{"_id":"bd07b34ab9c6b7abdd8c99134f90ba83","slug":"justice-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानलेवा हमला में पांच वर्ष की कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जानलेवा हमला में पांच वर्ष की कैद
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Wed, 03 Feb 2016 01:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश लोकेश राय ने पांच वर्ष पूर्व पूजा को लेकर हुए विवाद में पुजारी पर जान लेवा हमला करने का जुर्म साबित होने पर अभियुक्त को पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।
ग्राम दैलवारा निवासी मोहन सिंह पुत्र गोपाल सरन ने थाना बानपुर में 6 मई 2010 को तहरीर देकर बताया था कि उसके पिता गांव से एक किलोमीटर दूर स्थित महादेव मंदिर के पुजारी हैं। छह मई की ही रात्रि करीब तीन बजे गांव का संतोष सिंह अपने साले विक्रम के साथ मंदिर पहुंचा और कहने लगा कि क्यों बाबा तुम देवीजी की पूजा तो करते हो, बब्बा की पूजा क्यों नहीं करते। इस पर उसके पिता ने कहा कि वह सभी देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। इसी बात को लेकर दोनों लोग उसके पिता से विवाद करने लगे। विरोध पर उन दोनों ने पास में रखे चमीटा से उसके पिता को मारा पीटा, जिससे उन्हें पैर, सिर, पीठ व हाथ में चोटें आई। साथ ही धमकी देते चले गए कि इस बारे में कुछ बोलोगे तो उसे जान से मार देंगे।
सुबह होने पर जब उसे पिता के साथ मारपीट की जानकारी हुई तो वह मंदिर पहुंचा, जहां उसके पिता मंदिर के बाहर चुटहिल अवस्था में पड़े थे। थाना बानपुर पुलिस ने मोहन सिंह की तहरीर पर दोनों आरोपियों विक्रम व संतोष सिंह के खिलाफ जानलेवा हमला करने, गालीगलौज करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश लोकेश राय ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर ग्राम गदनपुर निवासी विक्रम सिंह को जान से मारने के प्रयास का दोषी पाते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा, जबकि अन्य धाराओं में संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया। इस मामले में शामिल दूसरे आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया गया। मामले की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तिलक सिंह यादव ने की।
विज्ञापन
ग्राम दैलवारा निवासी मोहन सिंह पुत्र गोपाल सरन ने थाना बानपुर में 6 मई 2010 को तहरीर देकर बताया था कि उसके पिता गांव से एक किलोमीटर दूर स्थित महादेव मंदिर के पुजारी हैं। छह मई की ही रात्रि करीब तीन बजे गांव का संतोष सिंह अपने साले विक्रम के साथ मंदिर पहुंचा और कहने लगा कि क्यों बाबा तुम देवीजी की पूजा तो करते हो, बब्बा की पूजा क्यों नहीं करते। इस पर उसके पिता ने कहा कि वह सभी देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। इसी बात को लेकर दोनों लोग उसके पिता से विवाद करने लगे। विरोध पर उन दोनों ने पास में रखे चमीटा से उसके पिता को मारा पीटा, जिससे उन्हें पैर, सिर, पीठ व हाथ में चोटें आई। साथ ही धमकी देते चले गए कि इस बारे में कुछ बोलोगे तो उसे जान से मार देंगे।
विज्ञापन
सुबह होने पर जब उसे पिता के साथ मारपीट की जानकारी हुई तो वह मंदिर पहुंचा, जहां उसके पिता मंदिर के बाहर चुटहिल अवस्था में पड़े थे। थाना बानपुर पुलिस ने मोहन सिंह की तहरीर पर दोनों आरोपियों विक्रम व संतोष सिंह के खिलाफ जानलेवा हमला करने, गालीगलौज करने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश लोकेश राय ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर ग्राम गदनपुर निवासी विक्रम सिंह को जान से मारने के प्रयास का दोषी पाते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा, जबकि अन्य धाराओं में संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया। इस मामले में शामिल दूसरे आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया गया। मामले की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तिलक सिंह यादव ने की।