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Lalitpur: पचास साल बाद भी नहीं मिल पाई ग्रामीणों को सड़क, इसी रास्ते से निकलते हैं मड़ावरा ब्लॉक के कर्मचारी
Thu, 28 Aug 2025 03:34 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Published by: दीपक महाजन
Updated Thu, 28 Aug 2025 03:34 PM IST
सार
मड़ावरा तहसील एवं ब्लॉक को जोड़ने वाले नाराहट-जामनी बांध मार्ग पर अभी तक ग्रामीणों को सड़क का लाभ नहीं मिल पाया है। लोगों को कीचड़ में से होकर गुजरना पड़ता है। सबसे खास बात यह है कि इसी रास्ते से होकर मड़ावरा ब्लॉक के कर्मचारी प्रतिदिन निकलते हैं।
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नाराहट-जामनी बांध मार्ग
- फोटो : संवाद
विस्तार
मड़ावरा तहसील एवं ब्लॉक को जोड़ने वाले नाराहट-जामनी बांध मार्ग पर अभी तक ग्रामीणों को सड़क का लाभ नहीं मिल पाया है। लोगों को कीचड़ में से होकर गुजरना पड़ता है। सबसे खास बात यह है कि इसी रास्ते से होकर मड़ावरा ब्लॉक के कर्मचारी अपने वाहन से निकल जाते हैं। फिर भी वह ग्रामीणों के इस दर्द को नहीं देख पा रहे। बरसात के दिनों में निकलना मुश्किल हो जाता है। इसी रास्ते से होकर छोटे- छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं। जो आए दिन चोटिल हो जाते हैं। बड़ी आबादी इस सड़क से निकलती है। फिर भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया। बताया गया है करीब 60 गांव इससे प्रभावित हैं। 70 के दशक में जामनी बांध का निर्माण हुआ था जिसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया गया था।
मार्ग पर हो गए गहरे-गहरे गड्ढे
विकासखंड का दर्जा पाए मड़ावरा विकासखंड में शासन सरकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन करने के लिए बहुत प्रयास किए जा रहे हैं। जिला मंडल एवं प्रदेश स्तर से विभिन्न टीमें मड़ावरा विकास खंड में समस्याओं और विकास कार्यों की देख-रेख कर रही हैं। सड़क की स्थिति बहुत दयनीय है। इस मार्ग पर गहरे-गहरे गड्ढे हो गए हैं। इसी कारण प्रतिदिन कई राहगीर गिरकर चोटिल हो रहे हैं। और कई तो गंभीर रूप से घायल भी हो जाते हैं। पहले ये सड़क सिंचाई विभाग के अधीन थी लेकिन अब लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत आती है। लोक निर्माण विभाग ने करीब डेढ़ वर्ष पहले इसकी मरम्मत का कार्य हुआ था, जिसकी गुणवत्ता की शिकायत की गई थी। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।
करीब 60 गांव प्रभावित
मुख्यमार्गों में से एक इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 50 से 60 गांवों के लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए विकासखंड मड़ावरा जाते रहते हैं जिनमें से गौना, नाराहट, डोरना, बम्होरी ,उमरिया, सड़खरी, जमौरा, नयागांव, बछरई मकरीपुर ललितापुर, महाराजपुरा,अर्जुन खिरिया, झरवटा, दिग्वार, डोंगरा, खिरिया उबारी, चांदोरा आदि गांवों के लोगों का प्रतिदिन आवागमन होता है। आश्चर्य की बात ये है कि इस रूट पर करीब 15 बसों का जिला मुख्यालय तक प्रतिदिन संचालन होता है। लेकिन उदासीनता और लापरवाही की मिसाल बन चुकी ये सड़क आज भी अपने हाल पर आंसू बहा रही है। सरकारें आई और गईं परन्तु क्षेत्र के लोगों की इस प्रमुख समस्या से न तो किसी जनप्रतिनिधि ने कोई वास्ता रखा और न ही इसका निराकरण हो पाया।
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मार्ग पर हो गए गहरे-गहरे गड्ढे
विकासखंड का दर्जा पाए मड़ावरा विकासखंड में शासन सरकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन करने के लिए बहुत प्रयास किए जा रहे हैं। जिला मंडल एवं प्रदेश स्तर से विभिन्न टीमें मड़ावरा विकास खंड में समस्याओं और विकास कार्यों की देख-रेख कर रही हैं। सड़क की स्थिति बहुत दयनीय है। इस मार्ग पर गहरे-गहरे गड्ढे हो गए हैं। इसी कारण प्रतिदिन कई राहगीर गिरकर चोटिल हो रहे हैं। और कई तो गंभीर रूप से घायल भी हो जाते हैं। पहले ये सड़क सिंचाई विभाग के अधीन थी लेकिन अब लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत आती है। लोक निर्माण विभाग ने करीब डेढ़ वर्ष पहले इसकी मरम्मत का कार्य हुआ था, जिसकी गुणवत्ता की शिकायत की गई थी। लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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करीब 60 गांव प्रभावित
मुख्यमार्गों में से एक इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 50 से 60 गांवों के लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए विकासखंड मड़ावरा जाते रहते हैं जिनमें से गौना, नाराहट, डोरना, बम्होरी ,उमरिया, सड़खरी, जमौरा, नयागांव, बछरई मकरीपुर ललितापुर, महाराजपुरा,अर्जुन खिरिया, झरवटा, दिग्वार, डोंगरा, खिरिया उबारी, चांदोरा आदि गांवों के लोगों का प्रतिदिन आवागमन होता है। आश्चर्य की बात ये है कि इस रूट पर करीब 15 बसों का जिला मुख्यालय तक प्रतिदिन संचालन होता है। लेकिन उदासीनता और लापरवाही की मिसाल बन चुकी ये सड़क आज भी अपने हाल पर आंसू बहा रही है। सरकारें आई और गईं परन्तु क्षेत्र के लोगों की इस प्रमुख समस्या से न तो किसी जनप्रतिनिधि ने कोई वास्ता रखा और न ही इसका निराकरण हो पाया।
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