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हैंडपंप के पानी के साथ आती है बालू
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पाली। वार्ड कुरयाना मोहल्ला किले के पास के लोगों को गर्मी में पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। यहां के निवासियों को सुबह चार बजे से हैंडपंप पर जाना पड़ता है। इसकी वजह, दिनभर हैंडपंप चलने से पानी के साथ बालू आती है। इस कारण लोग सुबह से पानी भरते हैं।
इस क्षेत्र में एक हैंडपंप है, वह भी बालूयुक्त पानी दे रहा है। इस कारण सुबह चार बजे से पानी भरना पड़ता है। क्योंकि, रातभर हैंडपंप बंद रहता है। रातभर में बालू नीचे बैठ जाती है और हैंडपंप के पानी का उपयोग पीने और नहाने में हो जाता है। सुबह 4 से 7 बजे तक पानी के लिए हैंडपंप पर हाय तौबा रहती है। क्योंकि, एक ही हैंडपंप है और वह भी कम पानी दे रहा है। परेशान लोग कई बार नगर पंचायत में अपनी पीड़ा सुना चुके हैं, लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ नहीं मिला। आलम यह है कि यहां कि निवासी पहले पानी का प्रबंध करते हैं, फिर खाना बनाने की सोचते हैं।
नहाने से लेकर खाना बनाने तक के लिए पानी जुटाना पड़ता है। तीस घरों के बीच एक ही हैंडपंप है। सभी को सुबह जल्दी होती है, इससे चार बजे से ही पानी के लिए जोर अजमाइश शुरु हो जाती है।
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- देवबाई
बच्चे को लेकर पानी भरने के लिए जाना पड़ता है। हैंडपंप के निकट बाल्टी रखकर धूप से बचने के लिए पड़ोसी के बाद नंबर आने की प्रतीक्षा करती हूं।
- राजबाई
दोपहर में पानी भरकर रख लेती हूं, तब शाम का काम चलता है। रात में भरती हूं, तो सुबह की रोटी बनती है। खाने से ज्यादा पानी की दिक्कत होती है।
- नाराहटबाई
नागरिकों को बूंद-बूंद पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। पानी के लिए सुबह से रात तक मशक्कत करनी पड़ती है। वार्ड के निवासी वर्षों से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। नगर पंचायत में कई बार कह चुके, लेकिन पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हुआ। कई हैंडपंप ने पानी देना बंद कर दिया है। जो पानी दे रहे ,हैं उनमें आधे से अधिक गंदा पानी उगल रहे हैं।
- लक्षमण प्रसाद, पूर्व पार्षद
ट्यूबवेल और पाइप लाइन डलवाने के लिए नगर पंचायत बोर्ड में प्रस्ताव दे चुका हूं। प्रस्ताव स्वीकृत करके कार्य कराया जाएगा।
- रामकुमार चौरसिया, नगर पंचायत अध्यक्ष
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इस क्षेत्र में एक हैंडपंप है, वह भी बालूयुक्त पानी दे रहा है। इस कारण सुबह चार बजे से पानी भरना पड़ता है। क्योंकि, रातभर हैंडपंप बंद रहता है। रातभर में बालू नीचे बैठ जाती है और हैंडपंप के पानी का उपयोग पीने और नहाने में हो जाता है। सुबह 4 से 7 बजे तक पानी के लिए हैंडपंप पर हाय तौबा रहती है। क्योंकि, एक ही हैंडपंप है और वह भी कम पानी दे रहा है। परेशान लोग कई बार नगर पंचायत में अपनी पीड़ा सुना चुके हैं, लेकिन आश्वासन के सिवा उन्हें कुछ नहीं मिला। आलम यह है कि यहां कि निवासी पहले पानी का प्रबंध करते हैं, फिर खाना बनाने की सोचते हैं।
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नहाने से लेकर खाना बनाने तक के लिए पानी जुटाना पड़ता है। तीस घरों के बीच एक ही हैंडपंप है। सभी को सुबह जल्दी होती है, इससे चार बजे से ही पानी के लिए जोर अजमाइश शुरु हो जाती है।
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- देवबाई
बच्चे को लेकर पानी भरने के लिए जाना पड़ता है। हैंडपंप के निकट बाल्टी रखकर धूप से बचने के लिए पड़ोसी के बाद नंबर आने की प्रतीक्षा करती हूं।
- राजबाई
दोपहर में पानी भरकर रख लेती हूं, तब शाम का काम चलता है। रात में भरती हूं, तो सुबह की रोटी बनती है। खाने से ज्यादा पानी की दिक्कत होती है।
- नाराहटबाई
नागरिकों को बूंद-बूंद पानी के लिए जूझना पड़ रहा है। पानी के लिए सुबह से रात तक मशक्कत करनी पड़ती है। वार्ड के निवासी वर्षों से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। नगर पंचायत में कई बार कह चुके, लेकिन पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हुआ। कई हैंडपंप ने पानी देना बंद कर दिया है। जो पानी दे रहे ,हैं उनमें आधे से अधिक गंदा पानी उगल रहे हैं।
- लक्षमण प्रसाद, पूर्व पार्षद
ट्यूबवेल और पाइप लाइन डलवाने के लिए नगर पंचायत बोर्ड में प्रस्ताव दे चुका हूं। प्रस्ताव स्वीकृत करके कार्य कराया जाएगा।
- रामकुमार चौरसिया, नगर पंचायत अध्यक्ष