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्षमा मांगने से पहले उसे क्षमा करें तो धर्म सार्थक होगा
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क्षमा मांगने से पहले उसे क्षमा करें: मुनिश्री
पाली। श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर परिसर में विराजमान मुनिजी प्रवर सागर जी महाराज ने क्षमावाणी पर्व पर कहा कि क्षमा धर्म का मूल है, अर्थात धर्म की जड़ है। जहां क्रोध समाप्त होता है वहां समता उत्पन्न होती है। समता ही मोक्ष का कारण है। किसी भी जीव से क्षमा मांगने से पहले उसे क्षमा कर देना, तब क्षमा धर्म सार्थक होगा एवं क्षमा से जो सम्यक्त की प्राप्ति होगी, वह परंपरा से मोक्ष का कारण है।
मुनिश्री ने कहा कि हे भव्य आत्मन, जो जीव द्रव्य विभाव अवस्था में है वह निरंतर कर्मों को बांध रहा है। जीव के द्वारा क्रोध, मान, माया, लोभ रूपी गांठ के खुलने पर अंतरंग से क्षमा भाव उत्पन्न होते हैं। गांठ को खोलकर क्षमा भाव धारण करना चाहिए। इसके बाद श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रीजी विमान में विराजमान होकर विहार को निकले। जैन समाज के लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। मुख्य बाजार, गांधी चौक, हजारिया मोहल्ले से होती हुई शोभायात्रा में बच्चे और बड़े जय गुरुदेव के जयकारे का उद्घोष करते चल रहे थे। महिलाएं प्रभु भक्ति में लीन मंगलगीत गाती चल रही थीं। विहार के बाद विमान मंदिर में पहुंचे, जहां धार्मिक आयोजन चलते रहे।
इस अवसर पर अनिल रसिया, महेंद्र रसिया, विजय, शील वैद्य, सुंदरलाल रसिया, श्रीकांत जैन, रविंद्र जैन, राकेश जैन, सतीश जैन, दीपेंद्र जैन, चक्रेश जैन, शालू जैन, सचिन सतभैया, लालू जैन, अतुल जैन, राकेश रसिया, डब्बू रसिया, शेट्टी जैन, गोटू जैन, प्रसन्न, सनत मिठ्या आदि मौजूद रहे।
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पाली। श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर परिसर में विराजमान मुनिजी प्रवर सागर जी महाराज ने क्षमावाणी पर्व पर कहा कि क्षमा धर्म का मूल है, अर्थात धर्म की जड़ है। जहां क्रोध समाप्त होता है वहां समता उत्पन्न होती है। समता ही मोक्ष का कारण है। किसी भी जीव से क्षमा मांगने से पहले उसे क्षमा कर देना, तब क्षमा धर्म सार्थक होगा एवं क्षमा से जो सम्यक्त की प्राप्ति होगी, वह परंपरा से मोक्ष का कारण है।
मुनिश्री ने कहा कि हे भव्य आत्मन, जो जीव द्रव्य विभाव अवस्था में है वह निरंतर कर्मों को बांध रहा है। जीव के द्वारा क्रोध, मान, माया, लोभ रूपी गांठ के खुलने पर अंतरंग से क्षमा भाव उत्पन्न होते हैं। गांठ को खोलकर क्षमा भाव धारण करना चाहिए। इसके बाद श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रीजी विमान में विराजमान होकर विहार को निकले। जैन समाज के लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। मुख्य बाजार, गांधी चौक, हजारिया मोहल्ले से होती हुई शोभायात्रा में बच्चे और बड़े जय गुरुदेव के जयकारे का उद्घोष करते चल रहे थे। महिलाएं प्रभु भक्ति में लीन मंगलगीत गाती चल रही थीं। विहार के बाद विमान मंदिर में पहुंचे, जहां धार्मिक आयोजन चलते रहे।
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इस अवसर पर अनिल रसिया, महेंद्र रसिया, विजय, शील वैद्य, सुंदरलाल रसिया, श्रीकांत जैन, रविंद्र जैन, राकेश जैन, सतीश जैन, दीपेंद्र जैन, चक्रेश जैन, शालू जैन, सचिन सतभैया, लालू जैन, अतुल जैन, राकेश रसिया, डब्बू रसिया, शेट्टी जैन, गोटू जैन, प्रसन्न, सनत मिठ्या आदि मौजूद रहे।
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