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हैंडपंप से कम निकलने लगा है पानी ग्रामीणों को हो रही है परेशानी
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ग्राम बिल्ला में हैंडपंप पर लगी भीड़
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। तहसील महरौनी के ग्राम बिल्ला में पेयजल संकट गहराने लगा है। गांव के हैंडपंप सूखने लगे हैं। गांव के लोगों को एक हैंडपंप पर ही पानी भरने के लिए जाना पड़ रहा है, जिससे हैंडपंप पर भीड़ लगी रहती है।
इन दिनों समूचे जिले में पानी की समस्या है। जिधर देखो, उधर पानी के लिए हाहाकार मचा है व लोग बूंद- बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल ग्राम पंचायत बिल्ला का है, यहां भी पेयजल संकट गहराने लगा है। गांव में लगे हैंडपंपों से पानी कम निकलने लगा है। जैसे-जैसे तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, वैसे- वैसे जमीन में पानी का स्तर नीचे जा रहा है। गांव में लगे हैंडपंप भी अब पानी का साथ छोड़ने लगे हैं।
ग्रामीणों की नींद हराम
गांव में स्थिति ऐसी है कि पानी के लिए लोग रात में सो नहीं पा रहे हैं। दिनभर हैंडपंप पर भीड़ लगी रहती है। इस कारण लोग रात में भी पानी भर रहे हैं। रात में जब भी लोगों की नींद खुलती है तो वे सीधे हैंडपंपों की ओर जाते हैं। गांव के अथाई मोहल्ले की स्थिति और भी खराब है। इस मोहल्ले के लोगों के लिए कुआं ही एकमात्र सहारा है।
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पानी की टंकी बनने से दूर होगी समस्या
गांव में कुआं और हैंडपंप हैं, लेकिन गर्मियों में यह पानी छोड़ देते हैं। इस वजह से गर्मियों के शुरु होते ही गांव में पानी की समस्या शुरू हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में पानी की टंकी बन जाए तो समस्या से छुटकारा मिल जाएगा और ग्रामीणों को पीने के लिए शुद्ध पेयजल मिलने लगेगा।
लटकी पड़ी बिल्ला ग्रामीण पेयजल योजना
गांव वालों को पानी की समस्या न हो, इसके लिए बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत बिल्ला ग्रामीण पेयजल योजना बनाई थी। इसकी लागत लगभग 48.85 करोड़ रुपये है। इस योजना को 2016 में मंजूरी मिल गई थी, लेकिन आज तक यह धरातल पर नहीं आ सकी। गांव वालों को यह योजना सिर्फ सपना बनकर रह गई। अगर यह योजना शुरू हो जाएगी तो बिल्ला गांव के अलावा इस क्षेत्र के लगभग 15 गांवों के करीब 28,000 ग्रामीणों को लाभ मिलने लगेगा। इसके लिए जामनी नदी से पानी लिया जाना है। योजना से ग्राम ककडारी, बंगरा, मौगान, गहरौन, बड़ोखरा, छिल्ला, भावनी, मर्रौली, बिल्ला, सूरीकला, जरावली, सूरी खुर्द, कुआगांव और टीला आदि गांवों को लाभ मिलेगा।
ग्रामीण पेयजल योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, लेकिन अब तक पैसा नहीं मिला है। इस कारण काम शुरू नहीं हो पाया है।
- प्रवीण कुट्टी, परियोजना प्रबंधक जल निगम
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इन दिनों समूचे जिले में पानी की समस्या है। जिधर देखो, उधर पानी के लिए हाहाकार मचा है व लोग बूंद- बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल ग्राम पंचायत बिल्ला का है, यहां भी पेयजल संकट गहराने लगा है। गांव में लगे हैंडपंपों से पानी कम निकलने लगा है। जैसे-जैसे तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, वैसे- वैसे जमीन में पानी का स्तर नीचे जा रहा है। गांव में लगे हैंडपंप भी अब पानी का साथ छोड़ने लगे हैं।
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ग्रामीणों की नींद हराम
गांव में स्थिति ऐसी है कि पानी के लिए लोग रात में सो नहीं पा रहे हैं। दिनभर हैंडपंप पर भीड़ लगी रहती है। इस कारण लोग रात में भी पानी भर रहे हैं। रात में जब भी लोगों की नींद खुलती है तो वे सीधे हैंडपंपों की ओर जाते हैं। गांव के अथाई मोहल्ले की स्थिति और भी खराब है। इस मोहल्ले के लोगों के लिए कुआं ही एकमात्र सहारा है।
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पानी की टंकी बनने से दूर होगी समस्या
गांव में कुआं और हैंडपंप हैं, लेकिन गर्मियों में यह पानी छोड़ देते हैं। इस वजह से गर्मियों के शुरु होते ही गांव में पानी की समस्या शुरू हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में पानी की टंकी बन जाए तो समस्या से छुटकारा मिल जाएगा और ग्रामीणों को पीने के लिए शुद्ध पेयजल मिलने लगेगा।
लटकी पड़ी बिल्ला ग्रामीण पेयजल योजना
गांव वालों को पानी की समस्या न हो, इसके लिए बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत बिल्ला ग्रामीण पेयजल योजना बनाई थी। इसकी लागत लगभग 48.85 करोड़ रुपये है। इस योजना को 2016 में मंजूरी मिल गई थी, लेकिन आज तक यह धरातल पर नहीं आ सकी। गांव वालों को यह योजना सिर्फ सपना बनकर रह गई। अगर यह योजना शुरू हो जाएगी तो बिल्ला गांव के अलावा इस क्षेत्र के लगभग 15 गांवों के करीब 28,000 ग्रामीणों को लाभ मिलने लगेगा। इसके लिए जामनी नदी से पानी लिया जाना है। योजना से ग्राम ककडारी, बंगरा, मौगान, गहरौन, बड़ोखरा, छिल्ला, भावनी, मर्रौली, बिल्ला, सूरीकला, जरावली, सूरी खुर्द, कुआगांव और टीला आदि गांवों को लाभ मिलेगा।
ग्रामीण पेयजल योजना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, लेकिन अब तक पैसा नहीं मिला है। इस कारण काम शुरू नहीं हो पाया है।
- प्रवीण कुट्टी, परियोजना प्रबंधक जल निगम