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मौत के नीचे पढ़ने को मजबूर विद्यार्थी

Fri, 17 Mar 2017 12:36 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Fri, 17 Mar 2017 12:36 AM IST
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high tension, school
स्‍कूूल - फोटो : amar ujala
जनपद में कई सरकारी व गैरसरकारी मान्यता प्राप्त विद्यालयों के स्कूली मासूम हाइटेंशन व लो टेंशन मौत के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालयों की निकले विद्युत तारों को विद्यालय प्रबंधनों द्वारा हटवाने को प्रशासनिक अमलों के चक्कर काटना पड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। जबकि विद्युत विभाग द्वारा जहां कई विद्यालयों में
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मानकों की अनदेखी करते हुए विद्युत लाइनें बिछा दी गईं, तो कई विद्यालय भवन भी पूर्व से निकली हाइटेंशन लाइनों के नीचे निर्मित करा दिए गए।
विद्युत विभाग द्वारा जनपद में शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में खाली जमीन देखकर कहीं भी हाइटेंशन व लो-टेंशन लाइनों का निर्माण कर दिया गया। जबकि उसी इलाके में सड़कों के मार्गों के किनारे की जगह का उपयोग नहीं किया गया। ऐसे में उक्त प्लाट या जमीनों पर स्वामियों द्वारा भवन, स्कूल या फिर अन्य प्रतिष्ठानों का निर्माण किया गया। लेकिन कई लोगों द्वारा विभागीय पेंच के चलते विद्युत विभाग से एनओसी नहीं ली गई और निर्माण कार्य करा लिया गया। जनपद में कई निजी व सरकारी विद्यालयों का निर्माण भी विद्युत विभाग से एनओसी लिए बिना ही कर लिया गया। जबकि कई वर्षों पूर्व निर्मित विद्यालयों के परिसरों या छतों के ऊपर से हाइटेंशन या लो-टेंशन लाइनों को बिछा दिया गया। जब विद्यालय प्रबंधनों द्वारा उक्त लाइनों को हटाने के लिए प्रयास किया और विद्युत विभाग से संपर्क साधा तो स्टीमेट जैसे कई पेंचों से बचने के चलते यह हाइटेंशन व लोटेंशन लाइनें अब तक नहीं हटाई जा सकीं। इसके चलते स्कूली छात्र-छात्राएं अब भी इन विद्युत तारों से निकली मौत के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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महरौनी के मड़ावरा रोड स्थित प्राइमरी और जूनियर हाइस्कूलों की छत से लोटेंशन लाइनें निकली हुई हैं, जबकि बीआरसी केंद्र के ऊपर से हाइटेंशन लाइनें निकली हुई हैं। यहां के विद्यालय प्रबंधन द्वारा मंगल दिवस पर जिलाधिकारी को भी उक्त विद्युत तारों को विद्यालय परिसर से हटवाने की मांग की गई। लेकिन अब तक उक्त मांग पर अमल नहीं किया जा सका है। वहीं, नगर के नारायणपुरा में प्राइमरी स्कूल के ठीक बाहर से हाइटेंशन लाइनें निकली हुई हैं। जबकि नगर के ही मुहल्ला पिसनारी में नहर के पास तो कई मकानों के ऊपर से ही हाइटेंशन लाइनें निकली हुई हैं। विभाग द्वारा मात्र नोटिस देने की बात तो की गई, लेकिन अब तक इस समस्या का निस्तारण नहीं किया जा सका है। यहां तो हाइटेंशन लाइनों के नीचे विभाग द्वारा गार्डिंग भी नहीं लगाई गई है। जबकि इस क्षेत्र में मकानों, व दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। इतनी बड़ी लापरवाही के प्रति विद्युत विभाग व विद्यालय प्रशासन मौन बना हुआ है। यदि शीघ्र ही विभाग द्वारा ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस प्रबंध नहीं किए गए, तो कभी भी गंभीर हादसा घटित हो सकता है, जहां मात्र अफसोस करने के अलावा और कुछ नहीं किया जा सकेगा।       
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ऐसे विद्यालयों को चिह्नित करते हुए उनकी सूची विद्युत विभाग को सौंपेंगे, जिससे स्कूलों से उन तारों को हटवाया जा सके। जहां तक निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की बात है, तो मान्यता देते समय इन पहलुओं को गंभीरता से लिया जाएगा।       

संतोष कुमार राय, बीएसए।       

यदि किसी विद्यालय प्रबंधन या शिक्षा विभाग द्वारा हाइटेंशन या लो-टेंशन तारों को हटवाने की मांग की जाती है, तो विद्युत विभाग द्वारा उस लाइन को हटवाने को स्टीमेट बनाया जाएगा और तारों को हटाया जाएगा। साथ ही उक्त लाइनों का सर्वे कराया जाएगा।       
गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता, विद्युत।
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