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सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योगो को बढावा दे सरकार
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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा दे सरकार
- नेहरू महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ने दिया सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर वाणिज्य डॉ. पराग अग्रवाल ने कहा कि कोरोना वायरस ने लोगों की परेशानी को काफी हद तक बढ़ा दिया है। प्रवासी मजदूरों के पलायन से उनके सामने रोजगार की समस्या बढ़ गई है। प्रदेश सरकार उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए पैकेज उपलब्ध करा रही है। जिसके चलते सरकार को चाहिए कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि प्राचीन काल मेें भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। क्योंकि, भारत में उत्पादित होने वाली वस्तुओं की विदेशों में बहुत मांग थी। भारत से बहुत बड़े स्तर पर वस्तुओं का निर्यात विदेशों में होता था। भारतीय उत्पादों को विदेशों में बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। इन उत्पादों पर बहुत भरोसा व विश्वास था। सभी उत्पाद स्वदेशी थे, तब हमारा देश आत्मनिर्भर था। उसी प्रण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ही आत्मनिर्भर भारत की फिर से संकल्पना की गई है।
20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज देश की विकास यात्रा को तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति प्रदान करेगा। केंद्र सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने और सुधार करने की कोशिश कर रही है। इसी में हम उप्र सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना को भी शामिल कर सकेंगे। इस योजना के माध्यम से राज्य में स्थानीय कौशल का विकास होगा।
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- नेहरू महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर ने दिया सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर वाणिज्य डॉ. पराग अग्रवाल ने कहा कि कोरोना वायरस ने लोगों की परेशानी को काफी हद तक बढ़ा दिया है। प्रवासी मजदूरों के पलायन से उनके सामने रोजगार की समस्या बढ़ गई है। प्रदेश सरकार उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए पैकेज उपलब्ध करा रही है। जिसके चलते सरकार को चाहिए कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि प्राचीन काल मेें भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। क्योंकि, भारत में उत्पादित होने वाली वस्तुओं की विदेशों में बहुत मांग थी। भारत से बहुत बड़े स्तर पर वस्तुओं का निर्यात विदेशों में होता था। भारतीय उत्पादों को विदेशों में बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। इन उत्पादों पर बहुत भरोसा व विश्वास था। सभी उत्पाद स्वदेशी थे, तब हमारा देश आत्मनिर्भर था। उसी प्रण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ही आत्मनिर्भर भारत की फिर से संकल्पना की गई है।
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20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज देश की विकास यात्रा को तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति प्रदान करेगा। केंद्र सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने और सुधार करने की कोशिश कर रही है। इसी में हम उप्र सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना को भी शामिल कर सकेंगे। इस योजना के माध्यम से राज्य में स्थानीय कौशल का विकास होगा।
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