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फुटकर माल के नाम पर हो रही सेल टैक्स चोरी

Mon, 01 Aug 2016 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 01 Aug 2016 12:28 AM IST
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Getting the name of retail goods sales tax
tax chori, lalitpur news - फोटो : amar ujala, lalitpur news
ललितपुर। शहर में खुले आम हो रही सेल टैक्स चोरी का खेल किसी से छिपा नहीं है। विभागीय अधिकारियों के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों को भी इसकी जानकारी होने के बाद भी सचल दल के अधिकारी इन सेल टैक्स चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रहे है। व्यापारी संगठनों ने टैक्स चोरों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने की मांग की है।  
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शहर के बीचों-बीच स्थित नझाई बाजार सेल टैक्स चोरी के गढ़ के रूप में चर्चा में है। बाजार में 24 घंटों में 20 घंटे तक विभिन्न तरह का माल लोड व अनलोड होता रहता है। शहर में एक दर्जन के करीब ट्रांसपोर्ट कंपनियां हैं, जिनका दिन भर में लगभग एक सैकड़ा से अधिक ट्रकों से माल आता है। इनमें से आधा सैकड़ा ट्रक केवल नझाई बाजार में ही माल उतारा जाता हैं। सेल टैक्स विभाग व मंडी समिति के सचल दलों के अधिकारियों द्वारा माल के बिल चैक करने में खास दिलचस्पी नहीं ली जा रही है।
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दोनों संबंधित विभागों के अधिकारी शहर के अंदर अनलोड हो रही माल के बिल चैक करने की वजह केवल झांसी व सागर की ओर से शहर में प्रवेश होने वाले प्वाइंट पर ही कभी-कभार चैकिंग कर लेते हैं। वहीं, शहर में सुबह से देर रात तक ट्रकों की इंट्री होने से सचल दल को भी समस्त वाहनों की चैकिंग करने में परेशानी होती है। यदि अधिकारी शहर के भीतर बाजार में चैकिंग करते है, तो उन्हें व्यापारियों का विरोध झेलना पड़ता है। ऐसा पूर्व में कई बार हुआ है, जब व्यापारियाें द्वारा अधिकारियों पर अवैध वसूली करने का आरोप लगते रहे है। जिसको लेकर सचल दल प्रभारियों को निर्देश दिए थे कि वह बाजार
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में चैकिंग के दौरान सदर एसडीएम को सूचित करें।

उल्लेखनीय है कि शहर में ज्यादातर माल फुटकर आता है, एक ही ट्रक में बीस से तीस तरह का माल होगा और सभी अलग-अलग व्यापारियों का होता है। इसमें कई तरह की खाद्य सामग्री भी होती है, जिस पर सेल टैक्स के अलावा मंडी शुल्क भी लगता है, लेकिन सब दलालों के भरोसे चल रहा है। इसमें कुछ माल का बिल होता है और बाकी का बिना बिल के ही ठिकाने पर लग जाता है। ऐसा करके व्यापारी तीस से चालीस प्रतिशत टैक्स की चोरी कर सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये का चूना लगा रहा है।

बिल का है सारा खेल
जब ट्रक लोड होकर ट्रांसपोर्ट पर आता है तो माल के साथ बिल भी आता है। यहां पर अधिकारियों के द्वारा चैक करके नेट पर अपलोड नहीं किया जाता है। माल अनलोड होने के बाद यही बिल वापस चला जाता है और करीब चालीस प्रतिशत तक का टैक्स चोरी कर लिया जाता है। जब दोबारा माल आता है, तो यही बिल फिर से माल के साथ भेज दिया जाता है। यह प्रक्रिया जब तक चलती है, जब तक कि यह बिल क्रमांक नेट पर अपलोड नहीं हो जाता है। जानकार बताते है कि कई बार एक ही बिल पर दर्जनों बार माल आ जाता है। सेल टैक्स चोरी का यही मुख्य खेल है, जो बिल के नाम पर खेला जाता है। 
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इंदौर माल की सबसे अधिक हो रही खपत
शहर में मध्य प्रदेश से आने वाला माल नंबर दो में आ रहा है। शहर में मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से सबसे अधिक माल आता है, इसमें इलैक्ट्रैनिक समेत फार्चून व इस्पात का माल अधिक मात्रा में आता है। शहर की सीमा तीन ओर से मध्यप्रदेश की सीमा से घिरा हुई है, जिसका फायदा उठाते हुए व्यापारी टैक्स चोरी का गोरखधंधा कर रहे हैं। 

मुखबिरों से ज्यादा दलाल सक्रिय 
शहर में खुले आम चल रहे टैक्स चोरी के गोरखधंधे को सेल टैक्स विभाग के अधिकारी रोक नहीं पा रहे हैं। इसके पीछे का सबसे बड़ा करण है कि अधिकारियों का मुखबिर तंत्र व्यापारियों के दलाल तंत्र से कमजोर है। इसी वजह से सचल दल के अधिकारी नंबर दो के माल की जानकारी नहीं कर पाते हैं, लेकिन कुछ व्यापारी अधिकारियों के चैकिंग प्वाइंट की जानकारी आसानी से कर लेते हैं। 

ट्रांसपोर्ट एजेंसी लेती हैं ठेका
शहर में एक दर्जन के करीब ट्रांसपोर्ट एजेंसी संचालित हैं। सबसे अधिक ट्रांसपोर्ट एजेंसी उसी कंपनी की चलती है, जो टैक्स चोरी के माल को सुरक्षित व्यापारी के पास पहुंचाने का ठेका कम कमीशन में ले लेती है। सबसे अधिक टैक्स चोरी का माल आगरा, झांसी की ओर से आने वाले ट्रांसपोर्ट में होता है। व्यापारी को अपना माल उठाने के लिए नहीं आना पड़ता है, ट्रांसपोर्ट एजेंसी व्यापारी की गोदाम तक ही माल को सुरक्षित पहुंचा देते हैं। शहर में यह चर्चा आम हो गई है कि इन ट्रांसपोर्ट एजेंसी वालों के सभी अधिकारियों से सांठ-गांठ होती है। 

अधिकारियों के मोबाइल पड़े बंद
स्थानीय सेल टैक्स विभाग के अधिकारियों के सीयूजी नंबर पिछले डेढ़ माह से बंद पड़े हुए है। विभाग के डिप्टी कमिश्नर, अस्सिटेंट कमिश्नर व सचल दल अधिकारियों के सीयूजी नंबर बंद चल रहे है। यदि इस दौरान कोई व्यक्ति नंबर दो के माल की सूचना देना चाहे तो वह इन अधिकारियों से संपर्क ही नहीं कर सकता है। इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर दिनेश पाल ने बताया कि नंबर प्रदेश मुख्यालय से ही बंद है और वहीं से ही चालू किए जाएंगे।

शहर के कुछ सफेद पोश व्यापारियों द्वारा विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से सेल टैक्स चोरी का गोरखधंधा चलाया जा रहा है। माल पर तीस से चालीस प्रतिशत टैक्स बचाकर यह बेईमान व्यापारी बाजार में कम दामों पर माल बेच रहे हैं, इससे टैक्स अदा करने वाले ईमानदार व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हमारे संगठन ने मिली भगत से चल रहे इस गोरखधंधे को बंद कराने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों से मांग की है, लेकिन खिलाफ कोई खास कदम नहीं उठाया जा रहा है।

सुमित अग्रवाल
-संयोजक, संयुक्त व्यापार मंडल

शहर में ज्यादा माल फुटकर आता है। इस कारण से सभी मालों को चेक करना संभव नहीं है। छोटा शहर व प्रदेश की आखिरी सीमा होने के कारण बिल चेक करने का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाता है। शत प्रतिशत बिल पर माल न आने की सूचना मिली है, इस पर कार्रवाई की जाएगी।
 - दिनेश पाल 
डिप्टी कमिश्नर सेल टैक्स विभाग
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