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प्रधानी की सीट बदलवाने को बता रहे जातीय गणित

Fri, 22 Jan 2021 01:17 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jan 2021 01:17 AM IST
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gram panchayat election
election-logo.jpg - फोटो : election-logo.jpg
ललितपुर। ग्राम पंचायत के प्रधान पद की सीटों का आरक्षण अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन स्थानीय लोग अपने-अपने हिसाब से सीट तय कराने की जुगत में लग गए हैं। जिले की कई ऐसी सीटें हैं जो लंबे समय से अनुसूचित जाति कोटे में नहीं आईं है, इन्हें लेकर ज्ञापनबाजी का दौर शुरू हो गया है।
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ग्राम प्रधानों का पिछले माह ही कार्यकाल समाप्त हुआ है। इसके बाद से ही गांवों में अभी से सियासत शुरू हो गई है। संभावित दावेदार स्थानीय लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए बैठकें कर रहे हैं। वहीं, कुछ ऐसे भी लोग हैं जो प्रधानी की सीट मनमाफिक करवाकर जीत के सपने संजो रखे हैं। उन्होंने सीट बदलवाने के लिए जातीय आंकड़ा तैयार कर लिया है और वह उसे अफसरों के समक्ष रख रहे हैं, ताकि प्रधानी की सीट परिसीमन में बदली जा सके। हालांकि, शासन स्तर से परिसीमन का फार्मूला तय होना है। जिलास्तर के अफसर शासन से कोई निर्णय होने के इंतजार में बैठे हैं। जिससे परिसीमन की प्रक्रिया लंबित है। इसके बाद भी कई लोगों ने ग्राम पंचायत के प्रधान पद की सीट बदलवाने के लिए अफसरों के पास चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं।
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ब्लॉक जखौरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मसौरा कलां के लोगों ने जिलाधिकारी एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को ज्ञापन देकर ग्राम प्रधान पद की सीट अनुसूचित जाति में आरक्षित करने की मांग की है। इसमें बताया गया है कि ग्राम पंचायत में प्रधान पद की सीट अभी तक अनुसूचित जाति में आरक्षित नहीं हो सकी है, जबकि यहां 30 प्रतिशत के लगभग अनुसूचित जाति के लोग निवास करते हैं। ज्ञापन पर वृषभान, जमना, मुकेश कोरी, देवेंद्र, मनोज राय, बबलू कोरी, बाबूलाल, भगुंते अहिरवार, हरचरन, विनोद, दीपू रैकवार, बारेलाल के हस्ताक्षर हैं।
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इसी प्रकार विकासखंड जखौरा की ही ग्राम पंचायत अधियारी के लोगों ने अफसरों को दिए ज्ञापन में बताया कि पिछले 15 वर्षों से ग्राम पंचायत प्रधान की सीट सामान्य होती चली आ रही है। यहां के लोग राजनीतिक हथकंडे अपनाकर एवं अधिकारियों से समन्वय बनाकर इसे सामान्य सीट में तब्दील करा लेते हैं, इससे अनूसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को मौका नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने परिसीमन प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने की मांग की है। ज्ञापन पर उत्तम, वंशीलाल, रामसेवक, प्रभु, तुलसीदास, रमेश, जगदीश अहिरवार, हनुमत, रामसेवक, लखन, सुखदेव के हस्ताक्षर हैं।
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