला मंडी में हो रही सात सौ से आठ सौ क्विंटल महुआ की आवक
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। महुआ की पैदावार में आगे जनपद की गल्ला मंडी में हर रोज लगभग सात से आठ सौ क्विंटल की आवक हो रही है। डिमांड होने पर जनपद का महुआ राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के इंदौर भी जाता है, जिसका उपयोग अन्य राज्यों में शराब, पशुआहार बनाने के काम आता है।
गल्ला मंडी में महुआ की आवक पंद्रह अप्रैल से शुरू होती है, जो जून माह में या बारिश से पहले महुआ आना बंद हो जाता है। शुरुआत में महुआ की आवक लगभग ढाई हजार से तीन हजार क्विंटल प्रतिदिन तक होती है, लेकिन अभी मंडी में महुआ की आवक सात सौ से आठ सौ क्विंटल तक ही हो रही है। मंडी के व्यापारी महुआ को डिमांड के अनुसार राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश के इंदौर में भी बड़ी मात्रा में भेजा जाता है। बताया जाता है कि वहां महुआ का उपयोग पशु आहार और शराब बनाने में सबसे अधिक किया जाता है। इसके अलावा महुआ के फूलों का उपयोग कुकीज, बिस्किट और अन्य खाद्य उत्पादों में भी किया जाता है। महुआ के बीज से तेल भी निकाला जाता है, जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है और इसका उपयोग साबुन, डिटर्जेंट और अन्य उत्पादों में भी किया जाता है।
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फोटो-28
कैप्सन-जय कुमार जैन।
जनपद में महुआ का अच्छा उत्पादन होता है और मंडी में हर रोज लगभग सात सौ से आठ सौ क्विंटल तक महुआ आता है। यहां का महुआ राजस्थान में सबसे अधिक भेजा जाता है, जबकि झारखंड, रायपुर, में भी महुआ पहुंचाया जाता है।
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-जय कुमार जैन, महोली, व्यापारी।
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फोटो-29
कैप्सन-संजीव जैन कप्तान।
जनपद में महुआ की अच्छी पैदावार होती है और यहां का महुआ झारखंड, छत्तीसगढ़, रायपुर, विलासपुर, राजस्थान में डिमांड काफी रहती है। महुआ का उपयोग वहां पशु आहार और शराब के लिए सबसे ज्यादा किया जाता है।-- संजीव जैन कप्तान, व्यापारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। महुआ की पैदावार में आगे जनपद की गल्ला मंडी में हर रोज लगभग सात से आठ सौ क्विंटल की आवक हो रही है। डिमांड होने पर जनपद का महुआ राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के इंदौर भी जाता है, जिसका उपयोग अन्य राज्यों में शराब, पशुआहार बनाने के काम आता है।
गल्ला मंडी में महुआ की आवक पंद्रह अप्रैल से शुरू होती है, जो जून माह में या बारिश से पहले महुआ आना बंद हो जाता है। शुरुआत में महुआ की आवक लगभग ढाई हजार से तीन हजार क्विंटल प्रतिदिन तक होती है, लेकिन अभी मंडी में महुआ की आवक सात सौ से आठ सौ क्विंटल तक ही हो रही है। मंडी के व्यापारी महुआ को डिमांड के अनुसार राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, मध्य प्रदेश के इंदौर में भी बड़ी मात्रा में भेजा जाता है। बताया जाता है कि वहां महुआ का उपयोग पशु आहार और शराब बनाने में सबसे अधिक किया जाता है। इसके अलावा महुआ के फूलों का उपयोग कुकीज, बिस्किट और अन्य खाद्य उत्पादों में भी किया जाता है। महुआ के बीज से तेल भी निकाला जाता है, जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है और इसका उपयोग साबुन, डिटर्जेंट और अन्य उत्पादों में भी किया जाता है।
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फोटो-28
कैप्सन-जय कुमार जैन।
जनपद में महुआ का अच्छा उत्पादन होता है और मंडी में हर रोज लगभग सात सौ से आठ सौ क्विंटल तक महुआ आता है। यहां का महुआ राजस्थान में सबसे अधिक भेजा जाता है, जबकि झारखंड, रायपुर, में भी महुआ पहुंचाया जाता है।
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-जय कुमार जैन, महोली, व्यापारी।
फोटो-29
कैप्सन-संजीव जैन कप्तान।
जनपद में महुआ की अच्छी पैदावार होती है और यहां का महुआ झारखंड, छत्तीसगढ़, रायपुर, विलासपुर, राजस्थान में डिमांड काफी रहती है। महुआ का उपयोग वहां पशु आहार और शराब के लिए सबसे ज्यादा किया जाता है।