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कोरोना काल में देश-विदेश में जा रहीं ललितपुर की जड़ी बूटियों से बनी दवाएं

Fri, 09 Apr 2021 12:49 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 09 Apr 2021 12:49 AM IST
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lalitpur herbal medicens exported to abroad
greenari.jpeg - फोटो : greenari.jpeg
ललितपुर। ललितपुर जिले में कई ऐसी जड़ी बूटियां और फल हैं जिसका प्रयोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। यहां के जंगलों में पाई जाने वाली गुरबेल, सतावर, भूमि आंवला समेत कई प्रकार की जड़ी बूटियां, पतंजलि, डाबर व अन्य नामचीन आयुर्वेदिक दवा कंपनियां यहां से मंगा रही हैं। इनसे दवाइयां बनाकर बाजारों में उपलब्ध कराती हैं। कोरोना काल में इनकी खपत बहुत बड़ी है। नामचीन कंपनियों द्वारा ये दवाएं देश के साथ ही विदेशों तक सप्लाई हो रही हैं। काढ़े की मांग भी बढ़ी है।
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ललितपुर में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इससे लोग वायरस से बचाव के लिए तमाम उपाय करने में लगे हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल में भी मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। बृहस्पतिवार को आयुर्वेदिक चिकित्सालय में 70 लोगों ने उपचार कराया। आयुष मंत्रालय द्वारा भी चिकित्सालय में वर्तमान समय में मरीजों के लिए गिलोय, अश्वगंधा, दालचीनी, काली मिर्च मिश्रित आयुष काढ़ा, संसमनी और अणु तेल उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि लोग इससे अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर संक्रमण से बचाव कर सकें।
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जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात आयुष चिकित्सक डॉ. विनीता भारती ने बताया कि वर्तमान समय में लोग कोरोना से बचाव के लिए अधिक से अधिक काढ़े का प्रयोग करें। संक्रमण की दूसरी लहर में काढ़े की खपत बढ़ी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों का प्रयोग कर मरीज अपने आपको स्वस्थ रख सकते हैं। आयुष काढ़े के अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए संसमनी का भी प्रयोग करें। अणु तेल के प्रयोग पर जोर देते हुए कहा कि संक्रामक बीमारियां श्वांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती हैं।
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अणु तेल को नाक में डालने से श्वांस के जरिए शरीर में पहुंचने वाले विषाणु अणु तेल के संपर्क में आकर समाप्त हो जाते हैं। इससे व्यक्ति में संक्रमण होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। एक आयुर्वेदिक फर्म के प्रोपराइटर भगत सिंह राठौर ने बताया कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ललितपुर जिले के जंगलों में मिलने वाले गिलोय की बेल (गुरबेल), सतावर, वन तुलसी, भूमि आंवला, आंवला कली जैसी जड़ी बूटियां पतंजलि, डाबर व अन्य नामचीन कंपनियों द्वारा मंगाईं जाती हैं और इनसे तैयार दवाइयां बाजार में सप्लाई की जाती हैं।
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