{"_id":"6a7e2807bdacd571ec06a74f","slug":"i-will-try-to-transfer-pichhwai-art-to-bu-dinesh-lalitpur-news-c-11-jhs1004-854604-2026-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीयू को पिचवाई कला ट्रांसफर करने का प्रयास करूंगा: दिनेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीयू को पिचवाई कला ट्रांसफर करने का प्रयास करूंगा: दिनेश
विज्ञापन
झांसी। बीयू के दीक्षांत समारोह में डी.लिट की मानद उपाधि लेने के बाद पिचवाई चित्रकार दिनेश सोनी भावुक नजर आए। राजस्थान के भीलवाड़ा की पिचवाई चित्रकारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सोनी ने कहा कि इस उपाधि को प्राप्त करना मेरे लिए गौरव की बात है। यह ऋण मेरे ऊपर चढ़ गया है, इसलिए मैं पिछवाई कला को बीयू में ट्रांसफर करने का प्रयास करूंगा। बीयू मुझे साल में दो-तीन बार बुलाए। मैं आऊंगा और बुंदेली कला को भी बढ़ावा देने के लिए काम करूंगा।
दिनेश सोनी ने कहा कि भारतीय पारंपरिक एवं सांस्कृतिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। बीयू के पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को वह शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रयास करेंगे, ताकि पारंपरिक चित्रकला और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाया जा सके। पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की पहल से कलाकारों को नई पहचान और अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात में 18 से 20 हजार कारीगर हस्तशिल्प से आजीविका चला रहे हैं। ऐसे प्रयास न केवल कलाकारों को आर्थिक सशक्त बनाते हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करने में योगदान देते हैं। ब्यूरो
विज्ञापन
दिनेश सोनी ने कहा कि भारतीय पारंपरिक एवं सांस्कृतिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। बीयू के पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को वह शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रयास करेंगे, ताकि पारंपरिक चित्रकला और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाया जा सके। पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की पहल से कलाकारों को नई पहचान और अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि गुजरात में 18 से 20 हजार कारीगर हस्तशिल्प से आजीविका चला रहे हैं। ऐसे प्रयास न केवल कलाकारों को आर्थिक सशक्त बनाते हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करने में योगदान देते हैं। ब्यूरो
विज्ञापन