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Lalitpur News: संघर्षों की दास्तां सुना भावुक हुए कारसेवक...कहा आज सपना हो रहा साकार

Fri, 19 Jan 2024 03:50 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jan 2024 03:50 AM IST
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Karsevak became emotional after hearing the stories of struggles...said today the dream is coming true
संवाद न्यूज एजेंसी
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तालबेहट (ललितपुर)। राम मंदिर निर्माण के लिए पुलिस की निगाहों से बचकर कुछ कारसेवक तो अयोध्या पहुंच गए, लेकिन कुछ लोगों ने भूमिगत रहकर ही आंदोलन चलाया। संघर्षों की दास्तां सुनाते कारसेवक भावुक हो गए। उनका कहना था कि कारसेवा में साथ गए कई साथी आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका सपना साकार हो रहा है इस बात की खुशी है। अयोध्या में दर्शन करने तो बाद में जाएंगे, पहले 22 जनवरी को प्रभु राम के स्वागत में अपने घरों पर पांच-पांच दीपक जलाएंगे।

----------राम भक्तों में कांग्रेसी पूरन चंद जैन ने भी दी थी गिरफ्तारी
उरई जेल भेजे जाने के बाद यहां के राम भक्तों ने जब तत्कालीन प्रदेश सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए उस समय के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पूरन चंद जैन की अगुवाई में प्रदर्शन शुरू किया तो प्रशासन ने चार दिन बाद 26 अक्टूबर को लगभग दो दर्जन युवा राम भक्तों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें जिला मुख्यालय पर बनी जेल में बंद कर दिया था। इनमें प्रमुख रूप से पूरन चंद्र जैन के अलावा, राजेश त्रिपाठी, विनोद अगरिया, कमल प्रकाश गुप्ता, अनिल जैन, ऋषभ कुमार जैन, अनिल बबेले, जयराम चौबे, भागीरथ रजक, डा, रामनाथ राणा, सल्टन गुप्ता, पिंकी नायक, नंनू राजा सरखड़ी, नरेंद्र ओझा आदि प्रमुख थे, इनमें कुछ लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं।
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----------उरई में गिरफ्तारी देने वाले रामभक्तों में किशोरी शरण ही जीवित
राम जन्म भूमि आंदोलन में तत्कालीन विहिप नगर अध्यक्ष नाथूराम शर्मा, रघुवर दयाल श्रीवास्तव, श्रवण कुमार त्रिपाठी, हरीशंकर लिटौरिया, किशोरी शरण लिटौरिया, कैलाश नारायण पुरोहित, श्रीराम अड़जरिया, बृज किशोर बिलगैया, मुन्नालाल झा, श्रीराम अग्निहोत्री, जवाहर लाल गोस्वामी, बद्री प्रसाद गुप्ता, सुदामा प्रसाद चौबे, बाबूलाल पस्तोर आदि को 22 अक्टूबर 1990 को गिरफ्तार कर 19 दिन उरई जेल में रखा गया था। उक्त राम भक्तों में किशोरी शरण लिटौरिया को छोड़कर सभी का स्वर्गवास हो चुका है।
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कई रामभक्त और शिव सैनिक हो गए थे भूमिगत
उस समय कई राम भक्त और शिव सैनिक जो राम जन्म भूमि के आंदोलन में सक्रिय थे, पुलिस की सख्ती के चलते भूमिगत हो गए थे। लेकिन, राम जन्म भूमि आंदोलन में अपनी सक्रियता वे लोग दिखाते रहे।

---------फोटो -15,
जब कारसेवा करने गया था तब उम्मीद नहीं थी कि इतना अलौकिक, दिव्य और विशाल मंदिर बनेगा। अब कारसेवकों के स्वप्न को साकार होता देख मन में अपार प्रसन्नता है कि मंदिर में प्रभु रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है।- विजय किशोर सोनी
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फोटो -
वर्ष 1994 में अयोध्या में राम चबूतरे पर श्रमदान करने का सौभाग्य मिला था। इसके बाद अयोध्या नहीं गया, लेकिन अब श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अवश्य प्रभु राम के दर्शन करने अयोध्या जाऊंगा।- इं रमेश कुमार शर्मा
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फोटो -
मित्रों के साथ अयोध्या में कारसेवा के दौरान करीब दो सप्ताह कारसेवक पुरम में रहकर प्रभु राम के मंदिर की नींव भराई में श्रमदान का सौभाग्य मिला था। अब प्रभु राम के मंदिर का निर्माण होने पर गर्व महसूस हो रहा है।- मुकेश कुमार गुप्ता

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पापा का सपना हुआ साकार
फोटो-
कारीटोरन। रामजन्म भूमि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा रहे तत्कालीन बजरंग दल संयोजक व भाजपा महामंत्री पंडित राजेश रावत भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका योगदान कोई भुला नहीं सकता। उनके बेटे रितिक रावत ने बताया कि वर्ष 1990 व 92 के आंदोलन में परिवार के चार सदस्यों ने गिरफ्तारी दी थी। आज जब अयोध्या में भव्य मंदिर तैयार हो गया तो पापा का सपना भी साकार हो गया है। 22 जनवरी के बाद अयोध्या दर्शन करने जाऊंगा। संवाद
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